दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम इलाके सत्य निकेतन स्थित एक इमारत अचानक भरभराकर ढह गई, जिससे पूरा इलाका हड़बड़ी में आ गया। यह इमारत पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल हो रही थी और यहां आसपास के कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले कई छात्र रुके हुए थे। हादसे के समय इमारत के अंदर बड़ी संख्या में छात्रों के होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर दमकल, पुलिस, NDRF और MCD की टीमें पहुंच गईं और मलबे में दबे लोगों को निकालने का अभियान तेज कर दिया गया है।
दोपहर डेढ़ बजे के आसपास गिरी इमारत
मिली जानकारी के अनुसार, यह भीषण हादसा दोपहर करीब डेढ़ बजे के आसपास हुआ, जब इलाके में आम दिन की तरह रोजमर्रा का कामकाज चल रहा था। दिल्ली फायर सर्विस को इस घटना की सूचना दोपहर 1:30 बजे के आसपास मिली, जिसके तुरंत बाद कई दमकल गाड़ियों को मौके की ओर रवाना किया गया। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और स्थिति स्पष्ट होने पर ही हादसे की विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
बताया जा रहा है कि ढहने वाली इमारत की ऊपरी मंजिलों पर पीजी चल रहा था, जहां अलग-अलग जगहों से पढ़ाई करने आए लड़के-लड़कियां आवास पर रहते थे। दुर्घटना के समय भी कुछ छात्र कमरों के अंदर मौजूद थे, जिसके चलते उनके मलबे में दबे होने की खबर है। प्रारंभिक आकलन में तीन छात्रों के दबे होने की बात कही जा रही है, हालांकि मौके पर मौजूद लोगों का अनुमान इससे कहीं ज्यादा संख्या का है।
भूकंप जैसी गड़गड़ाहट सुनकर दौड़े लोग
घटना के चश्मदीदों ने बताया कि इमारत गिरने से ठीक पहले ऐसी आवाज सुनाई दी जैसे कोई भूकंप आया हो। मौके के पास ही दुकान चलाने वाले एक व्यापारी ने बताया कि वे अपनी दुकान में बैठे थे, तभी अचानक गड़गड़ाहट की तेज आवाज सुनाई दी। सकते में आकर जब बाहर निकले, तो सामने का नजारा देखकर सांस ही रुक गई। चारों तरफ धूल-धुआं फैला था और इमारत मलबे में तब्दील हो चुकी थी।
तुरंत आसपास के लोकल लोग और दुकानदार मलबे तक पहुंच गए और जान बचाने की कोशिश में जुट गए। चश्मदीदों के अनुसार, बचाव के दौरान चार पांच लोगों को जिंदा निकाला गया, जिनमें छात्र शामिल थे। साथ ही मलबे से कुछ लोगों के शव भी निकाले गए, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। सबसे दिल दहला देने वाली बात यह है कि मलबे के भीतर से अब भी मदद की आवाजें आ रही थीं। लोगों ने बताया कि फंसे हुए छात्र चीख-चीखकर परिजनों और बचावकर्मियों से अपील कर रहे थे कि उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए।
मौके पर अनुमान: 25 से 30 तक छात्र रहे मौजूद
इलाके के लोगों का कहना है कि हादसे के वक्त इमारत में कम से कम 25 से 30 छात्र मौजूद होने की आशंका है। हालांकि सटीक संख्या का पता लगाना अभी मुश्किल बना हुआ है, क्योंकि पीजी में रहने वालों का कोई मौके पर रजिस्टर उपलब्ध नहीं हो पाया है। इस बात पर भी चिंता जताई जा रही है कि कई छात्र उस वक्त बाहर पढ़ाई या किसी काम से निकले हुए थे, जिससे पीड़ितों की वास्तविक संख्या का हिसाब लगाना और भी जटिल हो गया है।
एक स्थानीय निवासी ने भावुक होकर कहा कि यह घटना बेहद दुखद है। यहां पढ़ाई करने आने वाले गरीब और मेहनती बच्चे पीजी में रहते थे और अब वही इमारत उनकी मौत का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि NDRF और MCD की टीमों द्वारा दो छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि कुछ छात्र मलबे के नीचे से अपने मोबाइल फोन से परिजनों और रिश्तेदारों को फोन कर सकते हैं, जिससे उम्मीद जगी है कि वे अभी जीवित हैं।
मुख्यमंत्री ने भेजी विशेष टीम, प्रशासन अलर्ट पर
हादसे की खबर पहुंचते ही दिल्ली सरकार सक्रिय हो गई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मौके पर पूरी राहत और बचाव टीम भेजी गई है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस वक्त सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे छात्रों को सुरक्षित निकालना है और इसी पर पूरी सरकार का ध्यान केंद्रित है। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है, ताकि जल्द इलाज मिल सके।
दिल्ली पुलिस ने भी आधिकारिक रूप से घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दक्षिण-पश्चिम जिले के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने की सूचना फायर डिपार्टमेंट को दोपहर 1:30 बजे के करीब मिली। बचाव कार्य लगातार जारी है और जैसे ही स्थिति साफ होगी, आगे की जानकारी साझा की जाएगी।
बिल्डिंग सुरक्षा मानकों पर फिर उठे कड़े सवाल
यह हादसा एक बार फिर दिल्ली में पुरानी इमारतों की सुरक्षा और अवैध पीजी संचालन पर बड़े सवाल खड़े कर गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना निरीक्षण के कैसे पुरानी और कमजोर इमारतों में छात्रों को रहने के लिए दिया जाता रहा। सत्य निकेतन और आसपास के इलाके कोचिंग हब के रूप में प्रसिद्ध हैं, जहां हजारों प्रतियोगी छात्र हर साल पढ़ाई के लिए आते हैं और पीजी व हॉस्टल की मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे में कई जगह बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके पीजी संचालित किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जांच एजेंसियों की मानें तो इमारत गिरने के असली कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कराई जाएगी। साथ ही मौके पर पहुंचे अधिकारी यह भी तय करेंगे कि आसपास की अन्य इमारतों में ऐसी कोई कमी तो नहीं है, जो भविष्य में किसी और दुर्घटना को जन्म दे सके।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, हर पल निकल रही अपडेट
फिलहाल पूरा इलाका रेस्क्यू ऑपरेशन का गवाह बना हुआ है। मलबा हटाने के लिए हैवी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन जिन-जिन जगहों पर जिंदा लोगों के होने की संभावना है, वहां मैनुअल तरीके से सावधानीपूर्वक खुदाई की जा रही है, ताकि किसी को और नुकसान न पहुंचे। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और भीड़ को हटाए रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि बचावकर्मियों को काम में किसी तरह की रुकावट न आए।
पीजी में रहने वाले छात्रों के परिजनों की अफरा-तफर बिल्कुल सहज नहीं है। मौके पर पहुंचे कई अभिभावक अपने बच्चों की तलाश में जुटे हुए हैं। प्रशासन की ओर से हेल्पलाइन जारी करने और पीड़ित परिवारों की मदद के लिए विशेष डेस्क बनाने की मांग भी उठ रही है।
आने वाले समय में बचाव अभियान की प्रगति और आधिकारिक आंकड़ों पर ही इस हादसे की पूरी तस्वीर साफ होगी। मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी सरकार पर आएगी, जबकि जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी तय है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजधानी में बिल्डिंग सुरक्षा नियमों की सख्ती से पालना कराना कितना जरूरी है, वरना ऐसे हादसों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं लेगा।
























