प्रकृति ने हमें हजारों किस्म के फल दिए हैं। कुछ फलों का स्वाद अमीर होता है, कुछ कड़वा, तो कुछ ऐसे भी हैं जिनका ज़ायका बताना मुश्किल होता है। लेकिन आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे फल की, जो अपने स्वाद की वजह से नहीं, बल्कि अपने असर की वजह से दुनिया भर में मशहूर है। इस फल को खाने के बाद अगर आप नींबू चाट लें या सिरका पी लें, तो भी आपको वो मीठा ही महसूस होगा! हैरान हुए ना? इसी खासियत की वजह से इसे ‘मिरैकल फ्रूट’ यानी चमत्कारी फल कहा जाता है। आइए जानते हैं इस फल की पूरी कहानी।
मिरैकल फ्रूट क्या है और कहां पाया जाता है?
मिरैकल फ्रूट का वैज्ञानिक नाम सिनसेपलम डलसिफिकम (Synsepalum dulcificum) है। यह पौधा सपोटेसी (Sapotaceae) परिवार से ताल्लुक रखता है। इसका जन्मदेश पश्चिम अफ्रीका माना जाता है, जहां यह घाना समेत आसपास के कई इलाकों में सदियों से पाया जाता रहा है। दिखने में यह फल बेहद छोटा और गहरे लाल रंग का होता है, जिसे देखकर लगता है जैसे कोई छोटी बेरी हो। अकेले देखने में यह कोई खास आकर्षक नहीं, लेकिन जो कमाल यह करता है, वो कोई और फल नहीं कर सकता।
खट्टे को मीठा बनाने वाला ‘जादू’ – मिराकुलिन
अब सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि आखिर यह फल खट्टे स्वाद को मीठा कैसे बना देता है? इस रहस्य का जवाब छिपा है मिराकुलिन (Miraculin) नामक एक ग्लाइकोप्रोटीन में। यह प्रोटीन हमारी जीभ पर स्थित स्वाद ग्राहकों (Taste Receptors) से जुड़ जाता है, लेकिन तब तक कोई असर नहीं दिखाता।
जैसे ही आप मिरैकल फ्रूट खाने के बाद कोई खट्टी चीज़ खाते हैं, उस चीज़ की अम्लीयता (Acidity) मिराकुलिन की कार्यप्रणाली को बदल देती है। नतीजतन, दिमाग को मीठे स्वाद का संकेत मिलने लगता है। यानी नींबू वहीं का वहीं खट्टा रहता है, उसका केमिकल नहीं बदलता, बस आपकी जीभ उसे मीठा महसूस करने लगती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे स्वाद-बदलाव करने वाला अनोखा प्राकृतिक तत्व मानते हैं।
कितनी देर तक रहता है असर?
रिसर्च के अनुसार, मिरैकल फ्रूट का असर लगभग 30 मिनट से एक घंटे या उससे भी थोड़ा अधिक समय तक बना रह सकता है। इस दौरान नींबू, सिरका, इमली या अन्य खट्टी चीजें चखने पर मीठा अहसास होता है। हालांकि, यह असर हर व्यक्ति पर एक समान नहीं होता, क्योंकि हर इंसान के स्वाद रिसेप्टर्स की संवेदनशीलता अलग-अलग होती है।
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है – यह फल खट्टी चीज़ की तेजाबियत खत्म नहीं करता। इसलिए ज्यादा खट्टी या तेजाब युक्त चीजों का सेवन बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं करना चाहिए, वरना दांतों और पेट पर उसका असर वैसा ही पड़ सकता है जैसा सामान्य रूप से होता है।
इस चमत्कारी फल की सबसे बड़ी दिक्कत
जितना खास यह फल है, उतनी ही बड़ी परेशानी इसके साथ है। मिरैकल फ्रूट बेहद जल्दी खराब हो जाता है। तुड़ाई के कुछ ही दिनों में यह बासी पड़ने लगता है, जिसकी वजह से इसे एक जगह से दूसरी जगह भेजना यानी ट्रांसपोर्ट करना काफी मुश्किल काम है। इसी वजह से दुनिया के ज्यादातर बाजारों में यह ताजा रूप में नहीं मिल पाता।
इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों और किसानों ने इसे फ्रीज करके बेचना शुरू किया। इसके अलावा इससे टैबलेट, पाउडर और जूस जैसे रूप भी विकसित किए गए हैं, ताकि मिराकुलिन को लंबे समय तक संभालकर रखा जा सके।
कैंसर मरीजों के लिए वरदान बन रहा यह छोटा फल
मिरैकल फ्रूट का सबसे मानवीय इस्तेमाल कैंसर के मरीजों के लिए हो रहा है। कीमोथेरेपी जैसे इलाज के दौरान कई मरीजों के मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है और खाने का ज़ायका धातु जैसा या कड़वा लगने लगता है। ऐसे में भोजन करना उनके लिए अभिशाप बन जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के कुछ कैंसर अस्पतालों में मरीजों को मिरैकल बेरी दी जाती है, ताकि इलाज के दौरान उन्हें खाने का स्वाद थोड़ा बेहतर लगे। इससे मरीजों की भोजन में रुचि बनी रहती है और उन्हें जरूरी पोषण लेने में भी मदद मिलती है। हालांकि, साफ तौर पर समझ लें कि यह फल कैंसर का इलाज नहीं है – यह सिर्फ मरीजों के खाने के अनुभव को सुधारने का एक सहारा भर है।
अब अमेरिका तक पहुंच चुका है यह अफ्रीकी फल
मिरैकल फ्रूट की मूल भूमि पश्चिम अफ्रीका होने के बावजूद, अब इसकी खेती अमेरिका के मियामी जैसे इलाकों में भी की जा रही है। गर्म और नम हवामान इस पौधे की बढ़वार के लिए अनुकूल माना जाता है। इसके फल या इसके जूस का सेवन करने के बाद खट्टी चीजों का स्वाद पूरी तरह बदल जाता है, जो इसे बाकी फलों से बिल्कुल अलग पहचान देता है।
इसके अलावा, फूड इंडस्ट्री में भी इस पर काम चल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कम चीनी वाले खाद्य पदार्थों के साथ इसका इस्तेमाल करके लोगों को मीठा स्वाद दिया जा सकता है। लेकिन इसे वजन घटाने की जादुई दवा या शुगर का परमानेंट विकल्प मानना गलत होगा।


























