लातविया: जब महिलाओं को मिलते हैं ‘पति’ घंटों के लिए

आंकड़ों के अनुसार, लातविया में महिलाओं की संख्या पुरुषों से काफी अधिक है। हर 100 पुरुषों पर लगभग 115 से 116 महिलाएं मौजूद हैं, जो यूरोपीय संघ के औसत से तीन गुना अधिक है। विशेष रूप से 65 वर्ष से ऊपर की आबादी में यह अंतर और भी बड़ा है, जहां महिलाएं पुरुषों से लगभग दोगुनी हैं। इस लिंग अनुपात की असमानता के कई कारण हैं।

लातविया में बढ़ रहा है ‘पति किराए पर लेने’ का चलन

HIGHLIGHTS

  • कम पुरुष आबादी से प्रभावित: लातविया में नई घरेलू मदद व्यवस्था
  • महिलाएं घर के काम के लिए क्यों कर रही हैं पुरुषों को किराए पर?
  • यूरोप का छोटा देश, बड़ा सामाजिक बदलाव: ‘पति’ सेवाएं शुरू
  • पुरुषों की कमी ने दिया जन्म: लातविया में नई घरेलू व्यवस्था

लातविया, यूरोप का छोटा सा देश, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत जीवनशैली और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। लेकिन आज इस देश में एक अनूठी और चिंताजनक प्रवृत्ति उभर कर सामने आई है, जिसने सामाजिक ढांचे और परिवारिक जीवन को नई दिशा दी है।

यह प्रवृत्ति है महिलाओं द्वारा ‘घंटों के पति’ जैसी सेवाओं का प्रयोग, जो घरेलू कामकाज और विभिन्न आवश्यकताओं के लिए पुरुषों को किराए पर लेने का एक नया माध्यम बन गई है। इस लेख में हम इस अनोखे सामाजिक बदलाव का गहराई से विश्लेषण करेंगे, इसके कारण, परिणाम और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

लातविया में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक क्यों?

आंकड़ों के अनुसार, लातविया में महिलाओं की संख्या पुरुषों से काफी अधिक है। हर 100 पुरुषों पर लगभग 115 से 116 महिलाएं मौजूद हैं, जो यूरोपीय संघ के औसत से तीन गुना अधिक है। विशेष रूप से 65 वर्ष से ऊपर की आबादी में यह अंतर और भी बड़ा है, जहां महिलाएं पुरुषों से लगभग दोगुनी हैं। इस लिंग अनुपात की असमानता के कई कारण हैं।

सबसे पहले, लातवियाई पुरुषों की औसत उम्र महिलाओं से करीब 10-11 वर्ष कम है। इसका कारण शराब और धूम्रपान की अधिक आदतें, खराब खानपान, स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही और व्यावसायिक असफलताएं हैं। इसके अतिरिक्त, युवा पुरुष बेहतर नौकरियों और बेहतर जीवन के लिए विदेश चले जाते हैं, जिससे देश में पुरुष आबादी कम होती जा रही है। इस स्थिति का परिणाम यह है कि घर के भीतर पुरुष की भूमिका कम होती जा रही है और महिलाओं को घरेलू और अन्य कामों के लिए बाहरी मदद की जरूरत पड़ती है।

‘पति’ किराए पर लेने की नई पहल

इस सामाजिक बदलाव का एक दिलचस्प और विचित्र पहलू है ‘हसबैंड फॉर एन ऑवर’ यानी ‘एक घंटे का पति’ सेवा। यह सेवा उन महिलाओं के लिए है, जो घर के कामकाज, मरम्मत, टेक्निकल काम या अन्य घरेलू आवश्यकताओं के लिए पुरुष किराए पर लेती हैं। इन सेवाओं का उद्देश्य महिलाओं की घरेलू जिम्मेदारियों को आसान बनाना है, और इसके माध्यम से वे अपने कार्यभार को कम कर सकती हैं।

