ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा बयान

पीएम मोदी ने अपने भाषण में बताया कि 2006 में जब ब्रिक्स की शुरुआत हुई थी, तब इसमें केवल चार देश थे। आज यह समूह 21 देशों का परिवार बन चुका है। इस समूह में शामिल देशों की आबादी विश्व की आधी है, और इन देशों का वैश्विक व्यापार में हिस्सा 25 प्रतिशत है।

समुद्री मार्ग सुरक्षा पर पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश क्या है?

HIGHLIGHTS

  • ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने क्यों दी समुद्री मार्ग सुरक्षा की सलाह?
  • पीएम मोदी ने क्यों कहा, समुद्री रूट खोलना है जरूरी?
  • ब्रिक्स का विस्तार: भारत की आर्थिक ताकत और भविष्य की योजनाएं
  • समुद्री व्यापार के लिए भारत ने क्यों की नई रणनीति की घोषणा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए विश्व व्यापार के महत्व पर प्रकाश डाला और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार तभी सुदृढ़ हो सकेगा जब समुद्री रास्ते सुरक्षित और खुले होंगे। यह संदेश उन्होंने उस समय दिया जब ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान उनके सामने बैठे थे, जो इस बात की महत्ता को दर्शाता है कि भारत समुद्री सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीरता से सोच रहा है।

ब्रिक्स का विस्तार और भारत की भूमिका

पीएम मोदी ने अपने भाषण में बताया कि 2006 में जब ब्रिक्स की शुरुआत हुई थी, तब इसमें केवल चार देश थे। आज यह समूह 21 देशों का परिवार बन चुका है। इस समूह में शामिल देशों की आबादी विश्व की आधी है, और इन देशों का वैश्विक व्यापार में हिस्सा 25 प्रतिशत है। साथ ही, इन देशों की कुल जीडीपी विश्व की 40 प्रतिशत से अधिक है, जो इसकी आर्थिक ताकत को दर्शाता है। भारत की आर्थिक विकास दर भी इस समूह का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि देश की GDP दुनिया की तुलना में दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स का यह विस्तार, इसकी तेजी और सकारात्मक दृष्टिकोण भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह समूह अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम है, जहाँ व्यापार, इनोवेशन और तकनीक पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारत ने अपने स्टार्टअप सेक्टर में नई ऊंचाइयों को छुआ है, यहाँ दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स हैं, और डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई का उपयोग विश्व के आधे हिस्से में हो रहा है। यह सब भारत की वैश्विक पहुंच और व्यापार के नए अवसरों को दर्शाता है।

समुद्री मार्ग की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार

पीएम मोदी ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार तभी फल-फूल सकता है जब समुद्री रास्ते सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाना आवश्यक है ताकि व्यापार बाधाओं से मुक्त हो सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि व्यापार के रूटों को सुरक्षित बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग जरूरी है। इस संदर्भ में, उन्होंने समुद्री यातायात की सुरक्षा का जिक्र किया, बिना नाम लिए ही, लेकिन संकेत स्पष्ट था कि भारत इस दिशा में कदम उठा रहा है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन

इस दौरान, ब्रिक्स फोरम में शामिल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी व्यापार के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने ब्रिक्स की अर्थव्यवस्था को विश्व की 40 प्रतिशत GDP का हिस्सा बताया और अमेरिकी नेतृत्व वाले G7 देशों पर तंज कसते हुए कहा कि उसकी GDP केवल 18 प्रतिशत है। पुतिन ने ब्रिक्स की ताकत का जोर देते हुए फ्री ट्रेड की वकालत की, जिससे दोनों नेताओं का यह संदेश भी स्पष्ट हो गया कि व्यापार में बाधाओं को खत्म करके वैश्विक विकास को गति दी जा सकती है।

द्विपक्षीय वार्ता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

ब्रिक्स फोरम से पहले, पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। इस दौरान, पीएम मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल जैसे तमिल भाषा के ग्रंथ का उपहार दिया, जिसे रूसी में अनुवादित कर प्रस्तुत किया गया। इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने दोनों नेताओं के बीच मजबूत संबंधों और आपसी सम्मान को दर्शाया।

ब्रिक्स में भारत की नई रणनीति

पीएम मोदी ने इस अवसर पर ब्रिक्स के बीच कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे। उन्होंने पूछा कि क्या बिचार किया जा सकता है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बाधाओं पर हर साल रिपोर्ट तैयार की जाए। साथ ही, उन्होंने प्रस्ताव रखा कि हर साल 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को दूसरे देशों के बाजार में विस्तार का अवसर मिलना चाहिए, और 1,000 नई साझेदारी भी हर साल स्थापित की जा सकती है। इन लक्ष्यों का उद्देश्य ब्रिक्स के आर्थिक सहयोग और वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देना है।

Sandhya Samay News

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