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महाराष्ट्र में भाषा नीति सख्त, परिवहन विभाग का नया आदेश

प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए लगभग चार हजार शिक्षकों को शामिल करने की योजना है। इनमें से कुछ शिक्षक स्वेच्छा से सेवा देंगे, जबकि कुछ को प्रति घंटे लगभग 1000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने लगभग दो करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था निर्धारित की है।

महाराष्ट्र में गैर-मराठी चालकों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य, 2026 तक डेडलाइन तय

HIGHLIGHTS

  • मराठी भाषा नियम लागू, चालकों के लिए प्रशिक्षण केंद्र खुलेंगे
  • गैर-मराठी ड्राइवरों के लिए मराठी परीक्षा अनिवार्य
  • 4000 शिक्षक देंगे मराठी प्रशिक्षण, सरकार की नई योजना
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन मराठी क्लासेस अनिवार्य, सरकार की पहल
  • 16 अगस्त 2026 से नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई तय

Maharashtra Marathi Language Rule: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मराठी भाषा के प्रसार और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत अब राज्य में काम करने वाले गैर-मराठी रिक्शा और टैक्सी चालकों को 15 अगस्त 2026 तक व्यावहारिक मराठी भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा के बाद यानी 16 अगस्त 2026 से नियमों का पालन न करने वाले चालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह निर्णय हाल ही में परिवहन विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस पहल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और आम नागरिकों के साथ संवाद को मजबूत बनाने के लिए यह कदम आवश्यक है। उनके अनुसार, भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण आधार भी है।

राज्यभर में प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना

सरकार की योजना के अनुसार पूरे महाराष्ट्र में मराठी भाषा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से काम करेंगे, ताकि अधिक से अधिक चालक इस प्रशिक्षण का लाभ उठा सकें। इन केंद्रों पर विशेष रूप से तैयार किया गया पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो रोजमर्रा के संवाद और व्यवहारिक मराठी पर आधारित होगा।

इसके साथ ही उपकेंद्र भी बनाए जाएंगे ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के चालक भी आसानी से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी चालक भाषा की बाधा के कारण यात्रियों से संवाद में कठिनाई महसूस न करे।

प्रशिक्षण व्यवस्था और पाठ्यक्रम

प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए लगभग चार हजार शिक्षकों को शामिल करने की योजना है। इनमें से कुछ शिक्षक स्वेच्छा से सेवा देंगे, जबकि कुछ को प्रति घंटे लगभग 1000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने लगभग दो करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था निर्धारित की है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम को विशेष रूप से सप्ताहांत (हर महीने के चार शनिवार और रविवार) पर आयोजित किया जाएगा, ताकि चालकों के कामकाज पर असर न पड़े। प्रत्येक सत्र कम से कम चार घंटे का होगा। इस दौरान चालकों को यात्रियों से बातचीत, दिशा पूछने-समझाने, आपात स्थिति में संवाद और सामान्य व्यवहारिक मराठी सिखाई जाएगी।

ऑनलाइन प्रशिक्षण और प्रमाणन व्यवस्था

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो चालक नियमित रूप से केंद्रों पर उपस्थित नहीं हो सकते, वे ऑनलाइन माध्यम से भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जहां वीडियो लेक्चर, अभ्यास सामग्री और इंटरैक्टिव सत्र उपलब्ध होंगे।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद चालकों की एक मौखिक परीक्षा ली जाएगी ताकि उनकी व्यवहारिक भाषा क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके। सफल उम्मीदवारों को परिवहन विभाग की ओर से प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। यह प्रमाणपत्र भविष्य में उनके पेशेवर रिकॉर्ड का हिस्सा होगा।

भाषा प्रचार-प्रसार अभियान

मराठी भाषा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार एक व्यापक जनजागरण अभियान भी शुरू करने जा रही है। इसके तहत रिक्शा यूनियनों, ऑटो स्टैंड्स और विभिन्न शिवसेना शाखाओं में भी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

इसके अलावा शहरों में सार्वजनिक परिवहन वाहनों जैसे रिक्शा, टैक्सी, ओला, उबर और रैपिडो पर मराठी भाषा से संबंधित स्टिकर्स लगाए जाएंगे। इन स्टिकर्स का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच मराठी भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

सरकार का उद्देश्य और प्रतिक्रिया

सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र में स्थानीय भाषा के उपयोग को बढ़ावा देना और यात्रियों को बेहतर संवाद सुविधा प्रदान करना है। विशेषकर बड़े शहरों जैसे मुंबई, पुणे और नागपुर में लाखों गैर-मराठी चालक काम करते हैं, जिनके लिए यह प्रशिक्षण उपयोगी साबित होगा।

हालांकि, इस फैसले पर विभिन्न वर्गों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक संरक्षण और बेहतर सेवा की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे अतिरिक्त दबाव के रूप में देख रहे हैं। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य किसी पर दबाव डालना नहीं बल्कि सहयोगात्मक तरीके से भाषा सीखने की सुविधा देना है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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