इस सेवा का प्रयोग ज्यादातर ऑनलाइन प्लेटफार्मों जैसे रेमोंटडार्बी.एलवी और कोमांडा24 पर किया जाता है। यहाँ पुरुषों को घंटों या पूरे दिन के हिसाब से बुक किया जाता है, जो प्लंबिंग, बढ़ईगिरी, दीवार पेंटिंग, टीवी लगवाने, पर्दे ठीक करने जैसे कार्य करते हैं। इन सेवाओं का कोई भावुक या रोमांटिक तत्व नहीं होता, बल्कि यह एक व्यावहारिक समाधान है।

इन सेवाओं का चार्ज भी उल्लेखनीय है। एक घंटे की सेवा के लिए लगभग 40-45 डॉलर का भुगतान किया जाता है, जबकि पूरे दिन के लिए यह शुल्क करीब 280 डॉलर तक हो सकता है। इन सेवाओं की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि कई प्रोवाइडर्स के महीने के स्लॉट पहले ही भर जाते हैं। महिलाएं अपने ऑफिस में भी अधिकतर सहकर्मियों के बीच अकेली महसूस करती हैं, जहां पुरुष साथी कम मिलते हैं। ऐसे में यह सेवाएं उनकी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने का एक विकल्प बन गई हैं।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

लातविया में इस नए रुझान का सामाजिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर प्रभाव पड़ा है। एक ओर, यह महिलाओं के लिए अपने घर के कामकाज को आसान बनाने का जरिया है, वहीं दूसरी ओर इससे सामाजिक संरचना में बदलाव भी आया है। पुरुषों की संख्या कम होने और उनके जीवन प्रत्याशा के घटने के कारण, घर के भीतर पुरुष की भूमिका कम होती जा रही है। इससे पारंपरिक परिवारिक ढांचे में खटास आ रही है और महिलाओं को घरेलू मदद के लिए बाहर से सेवाएं लेनी पड़ रही हैं।

यह प्रवृत्ति सिर्फ लातविया तक ही सीमित नहीं है। पूर्वी यूरोपीय देशों में भी ऐसी ही स्थिति देखी जा सकती है, जहां पुरुषों की जीवन प्रत्याशा कम होने और युवा पीढ़ी के विदेश पलायन के कारण महिलाओं की संख्या अधिक हो रही है। इन सभी कारकों ने डेटिंग और संबंध बनाने के तरीके को भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई महिलाएं विदेशी पुरुषों से संबंध बनाने की ओर आकर्षित हो रही हैं, क्योंकि देश में घरेलू स्तर पर हुनरमंद पुरुषों की कमी हो गई है।

आगे का रास्ता और चुनौतियां

इस सामाजिक परिवर्तन के कई सकारात्मक पहलू हैं, जैसे महिलाओं का आत्मनिर्भर होना, घरेलू आवश्यकताओं के लिए आसान विकल्प का मिलना और सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम। वहीं, इस स्थिति की कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें शामिल हैं पुरुष-स्त्री अनुपात का असंतुलन, पारंपरिक परिवारिक मूल्यों में बदलाव, और पुरुषों की भागीदारी की कमी।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो इन सेवाओं का विस्तार रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। हालांकि, सामाजिक स्तर पर यह बदलाव पारंपरिक परिवारिक मूल्यों और सामाजिक संरचनाओं को चुनौती दे सकता है। भविष्य में, सरकार और समाज को इन बदलावों के सकारात्मक पहलुओं को अपनाते हुए, संतुलित और समावेशी नीतियों का निर्माण करना चाहिए।

Sandhya Samay News

संध्या समय न्यूज़ – आपके विश्वास की आवाज़ संध्या समय न्यूज़ की स्थापना वर्ष 2018 में की गई, जो कि MSME में विधिवत रूप से पंजीकृत है। हमारा उद्देश्य समाज तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है। हम देश-प्रदेश की ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों, और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आपके सामने सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम अपने सभी दर्शकों और पाठकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें लगातार देखा, समझा और अपना विश्वास बनाए रखा। आपकी यही सराहना और समर्थन हमें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। संध्या समय न्यूज़ हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा के मूल्यों पर कार्य करता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now