Punjab News: पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान आज (मंगलवार) राष्ट्रपति भवन पहुंच गए हैं। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे को लेकर अवैध और गैर-कानूनी दलबदल का मामला उठाएंगे। इस मुलाकात से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए एक बार फिर भगवंत मान ने इन बागी सांसदों पर जमकर निशाना साधा।
“जनता के जनादेश का अपमान करने वाले कोई दया के पात्र नहीं”
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़े शब्दों में कहा कि जनता के जनादेश का अपमान करने वाले ये सांसद किसी भी दया के पात्र नहीं हैं, क्योंकि वे पंजाब और पंजाबियों के गद्दार हैं। उन्होंने साफ किया कि उन्हें राष्ट्रपति भवन से पुष्टि मिल गई है और वे मंगलवार को राष्ट्रपति को हर बात से अवगत कराएंगे। मान ने पूछा कि क्या भाजपा में शामिल होने के बाद कोई कानून से ऊपर हो सकता है? कानून सबसे ऊपर है।” उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति को इस अवैध दलबदल की पूरी जानकारी देंगे।
राज्यसभा में आप पार्टी की संख्या घटकर हुई महज 3
बता दें कि पिछले महीने (अप्रैल) में आप पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों—राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। इस बड़े झटके के बाद उच्च सदन (राज्यसभा) में आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या 10 से घटकर मात्र 3 रह गई है।
“दलबदल को सामान्य बताना अस्वीकार्य”
भगवंत मान ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो इस दलबदल को राजनीति की एक सामान्य परंपरा बता रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग इसे सामान्य बात बता रहे हैं, वे जनता के फैसले की घोर अवहेलना को उचित ठहरा रहे हैं। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ऐसी बातें करने वाले लोग खुद अपनी निष्ठा बदलने की तैयारी में लगे हैं।”
फ्लोर टेस्ट की मांग खारिज, कहा- “सरकार पूर्ण बहुमत में”
इस बीच, विपक्ष द्वारा सरकार की कमजोरी को लेकर उठाए जा रहे फ्लोर टेस्ट की मांग को भगवंत मान ने बेहद अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार को सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह पूर्ण विश्वास प्राप्त है। बजट सुचारू रूप से पारित हो गया है और हर छोटा-बड़ा विधेयक सदन में सफलतापूर्वक पारित हो गया है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार सदन में पूर्ण बहुमत में है।”
आलोचकों को दी चुनौती
अपने आलोचकों पर पलटवार करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग विधानसभा सत्र बुलाने के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें पहले केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के लिए की गई गारंटियों को पूरा करने का जवाब देना होगा। उसके बाद ही वे राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने का हकदार हैं।






















