BRICS समिट से पहले जेवर पर उतरे रूसी विमान, रच दिया इतिहास!

BRICS में दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं और इस साल भारत की अध्यक्षता में सप्लाई चेन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, फार्मा जैसे क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने पर फोकस है। ऐसे में जेवर सिर्फ यात्री हवाई अड्डा नहीं रह गया है।

BRICS समिट 2026 से चर्चा में आया जेवर एयरपोर्ट

HIGHLIGHTS

  • सिर्फ कुछ महीने पुराने जेवर एयरपोर्ट ने कर दिखाया बड़ा कारनामा!
  • जेवर बनेगा उत्तर भारत की सप्लाई चेन का सबसे बड़ा केंद्र!
  • 3,630 करोड़ का कॉरिडोर मंजूर, जेवर की किस्मत बदलने जा रहा!
  • चिप से मेडिकल डिवाइस तक, जेवर से दुनिया तक जाएगा माल!

उत्तर प्रदेश का जेवर एयरपोर्ट इन दिनों पूरे देश की चर्चा में है। वजह है भारत की अध्यक्षता में हो रहा BRICS समिट 2026। दिल्ली में आयोजित हो रहे इस बड़े डिप्लोमेटिक इवेंट ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर को वैश्विक नक्शे पर खड़ा कर दिया है। समिट की तैयारियों के बीच रूस के तीन सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान यहां उतरे, जिनमें रूस की एडवांस टीम और सुरक्षा अधिकारी पहुंचे थे। खास बात यह है कि एयरपोर्ट के इतिहास में यह किसी विदेशी विमान की पहली लैंडिंग थी।

सिर्फ कुछ महीने पुराने एयरपोर्ट ने उठाया बड़ा टेस्ट

जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन मार्च 2026 में हुआ था और अब तक यहां से सिर्फ घरेलू उड़ानें संचालित हो रही हैं। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की है। ऐसे में जब बिना नियमित इंटरनेशनल ऑपरेशन के यहां विदेशी सैन्य विमान उतरे और एयरपोर्ट ने उन्हें बखूबी संभाला, तो इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, यहां से नियमित अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर फ्लाइट्स का सफर अभी शुरू होना बाकी है, लेकिन रूसी विमानों की लैंडिंग ने साबित कर दिया कि जेवर बड़े स्तर की सुरक्षा और डिप्लोमेटिक उड़ानों की जिम्मेदारी निभाने के काबिल है।

BRICS के लिए क्यों खास है जेवर?

BRICS में दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं और इस साल भारत की अध्यक्षता में सप्लाई चेन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, फार्मा जैसे क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने पर फोकस है। ऐसे में जेवर सिर्फ यात्री हवाई अड्डा नहीं रह गया है। एयरपोर्ट के गिर्द एक विशाल औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो रहा है, जिसमें कार्गो, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइस और एविएशन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

22 हजार वर्ग मीटर का कार्गो वेयरहाउस, हर साल 2 लाख टन क्षमता

एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल में करीब 22 हजार वर्ग मीटर का वेयरहाउस बनाया गया है। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता हर साल लगभग 2 लाख टन माल ढुलाई की है। यानी आने वाले वक्त में जेवर से सिर्फ यात्री नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर चिप, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मेडिकल उपकरण, ऑटो कलपुर्जे और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट दुनिया के विभिन्न बाजारों तक निर्यात हो सकेंगे।

सेमीकंडक्टर से मेडटेक तक फैला बड़ा इंडस्ट्रियल प्लान

एयरपोर्ट के आसपास YEIDA के इलाके में निवेश का रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। HCL-फॉक्सकॉन का करीब 3,700 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट यहां डिस्प्ले ड्राइवर चिप निर्माण की दिशा में काम कर रहा है। इसके अलावा एयरपोर्ट के नजदीक लगभग 350 एकड़ में मेडटेक हब विकसित किया जा रहा है, जहां मेडिकल डिवाइस बनाने वाली देशी-विदेशी कंपनियों के आने की उम्मीद है। एविएशन सेक्टर में MRO यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल की सुविधाएं भी जुड़ रही हैं। साफ है कि जेवर के इर्द-गिर्द धीरे-धीरे एयरपोर्ट आधारित एक पूरा इंडस्ट्रियल सिटी सेक्टर उभर रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती कनेक्टिविटी की

लेकिन इतने बड़े प्लान के बावजूद जेवर के सामने एक अहम सवाल है- कनेक्टिविटी। दिल्ली से जेवर पहुंचने में IGI एयरपोर्ट के मुकाबले ज्यादा समय लग सकता है। शुरुआती दौर में यात्रियों की संख्या और उड़ानों की सीमित संख्या को लेकर भी चुनौतियां सामने आई हैं। ऐसे में एयरपोर्ट को मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ना सबसे जरूरी हो गया है।

3,630 करोड़ के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को मिली मंजूरी

इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने करीब 3,630 करोड़ रुपये की लागत वाले 31 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है। यह कॉरिडोर जेवर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ेगा। इसके जरिए एयरपोर्ट को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से बेहतर लिंक मिलेगी। अगर यह कनेक्टिविटी जमीन पर उतरती है, तो जेवर सिर्फ पश्चिमी यूपी का हवाई अड्डा नहीं रहेगा, बल्कि पूरे दिल्ली-NCR का बड़ा एयर ट्रांसपोर्ट और कार्गो हब बन सकता है।

क्या रूसी विमानों की लैंडिंग सिर्फ शुरुआत है?

BRICS समिट के दौरान जेवर पर रूसी विमानों की लैंडिंग को इसी बड़े बदलाव की पहली झलक माना जा रहा है। एयरपोर्ट अभी पूरी तरह कमर्शियल इंटरनेशनल हवाई अड्डा नहीं बना है, लेकिन यहां एयर कार्गो, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइस और एविएशन सेक्टर का पूरा नेटवर्क तेजी से गढ़ा जा रहा है।

उत्तर भारत की सप्लाई चेन का बनेगा सबसे बड़ा केंद्र

असल में जेवर की कहानी सिर्फ एक नए एयरपोर्ट की नहीं है। यह कहानी उस औद्योगिक पारिस्थितिकी की है जो एयरपोर्ट के चारों ओर तैयार हो रही है और भविष्य में उत्तर भारत की सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बन सकती है। अब असली परीक्षा यह होगी कि रनवे के साथ-साथ यहां की इंडस्ट्री और कनेक्टिविटी कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है। अगर यह संतुलन बनता है, तो जेवर आने वाले सालों में भारत की अर्थव्यवस्था का एक अहम पिलर साबित हो सकता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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