महात्मा गांधी सिर्फ भारत के नहीं, पूरी दुनिया के हीरो हैं। अहिंसा और सत्य के उनके संदेश ने समय के साथ इतनी पकड़ बनाई कि आज आर्कटिक सर्कल से लेकर अफ्रीका तक, उनकी मूर्तियां प्रतिष्ठित जगहों पर श्रद्धा के साथ स्थापित हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक यात्रा ने इस वैश्विक विरासत को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
बिश्केक में मोदी का भावुक क्षण
एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने किर्गिस्तान पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने राजधानी बिश्केक स्थित गांधी मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मुलाकात की सबसे खास बात यह है कि जिस मूर्ति पर उन्होंने श्रद्धांजलि दी, उसका अनावरण चार साल पहले यानी 2015 में खुद उनके हाथों हुआ था। अपनी पिछली यात्रा की यादों को लेकर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि गांधी जी के विचारों का उनके मन पर गहरा असर रहता है। इस मौके पर वहां बसे भारतीय मूल के लोगों से भी उन्होंने गर्मजोशी भरी मुलाकात की।
एशिया में बापू की मौजूदगी
गांधी जी के प्रभाव को देखना हो तो एशिया के नक्शे पर नजर डालिए। जापान की राजधानी टोक्यो के एडोगावा पार्क में उनकी एक प्रतिमा शांति का प्रतीक बनी हुई है। हिरोशिमा जैसे शहर में, जहां परमाणु हमले का दर्द आज भी ताजा है, वहां गांधी की मूर्ति अहिंसा के दर्शन को और भी गहरे अर्थ देती है।
इसी तरह चीन की राजधानी बीजिंग के चाओयांग पार्क में और दक्षिण कोरिया के सियोल स्थित प्रतिष्ठित योनसेई यूनिवर्सिटी के परिसर में बापू की मूर्ति युवाओं को उनके आदर्शों से रूबरू कराती है। मध्य एशिया में ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में भी गांधी जी की प्रतिमा देखी जा सकती है। इससे साफ जाहिर होता है कि उनका दर्शन सीमाओं और भाषाओं की दीवारें पार कर चुका है।
यूरोप की सड़कों पर गांधी
जिस ब्रिटेन ने कभी गांधी को जेल भेजा, उसी देश की राजधानी लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में आज उनकी मूर्ति वेस्टमिंस्टर पैलेस के सामने खड़ी है। यह इतिहास की एक अद्भुत परिणति है। लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर में भी बापू की एक प्रतिमा है, जो उनके लंदन प्रवास के दिनों की याद दिलाती है। यूरोप के ही स्पेन देश के बर्गोस शहर में भी गांधी जी की मूर्ति स्थापित है, जो स्पेनिश लोगों के दिलों में उनकी जगह बताती है।

अमेरिका में सिविल राइट्स का प्रेरणा स्रोत
संयुक्त राज्य अमेरिका में गांधी दर्शन का खास महत्व है, क्योंकि मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपने नागरिक अधिकार आंदोलन की प्रेरणा बापू से ही ली थी। न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, ह्यूस्टन और वाशिंगटन डीसी जैसे बड़े शहरों में उनकी मूर्तियां न सिर्फ भारतीय समुदाय, बल्कि अमेरिकी नागरिकों के लिए भी सम्मान का विषय हैं। वाशिंगटन में इंडियन एम्बेसी के पास स्थापित प्रतिमा को विशेष महत्व दिया जाता है।
दक्षिण अफ्रीका: जहां से शुरू हुआ सत्याग्रह का सफर
गांधी जी और दक्षिण अफ्रीका का रिश्ता गहरा और ऐतिहासिक है। यहीं उन्होंने वकालत करते हुए नस्लभेद के खिलाफ आवाज उठाई और सत्याग्रह की नींव रखी। इसीलिए जोहान्सबर्ग और पीटरमैरिट्जबर्ग जैसे शहरों में उनकी मूर्तियों का महत्व किसी और देश से कम नहीं है। पीटरमैरिट्जबर्ग वह जगह है, जहां 1893 में ट्रेन से फेंके जाने की घटना ने गांधी के जीवन की दिशा ही बदल दी थी।
70 से ज्यादा देशों में फैली बापू की विरासत
आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर के 70 से अधिक देशों में महात्मा गांधी की मूर्तियां, प्रतिमाएं और स्मारक स्थापित किए जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में मान्यता दी है, जो उनकी वैश्विक स्वीकृति का बड़ा सबूत है।
ये मूर्तियां सिर्फ पत्थर या धातु के टुकड़े नहीं हैं। ये उन मूल्यों के प्रतीक हैं, जो हर दौर में प्रासंगिक रहते हैं — सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता और शांति। जब भी कोई विश्व नेता किसी देश में बापू की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करता है, तो यह एक संदेश भी देता है कि गांधीवादी विचार आज भी दुनिया की साझी विरासत हैं।
पीएम मोदी की बिश्केक यात्रा इसी जुड़ाव को दर्शाती है — जहां एक तरफ भारत-किर्गिस्तान के दोस्ताना रिश्ते गहरे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ बापू को दी जाने वाली श्रद्धांजलि यह भी याद दिलाती है कि व्यक्ति तो मर जाते हैं, लेकिन विचार अमर रहते हैं। और गांधी जी के विचारों की अमरता की सबसे बड़ी गवाह बन चुकी हैं ये मूर्तियां, जो किर्गिस्तान से लेकर जापान तक और लंदन से जोहान्सबर्ग तक हर महाद्वीप में खड़ी हैं।
























