BRICS सम्मेलन 2026 के बीच, भारत की वैश्विक भूमिका और संगठन की महत्वाकांक्षा को लेकर केंद्रीय मंच पर चर्चा तेज हो गई है। इस संदर्भ में, कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने अपने विचार व्यक्त किए हैं, जिसमें उन्होंने BRICS के माध्यम से दुनिया की बड़ी चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
इस लेख में हम खुर्शीद के विचारों का विश्लेषण कर रहे हैं और जानेंगे कि कैसे भारत और BRICS संगठन समग्र वैश्विक स्थिरता और विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
BRICS का वैश्विक मंच में बढ़ता महत्व
BRICS का गठन मुख्य रूप से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी सहयोग और समृद्धि को बढ़ावा देने के मकसद से हुआ था। वर्तमान में, यह संगठन विश्व के कुल जीडीपी का लगभग 30% भाग और विश्व की जनसंख्या का करीब 40% हिस्सा है।
भारत की अध्यक्षता में, BRICS ने अपनी भूमिका को वैश्विक स्तर पर और भी मजबूत किया है, जहां यह न केवल आर्थिक हितों का मंच है, बल्कि विश्व की जटिल चुनौतियों के समाधान का एक अहम माध्यम भी बन चुका है।
दुनिया को साथ लाने की भारत की कोशिशें
सलमान खुर्शीद ने भारत की इस जिम्मेदारी को रेखांकित किया है कि कैसे भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान ऐसे मंच का निर्माण करें, जिससे सदस्य देश साझा मुद्दों पर एक साथ आएं। उनका मानना है कि आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, और वैश्विक आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों पर एकजुट होकर ही हम विश्व स्तर पर स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।

भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाने की दिशा में काम किया है, और उम्मीद है कि आगामी वर्षों में भारत की नेतृत्व क्षमता इन मुद्दों पर निर्णायक भूमिका निभाएगी।
आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त प्रयास
खुर्शीद ने आतंकवाद को केवल किसी एक देश की समस्या नहीं माना, बल्कि इसे वैश्विक खतरा बताया। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ विश्व स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी है, ताकि इस समस्या का समूल अंत किया जा सके। साथ ही, जलवायु परिवर्तन को भी उन्होंने विश्व का साझा संकट माना है, जिसे संबोधित करने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए। इन विषयों पर संयुक्त सहमति बनाने का प्रयास, BRICS जैसे मंच के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि इन मुद्दों का दीर्घकालिक समाधान संभव हो सके।
डॉलर निर्भरता और भविष्य की मुद्रा व्यवस्था
BRICS में डॉलर पर निर्भरता कम करने को लेकर खुर्शीद ने कहा कि विभिन्न देश अपने व्यापार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का प्रयोग करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि, पूरी तरह से डी-डॉलराइजेशन तभी संभव है, जब कोई नई साझा मुद्रा या ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिस पर व्यापक सहमति बनी हो।

वर्तमान में, BRICS देशों के बीच ऐसी कोई सहमति नहीं है, लेकिन भविष्य में इस दिशा में प्रगति की संभावना बनी हुई है। खुर्शीद ने कहा कि अमेरिका भी इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीति में बदलाव कर सकता है।
BRICS: ग्लोबल नॉर्थ और साउथ के बीच पुल
सलमान खुर्शीद ने BRICS की भूमिका को वैश्विक स्तर पर और भी प्रभावशाली बनाने वाली बात कही। उनका मानना है कि यह संगठन, दुनिया की बड़ी आबादी को जोड़ने वाला एक पुल है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस संगठन का वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ता प्रभाव और महत्व भविष्य में और भी मजबूत होगा। उनके अनुसार, BRICS विकसित और विकासशील देशों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच हो सकता है, जो वैश्विक स्थिरता व समृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
भारत की अध्यक्षता और विपक्ष की उम्मीदें
खुर्शीद ने यह भी कहा कि भारत के पास इस समय BRICS की अध्यक्षता है, इसलिए यह जरूरी है कि भारत इन मंचों पर अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाए। उनका मानना है कि सरकार को चाहिए कि वह विपक्ष से भी सलाह-मशविरा करे और विभिन्न पक्षों को साथ लेकर चलें। विपक्ष की भूमिका भी इन निर्णयों में महत्वपूर्ण है, ताकि समग्र रूप से मजबूत और स्थायी फैसले लिए जा सकें।
BRICS में मतभेद और चुनौतियां
ब्रिक्स में शामिल देशों के बीच मतभेद भी एक बड़ी चुनौती है। ईरान, यूएई जैसे देशों का उदाहरण देते हुए खुर्शीद ने कहा कि इन मतभेदों के बावजूद, बातचीत और सहयोग का मार्ग तलाशना जरूरी है। यदि इन मतभेदों को कम करने और एकजुट होकर काम करने की दिशा में प्रयास किए जाएं, तो इससे न केवल BRICS का संगठन मजबूत होगा, बल्कि विश्व में स्थिरता भी आएगी।























