Discover the mysterious place filled with statues: भारत की मिट्टी में हर तरफ इतिहास बिखरा पड़ा है। कहीं घने जंगलों में छिपे हैं हजारों साल पुराने मंदिर, तो कहीं चट्टानें अपने ऊपर उकेरी गई आकृतियों के जरिए बीते दौर की कहानियां सुनाती हैं। त्रिपुरा का उनाकोटी ऐसी ही एक अद्भुत जगह है, जहां पहाड़ों को काटकर देवी-देवताओं की विशाल मूर्तियां बनाई गई हैं। यहां की सबसे चौंकाने वाली बात है मूर्तियों की संख्या — 99 लाख 99 हजार 999, यानी एक करोड़ से ठीक एक कम।
एक करोड़ से एक कम मूर्तियां, क्या है पूरा रहस्य?
उनाकोटी का जिक्र होते ही सबसे पहले इसी अजीबोगरीब संख्या पर बात होती है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक इस पहाड़ी पर करीब 99 लाख 99 हजार 999 देवी-देवताओं की आकृतियां मौजूद हैं। अब इतनी बड़ी संख्या की गिनती कर पाना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है, इसलिए यह आंकड़ा किसी सर्वे का नतीजा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक-कथाओं पर आधारित है। सवाल यह भी उठता है कि आखिर इतनी सारी मूर्तियां बनाई किसने और बिना आधुनिक उपकरणों के चट्टानों पर ऐसी विराट नक्काशी कैसे की गई? इन सवालों के सटीक जवाब आज तक नहीं मिले हैं और यही अनुत्तरित पहेलियां इस जगह को रहस्य का गढ़ बनाए हुए हैं।
सातवीं-नौवीं सदी की कारीगरी
उनाकोटी भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन शैव तीर्थ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यहां की शैल नक्काशियां करीब सातवीं से नौवीं शताब्दी के बीच बनाई गई थीं। पूरा क्षेत्र लगभग 150 एकड़ में फैला हुआ है, जहां हरियाली और पहाड़ियों के बीच अचानक चट्टानों पर तराशी गई विशाल प्रतिमाएं नजर आ जाती हैं। कुछ आकृतियां सीधे पहाड़ को काटकर गढ़ी गई हैं, जबकि कुछ बड़ी चट्टानों पर उकेरी गई हैं। इसी अनोखी कलाकृति की वजह से उनाकोटी को अक्सर ‘पूर्व का अंगकोर वाट’ भी कहा जाता है।
30 फीट ऊंची उनाकोटीश्वर काल भैरव की प्रतिमा
यहां की सबसे प्रसिद्ध आकृति भगवान शिव की है, जिसे उनाकोटीश्वर काल भैरव के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यह प्रतिमा करीब 30 फीट ऊंची है। इसके आसपास गणेश, विष्णु, नंदी, दुर्गा और लक्ष्मी समेत कई अन्य देवी-देवताओं की आकृतियां भी दिखाई देती हैं। यहां रावण की एक प्रतिमा भी है, जिसमें उन्हें धनुष-बाण के साथ निशाना साधते हुए दिखाया गया है। सदियों पुरानी इन नक्काशियों को देखकर अंदाजा लगाना वाकई मुश्किल होता है कि उस दौर के कारीगरों ने यह चमत्कार कैसे किया होगा।
जब नींद में बदल गई एक करोड़ देवी-देवताओं की तकदीर
उनाकोटी से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथा भगवान शिव की यात्रा से है। मान्यता है कि एक बार महादेव एक करोड़ देवी-देवताओं के साथ काशी जा रहे थे। रास्ते में रात हो जाने पर सभी ने तत्कालीन रघुनंदन पहाड़ पर विश्राम करना तय किया। शिव जी ने सबको बताया कि भोर होते ही काशी के लिए प्रस्थान होगा। लेकिन अगली सुबह जब नींद खुली, तो सिर्फ भगवान शिव जागे थे; बाकी सब सोते रह गए। क्रोधित महादेव अकेले ही काशी की ओर निकल गए और जो देवी-देवता सोते रह गए, वे वहीं पत्थर की मूर्तियों में तब्दील हो गए। यही कथा यहां की एक करोड़ से एक कम मूर्तियों से जोड़ी जाती है।
‘उनाकोटी’ नाम का राज छिपा है कल्लू कुमार की कहानी में
दूसरी लोककथा विश्वकर्मा के पुत्र कल्लू कुमार से जुड़ी है। कहा जाता है कि कल्लू कुमार भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कैलाश जाना चाहते थे, लेकिन शिव जी ने उन्हें साथ ले जाने से मना कर दिया। तब उनके सामने एक शर्त रखी गई कि अगर वे एक ही रात में एक करोड़ देवी-देवताओं की मूर्तियां बना दें, तो कैलाश जाने का अवसर मिलेगा। कल्लू कुमार ने रातभर मूर्तियां गढ़ीं और सुबह होने तक लक्ष्य लगभग पूरा भी हो गया। मगर गिनती में सिर्फ 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां निकलीं — एक कम। इसी कमी के कारण इस जगह का नाम ‘उनाकोटी’ पड़ा, क्योंकि इसका अर्थ ही है ‘एक कोटी से एक कम’।
सीता कुंड, अशोक अष्टमी मेला और यूनेस्को की अस्थायी सूची
उनाकोटी के आसपास सीता कुंड नाम का एक पवित्र जलस्रोत भी है, जहां चट्टान से जल की धारा निकलती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कुंड में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, इसलिए श्रद्धालु यहां जरूर पहुंचते हैं। हर साल अशोक अष्टमी के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए उनाकोटी को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (अस्थायी सूची) में भी शामिल किया गया है।
एक नजर में उनाकोटी
- स्थान: त्रिपुरा, भारत (अगरतला से करीब 180 किमी दूर)
- उपनाम: पूर्व का अंगकोर वाट
- प्रमुख आकर्षण: 30 फीट ऊंची उनाकोटीश्वर काल भैरव प्रतिमा, सीता कुंड
- खास आयोजन: अशोक अष्टमी मेला
जहां आस्था और कला मिलती है एक-दूसरे से
उनाकोटी सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ऐसी जगह है जहां आस्था, इतिहास और कला एक साथ जीवित दिखते हैं। पहाड़ियों को काटकर बनाई गई मूर्तियां, जंगलों की हरियाली और उनसे जुड़ी अनगिनत कथाएं इस स्थान को पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों दोनों के लिए खास बनाती हैं। अगर आप रहस्यों से भरी जगहों की सैर करना पसंद करते हैं, तो त्रिपुरा का यह अनोखा तीर्थ एक बार जरूर देखने लायक है।

























