संध्या समय न्यूज
दिल्ली में कर्ज प्रबंधन को लेकर भाजपा और आप पार्टी के बीच सियासी संघर्ष तेज हो गया है। दिल्ली सरकार द्वारा एक हजार करोड़ रुपये के ऋण प्रबंधन पर उठ रहे सवालों के बीच दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आप नेतृत्व पर जमकर हमला बोला है। सचदेवा ने आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के हाल ही के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें पुराने आंकड़ों की याद दिलाई है।
सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है ऋण लेना: सचदेवा
भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने इस पूरे मामले को ‘राजनीतिक बयानबाजी’ बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों के लिए विकास कार्यों और वित्तीय प्रबंधन के लिए ऋण लेना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकारें भारत सरकार, रिजर्व बैंक या रिजर्व बैंक की अनुमति से किसी वित्तीय संस्था अथवा खुले बाजार से अल्पकालिक या दीर्घकालिक ऋण लेती रही हैं। यह एक स्थापित व्यवस्था है, जिसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।”
केजरीवाल सरकार ने भी कई बार मांगा था कर्ज
सचदेवा ने आरोप लगाया कि आप की पिछली सरकार ने भी अतीत में कई बार ऋण लेने का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा, “अरविंद केजरीवाल सरकार ने वर्ष 2020 और 2022 में भी भारत सरकार से ऋण की मांग की थी। इसके अलावा, आतिशी मार्लेना के नेतृत्व वाली सरकार ने नवंबर 2024 में चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय लघु बचत कोष से 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा था, जिसका उद्देश्य चुनावी योजनाओं को लागू करना था।”
11 साल में 1.20 लाख करोड़ का बोझ
भाजपा नेता ने दावा किया कि आप की 11 वर्षों की सरकार ने दिल्ली पर भारी कर्ज का बोझ छोड़ा है। उन्होंने दिल्ली सरकार के 2024-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, “आप की सरकार के बाद दिल्ली पर करीब 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। यह पिछली सरकार के वित्तीय प्रबंधन का पर्दाफाश करता है।”
उन्होंने कहा कि वर्तमान में रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता के पहले वर्ष में केवल एक हजार करोड़ रुपये का ऋण विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित किया है, जबकि आप ने चुनाव से दो महीने पहले ‘चुनावी रेवड़ियों’ के लिए 10 हजार करोड़ का प्रस्ताव रखा था।
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पंजाब के हालात पर भी साधा निशाना
सचदेवा ने सौरभ भारद्वाज को नसीहत देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार पर टिप्पणी करने से पहले उन्हें अपनी पार्टी की पंजाब सरकार के वित्तीय हालात पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा, “पंजाब में आप की सरकार ने अपने पहले ही वर्ष में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था और आज राज्य पर चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है।”




















