मिडिल ईस्ट में जंग के साये के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर वॉशिंगटन ईरान पर लगाई गई नाकेबंदी और दूसरी प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां वापस ले लेता है, तो तेहरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुसार इस अहम जलमार्ग को फिर से सामान्य गतिविधियों के लिए खोलने को तैयार है।
भारत के मीडिया से बातचीत में दी ये तस्वीर
इंडिया टुडे के साथ एक खास इंटरव्यू में पेजेश्कियान ने बताया कि ईरान इस रणनीतिक जलडमरूमध्य को लेकर पड़ोसी देश ओमान के साथ एक विशेष समुद्री फ्रेमवर्क पर बातचीत कर रहा था। जब उनसे इस जलमार्ग की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाया गया, तो ईरानी राष्ट्रपति ने अपने देश की स्थिति का बचाव करते हुए कहा कि तेहरान दरअसल अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से किए गए हमलों तथा दबाव का प्रतिक्रिया दे रहा था।
‘हिज़्बुल्लाह या हमने नहीं की शुरुआत’
पेजेश्कियान ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में तनाव की शुरुआत ईरान या हिज़्बुल्लाह जैसे समूहों ने नहीं की। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हिज़्बुल्लाह या हमने इसकी शुरुआत की है। ये सभी ग्रुप अपना बचाव कर रहे हैं।”
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वॉशिंगटन एक ओर इस इलाके में हथियारों का जखीरा भर रहा है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय देशों के समुद्री रास्तों को क्यों बंद कर रहा है। उन्होंने कहा, “अमेरिका किस अधिकार के तहत हमारे इलाके पर हमला कर रहा है और हमारे रास्तों को रोक रहा है? क्या हमें चुपचाप बैठे रहना चाहिए?”
‘जिंदा हैं तो जवाब देना होगा’
इस इंटरव्यू का सबसे चर्चित और कड़ा बयान तब आया जब पेजेश्कियान ने कहा, “अगर हम ज़िंदा हैं, तो हमें जवाब देना होगा। मरने के बाद जवाब नहीं दिया जा सकता, इसलिए हम ज़िंदा हैं और हम जवाब देंगे।” यह बयान दर्शाता है कि ईरान की ओर से अमेरिका को दिया जा रहा संदेश कितना सख्त है।
होर्मुज खोलने की शर्त — प्रतिबंध हटाना
पेजेश्कियान ने यह भी साफ कर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का मामला सीधे तौर पर ईरान पर लगाए जा रहे अमेरिकी दबाव के खत्म होने से जुड़ा है। आम ईरानी नागरिकों की मुश्किलों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों का असर सिर्फ सरकार या सैन्य पर नहीं पड़ता, बल्कि इनका भार आम जनता उठाती है।
उन्होंने कहा, “अगर अमेरिकी यह नाकेबंदी और प्रतिबंध हटा लें, तो स्थिति बदल सकती है। आपको पता है कि प्रतिबंधों का मतलब है — मरीजों की जान छीनना, लोगों को बेरोजगार करना, गरीबी और असंतोष फैलाना तथा हजारों तरह की समस्याएं पैदा करना।”
‘सैन्य नाकामी के बाद अब आर्थिक हथियार’
ईरानी राष्ट्रपति का तर्क था कि सैन्य कार्रवाई से अपने लक्ष्य हासिल करने में असफल रहने के बाद वॉशिंगटन अब आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल कर ईरानी जनता पर दबाव डाल रहा है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध के रास्ते से जो हासिल नहीं हो पाया, वह आर्थिक गतिविधियों के जरिए भी हासिल नहीं होगा और अमेरिका इस बार भी नाकाम रहेगा।
भारत के लिए क्यों है होर्मुज जीवनरेखा
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी कॉरिडोर में शुमार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास होने वाली किसी भी रुकावट से भारत समेत कई देश गंभीर चिंता में हैं। इस जलमार्ग का खास महत्व भारत के लिए इसलिए है क्योंकि देश की ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से होकर इसी रास्ते आता है। यहां कोई भी गड़बड़ी सीधे भारत के कच्चे तेल के दामों और आपूर्ति पर असर डाल सकती है।


























