दिल्ली एक बार फिर उस खौफनाक दौर की याद दिला रही है, जब साल 2012 में निर्भया कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस बार चलती बस में एक 16 वर्षीय किशोरी के साथ कथित तौर पर गैंगरेप की घटना सामने आई है। पीड़िता के बयान के मुताबिक, परी चौक से कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर लंबे सफर के दौरान उसके साथ यह हैवानियत की गई। मामले में पुलिस ने आरोपी बस ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
नाराज होकर घर से निकली थी छात्रा
दरअसल, यह पूरी घटना 4 अगस्त की है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के एक गांव में रहने वाली पीड़िता स्थानीय सरकारी इंटर कॉलेज में 11वीं कक्षा की छात्रा है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 3 अगस्त की शाम उसकी मां ने पढ़ाई न करने पर उसे डांटा था। इस बात से नाराज होकर वह अगले दिन यानी 4 अगस्त को घरवालों को बताए बिना ही घर से निकल गई। उसका इरादा नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास पहुंचने का था। इसी मकसद से वह एक बस में सवार हुई।
गलत स्टॉप पर उतरी लड़की, फिर बदल गई तकदीर
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि नोएडा पहुंचने के बाद भारी बारिश और अंधेरे के चलते वह गलती से परी चौक पर उतर गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह आगे कैसे पहुंचे। इसी बीच वहां एक दूसरी बस आई, जिसे उसने रुकवाया और उसमें सवार हो गई। बताया जा रहा है कि उस वक्त बस में ज्यादा सवारियां मौजूद नहीं थीं। बस के चलने के साथ ही आरोपी कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दीं और फिर कंडक्टर व ड्राइवर ने मिलकर नाबालिग के साथ गैंगरेप की हैवानियत को अंजाम दिया।
रिंग रोड पर उतारकर फरार हुए दोनों आरोपी
वारदात के बाद दोनों आरोपियों ने रिंग रोड पर लड़की को बस से उतार दिया और मौके से फरार हो गए। इसके बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस से की। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान कंडक्टर संदीप और ड्राइवर कुलदीप के रूप में हुई है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल हुई बस को फोरेंसिक जांच (FSL) के लिए जब्त कर लिया है ताकि सबूतों को सुरक्षित रखा जा सके।
चुप रहने की दी थी धमकी
पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता को धमकी दी थी कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो उसे उसका नतीजा भुगतना पड़ेगा। लेकिन लड़की ने डर को दरकिनार करते हुए हिम्मत दिखाई और पूरी घटना पुलिस तक पहुंचाई, जिसके बाद दोनों आरोपी हवाले में लिए गए।
अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर साधा निशाना
इस बेरहम वारदात पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी प्रतिक्रिया दी है। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘जब असल में किसी अपराध को अंजाम दिया जा रहा होता है तो दिल्ली पुलिस गायब रहती है। ये तभी सामने आते हैं जब उन्हें बच्चों पर बेरहमी से हमला करना होता है।’ उनके इस बयान ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग इस घटना से आहत होकर आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पीओसीएसओ कानून के तहत दर्ज होगा मामला
चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए इस मामले में पीओसीएसओ एक्ट यानी बच्चों से यौन अपराधों का संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस कानून के तहत नाबालिग से दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में आरोपियों को आजीवन कारावास या इससे भी सख्त सजा का प्रावधान है। साथ ही कानून के मुताबिक पीड़िता की पहचान किसी भी सूरत में सार्वजनिक नहीं की जा सकती और उसे काउंसलिंग व कानूनी मदद मुहैया कराई जानी चाहिए।
निर्भया कांड के बाद भी क्यों नहीं सुधर रही हालत?
साल 2012 की निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा को लेकर कई सख्त कानून बनाए गए थे। सार्वजनिक परिवहन में सीसीटीवी कैमरे, हेल्पलाइन नंबर जैसी कई व्यवस्थाओं का दावा लगातार किया जाता रहा है। लेकिन यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जमीनी हकीकत में सुरक्षा व्यवस्था अब भी कितनी कमजोर है। सवाल उठ रहा है कि आखिर 47 किलोमीटर लंबे सफर में ऐसी घटना को अंजाम कैसे दिया गया और इस दौरान पुलिस की नजर कहां थी? क्या बस संचालक एजेंसी पर भी लापरवाही की जिम्मेदारी तय होगी? ये सवाल अब चर्चा का विषय बन गए हैं।


























