मुस्तफा मस्जिद विवाद: अजय राय की एंट्री,यूपी की सियासी जंग

मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इस मस्जिद विवाद को धार्मिक स्वतंत्रता के रूप में देख रहा है, वहीं भाजपा और उसकी समर्थक संगठनों का दावा है कि यह अवैध निर्माण है और नियम कानून का उल्लंघन हुआ है।

मुरादाबाद मस्जिद विवाद: सरकार क्यों असमंजस में फंसी?

HIGHLIGHTS

  • यूपी में मस्जिद अवैध या सही? प्रशासन और समुदाय के दावे
  • मुख्यमंत्री आवास का नक्शा मांगा, अखिलेश यादव का भी रुख साफ
  • मस्जिद तोड़ने का प्रयास: यूपी सरकार की नई साजिश?
  • राजनीतिक जंग तेज, मुसलमान और हिंदू एकजुट क्यों हो रहे हैं?

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) की दीवार से सटी 40 साल पुरानी मुस्तफा मस्जिद विवाद ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। यह मस्जिद विवाद न सिर्फ धार्मिक सौहार्द का मुद्दा बन चुका है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सत्ता की कुर्सी के लिए हो रही जंग का भी प्रतीक बन गया है। इस विवाद को लेकर यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने आज जुमे की नमाज के दिन सीधे मुरादाबाद पहुंचकर मस्जिद के आसपास के हालात का जायजा लिया और मस्जिद कमेटी के सदस्यों से मुलाकात की।

अजय राय का बयान और राजनीति का मोड़

अजय राय ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए सीधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जैसे सरकार मस्जिदों के नक्शे मांगी जा रही है, वैसे ही मैं मुख्यमंत्री से भी आग्रह करूंगा कि वह अपने मुख्यमंत्री आवास का नक्शा दिखाएं कि वह पास है या नहीं। राय का कहना था कि प्रदेश और देश की जनता के सामने नक्शा प्रस्तुत किया जाना चाहिए ताकि सभी को सच्चाई का पता चल सके।

यह बयान खासतौर पर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की राह को भी छुआ। अखिलेश यादव ने भी अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री आवास का नक्शा सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री का आवास बिना नक्शे के बना है और इसका प्रमाण जनता को देना चाहिए। अब अजय राय का यह बयान उनके इस रुख को आगे बढ़ाता दिख रहा है।

मस्जिद का इतिहास और विवाद की जड़ें

मुस्तफा मस्जिद का निर्माण करीब 40 साल पुराना माना जाता है। यह मस्जिद उस वक्त के दौर में बनी थी जब मुरादाबाद में विकास प्राधिकरण (एमडीए) का गठन नहीं हुआ था। मस्जिद को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब आरोप लगाए गए कि यह मस्जिद अवैध तरीके से निर्मित हुई है। हाल ही में, यूपी में योगी सरकार की तरफ से यह मस्जिद अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में 25 सितंबर को सुनवाई होनी है, और यह मस्जिद विवाद का मुख्य केंद्र बन चुका है।

मुस्लिम समुदाय का कहना है कि मस्जिद का निर्माण पूरी तरह से वैध तरीके से हुआ है और इसे अवैध घोषित करना नाइंसाफी है। दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि मस्जिद के निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है और इसे तोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। यह मस्जिद विवाद केवल मुरादाबाद का ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का मुद्दा बन चुका है।

सरकार का रवैया और राजनीतिक बयानबाजी

अजय राय ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मस्जिद तोड़ने का काम कर रही है ताकि हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को खत्म किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा दोनों समुदायों के बीच अविश्वास फैलाने की है। राय ने यह भी चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आधी रात को भी मस्जिद को बचाने के लिए यहां आएंगे।

वहीं, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस का मकसद भाईचारे को खत्म करना नहीं है, बल्कि हर धर्म और समुदाय की हिफाजत करना उनका मिशन है। राय का कहना था कि “सनातनी सब यहां मस्जिद की हिफाजत के लिए खड़ा है। मस्जिद को कोई नहीं गिरा सकता।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोरखपुर में मुख्यमंत्री ने श्मशान का पैसा खाया है और इसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

राजनीतिक माहौल और आगामी चुनाव

मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इस मस्जिद विवाद को धार्मिक स्वतंत्रता के रूप में देख रहा है, वहीं भाजपा और उसकी समर्थक संगठनों का दावा है कि यह अवैध निर्माण है और नियम कानून का उल्लंघन हुआ है। इस विवाद ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। विपक्षी दल इसे हिंदू-मुस्लिम धुर्वीकरण का प्रयास बताते हुए सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

अजय राय ने यह भी कहा कि कांग्रेस 403 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ रही है और राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा कि गठबंधन की सीटें कितनी होंगी। यह बयान भी इस बात का संकेत है कि कांग्रेस यूपी में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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