शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए बन रहे ठाणे रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट अब राजनीतिक उठापटक का केंद्र बनता जा रहा है। मेट्रो के रूट को लेकर सत्ताधारी शिंदे सेना के भीतर ही फूट पड़ गई है। एक ओर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक रूट में बदलाव की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अपने ही स्थानीय नगरसेवक और इलाके के नागरिक इस प्रस्ताव के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
नया रूट क्या है और पुराना रूट कौन सा था?
रिंग मेट्रो के लिए मूल रूप से जो मार्ग निर्धारित किया गया था, उसमें लोकमान्यनगर, शिवाईनगर और उपवन जैसे प्रमुख इलाके शामिल थे। इस रूट पर काफी समय से काम की तैयारी चल रही थी और स्थानीय लोग इसे अपनी पहली पसंद मानते आए हैं।
लेकिन परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में एक वैकल्पिक रूट का सुझाव दिया है। उनके प्रस्ताव के अनुसार, मेट्रो को लोकमान्य टीएमटी डिपो से शुरू होकर आई माता मंदिर, कोरस रोड, वर्तकनगर नाका और शास्त्रीनगर के रास्ते गुजारा जाए। इस तरह के बदलाव से कई इलाकों के लोगों को फायदा हो सकता है, लेकिन जिन क्षेत्रों से नया रूट गुजरेगा, वहां के निवासियों की चिंताएं भी गहराती जा रही हैं।
नगरसेवकों ने कंधे से कंधा मिलाया
सरनाईक के सुझाए गए रूट के खिलाफ स्थानीय स्तर पर आवाज उठनी शुरू हो गई है। नगरसेवक दिलीप बारटक्के और कांचन चिंदरकर के नेतृत्व में आई माता चौक पर बड़ा प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें भारी संख्या में सामान्य नागरिकों ने हिस्सा लिया और मानव श्रृंखला बनाकर अपनी भावना जाहिर की।
आसपास की कई सोसायटियों के लोग परिवार सहित मैदान में उतरे। म्हाडा वसाहत, दोस्ती, वेदांत कॉम्प्लेक्स, कोरस टॉवर और रुणवाल प्लाजा जैसे इलाकों से आए लोगों ने एक स्वर में मांग की कि रिंग मेट्रो का रूट किसी भी हालत में नहीं बदला जाए।
नागरिकों की चिंताएं क्यों गहरी?
नए रूट का विरोध करने वालों की आशंकाएं किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। उनका कहना है कि बदलाव की स्थिति में कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं, जिनमें प्रमुख हैं नए मार्ग पर मेट्रो की पटरियों और पिलर्स के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई करनी पड़ सकती है, जिससे इलाके का वातावरण प्रभावित होगा।
सड़कों के नीचे बिछी सर्विस लाइनों, पानी के पाइपलाइन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को हटाने या शिफ्ट करने की मजबूरी आ सकती है। रूट पर पड़ने वाली कुछ संपत्तियों से प्रभावित परिवारों को अपना घर छोड़ने की स्थिति बन सकती है।
“मेट्रो चाहिए, लेकिन मूल रूट पर”
प्रदर्शनकारियों ने बार-बार साफ किया कि वे किसी भी सूरत में रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट के खिलाफ नहीं हैं। उनका पूरा संघर्ष सिर्फ रूट को लेकर है। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जोर-जोर से नारे लगाए — *”मेट्रो चाहिए, लेकिन पुराने रूट पर।”* यह नारा दरअसल इस बात का संदेश था कि विकास की राह में उनका समर्थन है, लेकिन योजना को बदलने के लिए उनकी सहमति जरूरी है।
शिंदे सेना में आपसी खींचतान सामने आई
इस पूरे विवाद ने सत्ताधारी पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को भी सार्वजनिक कर दिया है। मंत्री प्रताप सरनाईक की ओर से नए रूट की पैरवी हो रही है, जबकि पार्टी के स्थानीय नगरसेवक और कार्यकर्ता पुराने रूट को बचाने के लिए लोगों के साथ खड़े दिख रहे हैं। यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि नगर निगम चुनाव के मद्देनजर हर नगरसेवक अपने वार्ड की जनता की भावनाओं को नजरअंदाज करना आसान नहीं समझता।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तक पहुंचा मामला
प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि इस विवाद की जानकारी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तक पहुंचाई जा चुकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं। क्या मूल रूट पर ही काम जारी रहेगा, या सरनाईक का प्रस्ताव मंजूर मिलेगा — यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

























