बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए देश भर में ‘जेन-जी’ युवाओं, छात्रों और बेरोजगारों के मुद्दों पर उठ रहे आंदोलनों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि ये आंदोलन अब स्वतंत्र रूप से नहीं चल रहे, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दल इन्हें अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका सीधा असर देश के युवाओं और छात्रों के मन पर पड़ा है।
एक्स पर पोस्ट करते हुए उठाया मुद्दा
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनसे आम लोगों को यह विश्वास होने लगा है कि युवाओं, विद्यार्थियों और बेरोजगारों के ज्वलंत मुद्दों को लेकर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जेन-जी आंदोलन अब अपनी मूल स्वतंत्रता खोकर धीरे-धीरे राजनीति की चपेट में आता जा रहा है।
पूर्व सीएम ने आगे कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर में चल रहे आंदोलन के समय युवाओं और छात्रों को कुछ बड़े सपने दिखाए गए थे, लेकिन आज वही सपने गंभीर सवालों और आशंकाओं से घिर गए हैं। इसकी प्रमुख वजह विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा इन जन-आंदोलनों पर कथित तौर पर कब्जा करने की कोशिशें हैं।
जेन-जी और जेन-अल्फा की मांगों के प्रति बसपा की सहानुभूति
मायावती ने स्पष्ट किया कि जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ियों की वैध एवं जायज मांगों के प्रति बहुजन समाज पार्टी की पूरी सहानुभूति मौजूद है। उन्होंने बताया कि जेन-जी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो लगभग सन 1997 से 2012 के बीच जन्मे हैं, वहीं जेन-अल्फा पीढ़ी में 2013 से 2024 के बीच जन्मी नई पीढ़ी शामिल है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि बसपा की समस्त प्रदेश इकाइयों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे अपने-अपने राज्यों और क्षेत्रों में संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर युवाओं की समस्याओं का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान कराने के लिए सक्रिय रहें।
धरना-प्रदर्शन से दूर रहें कार्यकर्ता
बसपा प्रमुख ने पार्टी के अनुशासन का हवाला देते हुए कहा कि बसपा कार्यकर्ता धरना, प्रदर्शन या किसी भी प्रकार के आंदोलन में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपनी तन, मन और धन की शक्ति को चुनावी तैयारियों के लिए सुरक्षित रखें, ताकि पार्टी को सत्ता में लाकर जनता की समस्याओं का वास्तविक समाधान किया जा सके।
मायावती ने अपने पोस्ट में पार्टी की विचारधारा को दोहराते हुए लिखा, “बसपा का मूल उद्देश्य ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित सरकार का गठन करना है। साथ ही पार्टी का लक्ष्य जेन-जी, जेन-अल्फा और समाज के हर वर्ग की समस्याओं का स्थायी समाधान उपलब्ध कराना है।”
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा के चार बार सत्ता संभालने के दौरान यह सिद्धांत व्यवहारिक रूप में साबित भी हुआ है।
निशू आजाद के पिता संग मारपीट की घटना पर भी उठाया सवाल
इस अवसर पर मायावती ने हाल ही में जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई एक चर्चित घटना का भी उल्लेख किया। बता दें कि छात्र कार्यकर्ता निशू आजाद के पिता संजय आजाद के साथ यहां मारपीट की गई थी। इस घटने पर बसपा सुप्रीमो ने कहा कि अगर पुलिस समय रहते उचित और सख्त कार्रवाई करती, तो यह गंभीर घटना घटित नहीं होती।
उन्होंने मामले में आरोपी व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक सबसे कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे नाइंसाफी भरे मामलों में जरूरत पड़ने पर आवाज उठाने से बसपा कभी पीछे नहीं हटेगी।
राजनीतिक गलियारों में गूंजा मायावती का बयान
मायावती के इस बयान को राजनीतिक पंडित ऐसे समय पर महत्वपूर्ण मान रहे हैं, जब देश की राजनीति में युवाओं के मुद्दे तेजी से उभर रहे हैं और कई दल जेन-जी वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने की रणनीति बना रहे हैं। ऐसे में बसपा की ओर से आंदोलनों से दूर रहकर चुनावी तैयारी पर फोकस करने के निर्देश को पार्टी की आगामी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
स्पष्ट है कि मायावती चाहती हैं कि युवाओं के मुद्दों को किसी भी दल द्वारा राजनीतिक उपलब्धि का साधन न बनाया जाए, बल्कि इनका समाधान सत्ता में आकर किया जाए — और इस दिशा में बसपा अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।


























