दिल्ली: जामिया गर्ल्स हॉस्टल में बवाल, खाने में कीड़े मिलने से भड़कीं छात्राएं

प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल की मेस में खाने की गुणवत्ता को लेकर समस्या नई नहीं है। उनके मुताबिक, लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कई मौकों पर खाने में कीड़े और कांच के टुकड़े तक मिलने की शिकायत की गई है।

जामिया मिलिया गर्ल्स हॉस्टल में खराब खाने को लेकर छात्राओं का प्रदर्शन

HIGHLIGHTS

  • खाने में कांच और कीड़े! जामिया हॉस्टल में छात्राओं का हंगामा
  • जामिया हॉस्टल में आधी रात से धरना, छात्राओं ने खोली पोल
  • मेस के खाने से परेशान छात्राएं, जामिया में शुरू हुआ बड़ा प्रदर्शन
  • जामिया गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं का फूटा गुस्सा, जानिए पूरा मामला

दिल्ली जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के जामिया मिलिया गर्ल्स हॉस्टल में मेस के खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। जम्मू-कश्मीर (J&K) गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने मेस में कथित तौर पर खराब और अस्वच्छ खाना परोसे जाने का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ धरना शुरू किया है। प्रदर्शनकारी छात्राएं बीती रात से यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-13 यानी सेंटेनरी गेट के पास शांतिपूर्ण तरीके से बैठी हैं। यह प्रदर्शन छात्र संगठन AISA के नेतृत्व में किया जा रहा है।

खाने में कीड़े और कांच मिलने का आरोप

प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल की मेस में खाने की गुणवत्ता को लेकर समस्या नई नहीं है। उनके मुताबिक, लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कई मौकों पर खाने में कीड़े और कांच के टुकड़े तक मिलने की शिकायत की गई है।

छात्राओं का कहना है कि उन्होंने इस मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में कई बार पहुंचाया। शिकायतों के बाद सुधार का भरोसा भी दिया गया, लेकिन उनके अनुसार जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से छात्राओं में नाराजगी बढ़ी और उन्होंने विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

कैंटीन ठेकेदार को लेकर AISA ने उठाए सवाल

AISA के सेक्रेटरी सौरभ ने हॉस्टल की कैंटीन व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित कैंटीन ठेकेदार करीब चार साल से हॉस्टल में कैंटीन का संचालन कर रहा है, जबकि कैंटीन के लिए हर साल नया कॉन्ट्रैक्ट जारी किया जाता है।

AISA ने इस व्यवस्था की जांच की मांग करते हुए कैंटीन संचालक और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच कथित मिलीभगत के आरोपों की भी जांच किए जाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि लगातार शिकायतों के बावजूद एक ही ठेकेदार लंबे समय तक कैंटीन चला रहा है, तो इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता की जांच जरूरी है।

हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारी छात्राओं और AISA की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन या संबंधित कैंटीन संचालक का पक्ष सामने आना बाकी है।

शिकायतों के बाद भी सुधार नहीं होने का आरोप

AISA का कहना है कि छात्राओं की ओर से खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत किए जाने के बाद प्रशासन ने स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया था। लेकिन प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, आश्वासन के बावजूद मेस की व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

संगठन के मुताबिक, करीब दो दिन पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्राओं की मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। इसके बावजूद कैंटीन ठेकेदार के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए जाने से छात्राओं ने दोबारा विरोध शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि विरोध करने वाली छात्राओं को हॉस्टल से बाहर निकालने की धमकी दी गई। इस आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है। छात्राओं का कहना है कि वे अपनी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही हैं।

प्रदर्शनकारी छात्राओं की क्या हैं मांगें?

जामिया मिलिया गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं और AISA ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से कैंटीन व्यवस्था में बदलाव और प्रदर्शन कर रही छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

  • मौजूदा कैंटीन ठेकेदार को तत्काल हटाया जाए और उसका लाइसेंस रद्द किया जाए।
  • हॉस्टल में तैनात पुरुष कर्मचारियों की जगह महिला स्टाफ की नियुक्ति की जाए।
  • प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्रा या छात्र के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं की जाए।
  • जिन अधिकारियों या जिम्मेदार लोगों पर शिकायतों को कथित तौर पर नजरअंदाज करने के आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा प्रदर्शन

प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वे तब तक धरना खत्म नहीं करेंगी, जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता।

AISA का आरोप है कि केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। संगठन चाहता है कि मेस की खाद्य गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ कैंटीन के संचालन और ठेके की प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच हो।

फिलहाल जामिया मिलिया गर्ल्स हॉस्टल में खराब खाने को लेकर छात्राओं का प्रदर्शन विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक अहम मुद्दा बन गया है। छात्राएं जहां मेस में बेहतर और सुरक्षित भोजन की मांग कर रही हैं, वहीं AISA ने कैंटीन ठेकेदार की भूमिका और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल छात्राओं ने साफ किया है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक उनका शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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