दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। आप पार्टी (AAP) के विधायक संजीव झा और कुलदीप कुमार ने गुरुवार को गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर भाजपा शासन पर जमकर प्रहार किया। दौरे के दौरान दोनों विधायकों ने मरीजों और उनके परिजनों से खुलकर बातचीत की और आरोप लगाया कि सत्ता आने के बाद ही भाजपा ने दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की हालत खस्ता कर दी है।
“इलाज करने वाले अस्पताल खुद बीमार हो गए”
विधायक संजीव झा ने कहा कि जिन संस्थानों का काम लोगों की सेहत संभालना है, वे आज खुद बीमारी का शिकार बन चुके हैं। उनके मुताबिक जीटीबी अस्पताल में मरीजों को न सिर्फ दवाइयों की कमी झेलनी पड़ रही है, बल्कि बुनियादी जांचें भी नहीं हो पा रही हैं।
आप दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दिल्ली के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में शुमार GTB अस्पताल उपेक्षा का ग्राफ्त बन गया है। यहां डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं की पूरी सूची अस्पताल की ओर से उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। टेस्ट और स्कैन जैसी सेवाएं भी ठप हैं, जिससे मरीजों को महंगे प्राइवेट लैब का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
गार्ड ले रहे 100-200 रुपये, भीड़ को कर रहे रास्ते से हटाना
औचक दौरे के दौरान संजीव झा को एक चौंकाने वाला दावा करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मी 100 से 200 रुपये लेकर चुनिंदा मरीजों को सीधे डॉक्टर के केबिन तक पहुंचा रहे हैं, वहीं घंटों कतार में लगे इंतजार कर रहे मरीज दरवाजे के बाहर ही खड़े रह जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इमरजेंसी की पर्ची अब राजीव गांधी अस्पताल से बनाने की सलाह दी जा रही है, जबकि पहले ऐसी कोई जरूरत नहीं पड़ती थी। संजीव झा के अनुसार, जब तक मोहल्ला क्लीनिक संचालित थे, लोगों को वहां से बेहतर दवाइयां मिलती थीं। इन्हें बंद किए जाने के बाद खांसी-जुकाम और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों की जांच के लिए भी लोग अस्पतालों में भारी भीड़ लगाने को मजबूर हो गए हैं।
“300 करोड़ का घोटाला, फिर भी दवाइयां अलमारी में बंद”
संजीव झा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री पर भी सीधा वार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में दवा खरीद में बड़ी गड़बड़ी हुई है। उनके कहना था, “100 करोड़ रुपये कीमत की दवाइयां 400 करोड़ रुपये में खरीदी गईं, यानी लगभग 300 करोड़ का घोटाला हुआ। और अब वे दवाइयां खुद ही गायब हो गईं।”
दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक, GTB अस्पताल का बदहाली से बुरा हाल है!
अस्पताल में स्थिति बेहद चिंताजनक है।
दवाइयों की कमी: मरीजों को पूरी दवाइयां नहीं मिल रही हैं।
जांच की सुविधा ठप: जरूरी टेस्ट और जांचें अस्पताल में नहीं हो रही हैं, मरीजों को मजबूरन बाहर से… pic.twitter.com/syvAN5aKW6
— MLA Kuldeep Kumar (@KuldeepKumarAAP) August 27, 2026
उन्होंने बताया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, MRI और एक्स-रे जैसी जरूरी जांचें नहीं हो रही हैं। डॉक्टर मरीजों को बाहर से ये टेस्ट कराने की सिफारिश दे रहे हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
अस्पताल से मिलने वाली दवाओं पर छपा एमआर
विधायक कुलदीप कुमार ने भाजपा सरकार के करीब डेढ़ साल के कार्यकाल को लेकर कहा कि इतने छोटे समय में ही सरकारी अस्पतालों की स्थिति दयनीय हो गई है। दूर-दराज से इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीज यहां ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कुलदीप कुमार ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि अस्पताल से वितरित की जा रही दवाओं पर ‘नॉट फॉर सेल’ (बिक्री के लिए नहीं) का उल्लेख नहीं है, बल्कि उन पर MRP अंकित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसी दवाइयां रखी जा रही हैं, ताकि इन्हें आगे बाजार में बेचा जा सके। उनके अनुसार, दवा काउंटर के बाहर भी गार्ड पैसे लेकर बिना लाइन के लोगों को दवाइयां दिलवाने का अवैध कारोबार कर रहे हैं।
भर्ती मरीजों के वार्ड में न पानी, न पंखे
अस्पताल में भर्ती एक मरीज के तीमारदार ने विधायकों को बताया कि वे दो दिनों से वार्ड में डटे हैं, लेकिन उस ब्लॉक में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। पंखे खराब पड़े हैं और भीषण गर्मी के बीच अव्यवस्था का शिकार महिलाएं बेहोश होकर गिर रही हैं, फिर भी अधिकारियों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कुलदीप कुमार ने बताया कि अस्पताल में मिले मरीजों का कहना है कि डॉक्टर पांच दवाइयां लिखते हैं, लेकिन दो-तीन ही काउंटर से मिल पाती हैं, बाकी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। अधिकांश मरीजों ने यह भी बताया कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में सभी दवाइयां अस्पताल में ही मिल जाती थीं और हर तरह की जांच वहीं संपन्न हो जाती थी।


























