बिहार एक बार फिर बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है। पटना समेत राज्य के 14 जिले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं और करीब 35.79 लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे हैं। चारों तरफ पानी ही पानी दिख रहा है, लेकिन पीने के लिए साफ पानी तक लोगों को नसीब नहीं हो पा रहा है। गांव-गांव डूब चुके हैं और हजारों परिवार छत-घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की तलाश में हैं।
किन-किन जिलों में फैली बाढ़ की आपदा?
बाढ़ सबसे ज्यादा पटना के अलावा भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और खगड़िया जिलों में प्रभावी रूप से लोगों को परेशान कर रही है। गंगा किनारे बसे दियारा इलाकों के लोग सबसे बुरी दशा में हैं। खेती की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं और पशुओं के चारे का भी संकट खड़ा हो गया है। कई गांवों में घरों के अंदर तक पानी भर चुका है, जिससे लोग रसोई जलाने तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राहत कार्य तेज, 456 सामुदायिक रसोइयों से बांटा जा रहा भोजन
बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए प्रशासन ने 456 सामुदायिक रसोइयां संचालित की हैं, जहां लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा 14 राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं, जिनमें विस्थापित परिवारों को आश्रय दिया गया है।
बचाव अभियान को नियंत्रित और सुचारु रूप से चलाने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की 27 टीमें और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 10 टीमें तैनात की गई हैं। नावों के जरिए फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है और जिन इलाकों में संकट गहराया है, वहां लगातार निगरानी रखी जा रही है।
कोसी-सोन में गिरावट, गंगा अब भी खतरे के निशान से ऊपर
बाढ़ के हालात को लेकर एक राहत भरी खबर यह है कि कोसी और सोन नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। हालांकि, अभी घबराने की नौबत नहीं आई है, क्योंकि गंगा, गंडक और पुनपुन समेत कई अन्य नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ऐसे में निचले इलाकों के लोगों को लगातार खतरा बना हुआ है। जलस्तर पर पैनी नजर रखते हुए केंद्रीय जल आयोग के द्वारा नियमित रूप से अपडेट जारी किए जा रहे हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
सितंबर महीने में अब तक बिहार में सामान्य से 31 फीसदी ज्यादा वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की आशंका है। इससे बाढ़ के हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
अधिकारियों ने लोगों से पूरी सावधानी बरतने की अपील की है। जो लोग अभी भी नदी के किनारे रुके हुए हैं, उनसे अपील की जा रही है कि वे जल्द से जल्द किसी सुरक्षित स्थान पर जाएं। बिना आवश्यकता के बाढ़ से प्रभावित इलाकों में जाने से बचें और राहत टीमों के निर्देशों का पालन करें।
कांग्रेस सेवा दल भी बाढ़ पीड़ितों की मदद में आगे
राहत कार्यों में समाज के विभिन्न वर्ग भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी का सेवा दल बिहार के अलग-अलग जिलों में पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों को खाने-पीने की सामग्री बांट रहा है। इसी कड़ी में सोनपुर स्थित सबलपुर दियारा इलाके में सेवा दल की टीम नाव के जरिए पहुंची और वहां के लोगों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया।
कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता रोहित कुमार ने बताया कि राहुल गांधी के निर्देश पर पिछले कई दिनों से पूरे बिहार में टीमें नाव से जाकर बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचा रही हैं। सबलपुर में करीब 500 जरूरतमंद परिवारों को लगभग एक सप्ताह के लिए जरूरी राशन दिया गया। इस राशन में चावल, दाल, आटा, चीनी, चना, सोयाबीन, चूड़ा, मीठा, चायपत्ती और नमक जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री शामिल की गई है।
बिहार में बाढ़ की समस्या क्यों बार-बार आती है?
दरअसल, बिहार की भौगोलिक स्थिति ही इस राज्य को बाढ़ के लिए सबसे अधिक संवेदनशील बनाती है। नेपाल से आने वाली कोसी, गंडक और बूढ़ी गंडक जैसी नदियां, साथ ही उत्तर से बहने वाली अन्य नदियां जब तराई क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण उफान पर आती हैं, तो बिहार के मैदानी इलाकों में पानी फैल जाता है। गंगा का जलस्तर ऊपर होने पर इन नदियों का पानी वापस फैलने लगता है, जिससे दियारा इलाके सबसे पहले डूब जाते हैं।
सरकारी तंत्र अलर्ट, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं
जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट पर हैं। राहत शिविरों में चिकित्सा टीमों को तैनात किया जा रहा है ताकि बाढ़ के बाद होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, टाइफाइड और त्वचा रोगों से बचाव हो सके। पेयजल की कमी से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए पानी की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है।
मौसम विभाग की भारी बारिश की भविष्यवाणी के बीच आने वाले कुछ दिन बिहार के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। अगर बारिश रुकती है और नदियों का जलस्तर गिरना शुरू होता है, तो हालात धीरे-धीरे सामान्य होंगे। वरना राहत और बचाव कार्यों को और तेज करने की जरूरत पड़ेगी।

























