ऋषी तिवारी
मुंबई। मीरा-भायंदर महानगरपालिका चुनाव 2026 में भाजपा ने भले ही स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर ली हो, लेकिन नगर निगम की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आपसी गठबंधन कर लिया है। इस गठबंधन का नाम ‘मीरा-भायंदर विकास आघाड़ी’ रखा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे गुट) के नगरसेवकों ने विपक्ष के रूप में एकजुट होकर यह आघाड़ी गठित की है। कांग्रेस के नगरसेवक जय ठाकूर को आघाड़ी का नेता चुना गया है। इस संबंध में गुट पंजीकरण की प्रक्रिया बुधवार को मुंबई स्थित कोकण भवन में पूरी की गई।
विपक्ष के नेता का रास्ता साफ
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने गठबंधन की पुष्टि करते हुए बताया कि कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों ने मिलकर मीरा-भायंदर विकास आघाड़ी बनाई है। इसके गठन से महानगरपालिका में विपक्ष के नेता पद के लिए आधिकारिक रूप से रास्ता साफ हो गया है।
यह भी पढ़ें : फिल्म ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ की यात्रा ईमानदारी और संतुलन के साथ पर्दे पर
बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत
मीरा-भायंदर महानगरपालिका में कुल 95 निर्वाचित नगरसेवक हैं। इनमें से 78 नगरसेवक भाजपा के हैं, जिसके चलते सत्ता पूरी तरह भाजपा के हाथ में है। वहीं विपक्ष में कांग्रेस के 13, शिवसेना (शिंदे गुट) के 3 और 1 निर्दलीय नगरसेवक हैं। इस तरह कांग्रेस और शिवसेना को मिलाकर विपक्ष की कुल संख्या 16 हो गई है।
सबसे बड़ी विपक्षी आघाड़ी बनी
महानगरपालिका के नियमों के अनुसार, सत्ताधारी दल के बाद सबसे अधिक संख्या वाले दल या आघाड़ी को विपक्ष के नेता का पद मिलता है। इसी आधार पर मीरा-भायंदर विकास आघाड़ी अब महानगरपालिका की सबसे बड़ी विपक्षी आघाड़ी बन गई है। इसके साथ ही स्थायी समिति की सदस्यता और नामांकित नगरसेवक जैसे पदों के लिए भी रास्ता खुल गया है।
बीजेपी ने साधा निशाना
इस राजनीतिक घटनाक्रम पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मनपा चुनाव से पहले भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने कई बार कांग्रेस और शिवसेना के बीच कथित गुप्त गठबंधन का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं का कहना है कि अब यह आरोप सही साबित हो रहा है। उनका दावा है कि मीरा-भायंदर विकास आघाड़ी का गठन विपक्ष के “दोहरे चेहरे” को जनता के सामने उजागर करता है। भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि शिवसेना एक ओर कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जबकि दूसरी ओर मराठी महापौर के मुद्दे पर भाजपा का समर्थन करते हुए मराठी एकीकरण समिति और मनसे के आंदोलन का विरोध कर रही है।
बढ़ेगा राजनीतिक टकराव
कुल मिलाकर, भले ही मीरा-भायंदर महानगरपालिका में सत्ता भाजपा के पास हो, लेकिन मीरा-भायंदर विकास आघाड़ी के गठन से राजनीतिक संघर्ष तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन आने वाले दिनों में सदन में बीजेपी के फैसलों के खिलाफ संगठित और आक्रामक विरोध कर सकता है।

























