Neha Bora’s statement on Bangladesh: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा का कथित ‘बांग्लादेश से सीख’ लेने वाला बयान विवादों में आ गया है। इस मामले में बढ़ती राजनीतिक बहस के बीच नेहा बोरा ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है। उन्होंने भाजपा (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके वीडियो को संदर्भ से हटाकर प्रसारित किया जा रहा है।
नेहा बोरा के मुताबिक, उनके बयान को इस तरह पेश किया जा रहा है, जिससे यह संदेश जाए कि वह बांग्लादेश की प्रतिक्रियावादी ताकतों का समर्थन कर रही हैं। उन्होंने इस प्रस्तुति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका पक्ष लोकतंत्र, मानवाधिकार और धार्मिक कट्टरवाद के विरोध से जुड़ा है।
इस विवाद ने राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ वीडियो के संदर्भ, उसकी व्याख्या और सोशल मीडिया पर राजनीतिक संदेशों के प्रसार को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।
5 मिनट 42 सेकेंड के वीडियो में नेहा बोरा ने क्या कहा?
नेहा बोरा ने करीब 5 मिनट 42 सेकेंड के वीडियो में अपने बयान को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ से जुड़े आईटी सेल की ओर से उनका वीडियो संदर्भ से हटकर फैलाया जा रहा है। उनके अनुसार, इस तरह की प्रस्तुति के जरिए लोगों के बीच नाराजगी पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस जैसी प्रतिक्रियावादी ताकतों के लिए सांप्रदायिकता से ऊपर उठकर एकजुटता की अवधारणा को समझना मुश्किल है। उनके मुताबिक, वीडियो को कथित तौर पर गलत संदर्भ में प्रसारित करना राजनीतिक विरोधियों की पुरानी रणनीति का हिस्सा है।
हालांकि, वीडियो से छेड़छाड़ और उसे प्रसारित करने के पीछे जिम्मेदार लोगों को लेकर नेहा बोरा ने जो आरोप लगाए हैं, उन्हें उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए मूल वीडियो और प्रसारित किए जा रहे संस्करणों की तुलना करना जरूरी होगा।
भाजपा और आरएसएस पर साधा निशाना
अपने वीडियो में नेहा बोरा ने भाजपा और आरएसएस की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश करके एक ऐसा राजनीतिक नैरेटिव बनाया जा रहा है, जो उनके वास्तविक संदेश से अलग है।
नेहा बोरा ने कहा कि उनका समर्थन उन उत्पीड़ित लोगों के साथ है, जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं तथा धार्मिक कट्टरवाद का विरोध करते हैं। उनके बयान के मुताबिक, किसी भी मुद्दे को समझने के लिए उसके व्यापक संदर्भ को देखना जरूरी है।
इस तरह उन्होंने ‘बांग्लादेश से सीख’ वाले कथित बयान को लेकर उठे विवाद के बीच अपने रुख को स्पष्ट करने की कोशिश की। उनके स्पष्टीकरण का मुख्य आधार यह है कि उनके विचारों को बांग्लादेश की प्रतिक्रियावादी ताकतों के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
लोकतंत्र और मानवाधिकारों को लेकर क्या बोलीं नेहा बोरा?
नेहा बोरा ने अपने वीडियो में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन और उससे जुड़े आंदोलन को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।
For regressive forces like the RSS-BJP solidarity beyond communalism is an incomprehensible concept, hence, they’ve now resorted once again to the old tactic of circulating doctored videos and manufacturing outrage around it.
A video of mine is being circulated out of context by the Sangh IT Cell as me extending solidarity to regressive forces in Bangladesh, ironically by the most regressive communalists of our own country.
We stand with the oppressed fighting for democracy, human rights and against religious fundamentalism.
You attack us with lies because you are afraid of our movement for voter rights and democracy. You fear that the people of the country know the truth about SIR, Gyanesh Kumar and how you use both to disenfranchise 13 crore people!
— Neha (@neha_aisa) October 21, 2026
उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई उन लोगों के अधिकारों के लिए है, जो धार्मिक कट्टरवाद और उत्पीड़न का विरोध करते हैं। उनके अनुसार, लोकतंत्र की रक्षा के लिए अलग-अलग समुदायों के लोगों के बीच एकजुटता जरूरी है।
नेहा बोरा ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ झूठे नैरेटिव का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसे मतदाता अधिकारों और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर चल रहे आंदोलन के संदर्भ में पेश किया।
SIR और ज्ञानेश कुमार का भी किया जिक्र
नेहा बोरा ने अपने वीडियो में SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों के जरिए करीब 13 करोड़ लोगों को उनके मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा है। यह संख्या और इससे जुड़ा आरोप नेहा बोरा के बयान का हिस्सा है; इसकी पुष्टि के लिए संबंधित चुनावी आंकड़ों और आधिकारिक दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची की जांच और संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। जहां मतदाता सूची की शुद्धता को चुनावी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं इसके क्रियान्वयन, पात्र मतदाताओं के नाम और उनके अधिकारों को लेकर उठने वाली चिंताएं भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा हैं।
नेहा बोरा ने इसी संदर्भ में कहा कि उनकी आवाज उठाने की वजह मतदाता अधिकारों और लोकतंत्र से जुड़े सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को लेकर विरोधियों में चिंता है।


























