तेल की आग से घरेलू शेयर बाजार में खौफनाक गिरावट

कच्चे तेल की कीमतें आज के दिन अत्यंत उछाल के साथ ट्रेड कर रही हैं। अमेरिका, जापान और अन्य देशों में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सत्र में लगभग 7.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वेस्ट टेक्सास इंटरमिडिएट (WTI) क्रूड $103-104 प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है।

अमेरिका-यूरोप में बढ़ते तनाव का भारत पर क्या असर?

HIGHLIGHTS

  • कच्चे तेल की कीमतें क्यों भारतीय बाजार को डुबो रही हैं?
  • शुक्रवार को सेंसेक्स क्यों गिर रहा है, जानिए पूरी वजह
  • क्या आज ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसा माहौल बनने वाला है?
  • तेल की कीमतें बढ़ीं, भारतीय निवेशकों को बड़ा झटका

आज का कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए खासा चुनौतीपूर्ण रहा। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई है। शुक्रवार, 11 सितंबर को सेंसेक्स ने शुरुआती घंटों में ही 593 अंक की गिरावट के साथ 74,309 के स्तर पर शुरुआत की। वहीं, निफ्टी ने भी 207 अंक की गिरावट के साथ 23,270 पर खुला। बाजार खुलने के तुरंत बाद ही सेंसेक्स 709 अंक लुढ़ककर 74,193 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों को करीब 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह गिरावट वैश्विक बाजारों में बिकवाली का परिणाम है, जो कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और नई भू-राजनीतिक घटनाओं से उपजी है।

कच्चे तेल की कीमतों का उछाल और उसका असर

कच्चे तेल की कीमतें आज के दिन अत्यंत उछाल के साथ ट्रेड कर रही हैं। अमेरिका, जापान और अन्य देशों में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सत्र में लगभग 7.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वेस्ट टेक्सास इंटरमिडिएट (WTI) क्रूड $103-104 प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी बढ़कर $108 के निशान के करीब पहुंच गई हैं। सऊदी अरब सहित मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति और वैश्विक आपूर्ति में कमी की आशंकाओं ने तेल की कीमतों को और अधिक बढ़ावा दिया है।

यह उछाल अमेरिकी डॉलर, यूरोपीय बाजार और एशियाई बाजारों में भी दिख रहा है। जापान का निक्केई सूचकांक शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक गिर गया है, जबकि दक्षिण कोरियाई कोस्पी 2.57 प्रतिशत नीचे है। इस उछाल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, जहां निवेशक तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को वैश्विक आर्थिक स्थिति के लिए चिंताजनक मान रहे हैं।

वैश्विक बाजारों का हाल

अमेरिका के शेयर बाजार भी इस गिरावट से अछूते नहीं हैं। अमेरिकी प्रमुख सूचकांक डॉउ जोंस, एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने गुरुवार को गिरावट दर्ज की है। डॉउ जोंस 0.6 प्रतिशत नीचे आया, वहीं नैस्डैक 0.65 प्रतिशत गिरा। यह गिरावट मुद्रास्फीति के उच्च स्तर, ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का परिणाम है। यूरोपीय बाजारों में भी हानि देखने को मिली है, जहां यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरें दूसरी बार बढ़ाने का निर्णय लिया है।

घरेलू बाजार की स्थिति

गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने मामूली सुधार दिखाया था। सेंसेक्स 138.36 अंक या 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 46.30 अंक या 0.20 प्रतिशत ऊपर 23,477.80 पर बंद हुआ। लेकिन आज के दिन वैश्विक बाजारों में बढ़ती गिरावट के कारण घरेलू बाजार भी दबाव में आ गए हैं। गिफ्ट निफ्टी के हालिया फ्यूचर्स के आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले बंद भाव से 122 अंक नीचे यानी 23,362 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो नकारात्मक शुरुआत का संकेत है।

निवेशकों पर प्रभाव और बाजार की भविष्यवाणियां

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी साफ देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भारतीय शेयर बाजार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एनरिच मनी के सीईओ, पोनमुडी आर का कहना है कि आज भारतीय इक्विटी मार्केट पर दबाव बना रहेगा, क्योंकि तेल की कीमतें निवेशकों की धारणा पर विपरीत असर डाल रही हैं।

बाजार विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अभी ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसी स्थिति नहीं बन रही है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। यदि तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो घरेलू बाजार में बिकवाली का जोर और भी बढ़ सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि ऐसी स्थिति में सतर्कता बरतें और अपने निवेश के फैसले सोच-समझ कर लें।

आगामी दिनों की संभावनाएं

आगे बढ़ते हुए, बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाओं और अमेरिकी मुद्रास्फीति की दिशा पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें स्थिर रहीं या घटने लगीं, तो बाजार में रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन यदि कीमतें और बढ़ीं, तो बाजार में गिरावट का सिलसिला तेज हो सकता है।

Sandhya Samay News

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