गैलप सर्वे: 89% अमेरिकी लोगों का मानना, सरकार में व्यापक स्तर पर फैला है भ्रष्टाचार

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यह बदलाव रातोंरात नहीं आया है, बल्कि गत एक वर्ष के भीतर ही इसमें अचानक उछाल दर्ज किया गया है। पिछले साल यानी 2025 से पहले वाले सर्वेक्षण में यह दर 79 प्रतिशत थी और 2024 में 73 प्रतिशत। गैलप के रिकॉर्ड के अनुसार 2010 से लेकर अब तक के दौरान यह आंकड़ा आमतौर पर 72 से 79 प्रतिशत के दायरे में ही सिमटा रहा।

दस में नौ अमेरिकी मानते हैं सरकार भ्रष्ट, गैलप सर्वे

HIGHLIGHTS

  • वाइट हाउस में लौटे ट्रंप, लेकिन जनता का भरोसा टूटा
  • गैलप सर्वे ने खोली पोल, 89% अमेरिकी बोले सरकार भ्रष्ट
  • अमेरिका अब नाइजीरिया जैसे देशों में, जानें चौंकाने वाली वजह
  • कतर के जेट उपहार से ट्रंप घिरे, 91% डेमोक्रेट नाराज

अमेरिका में सत्ता और सिस्टम के प्रति आम नागरिकों का भरोसा अब अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित राय सर्वे संस्था गैलप द्वारा बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस सर्वेक्षण के मुताबिक देश की लगभग 89 प्रतिशत आबादी का मानना है कि संघीय सरकार के इंतजामों में भ्रष्टाचार पूरी तरह व्यापक रूप से फैला हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद यह आंकड़ा पिछले बीस सालों में सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंच गया है, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

आंकड़ों में नजर आई स्पष्ट छलांग

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यह बदलाव रातोंरात नहीं आया है, बल्कि गत एक वर्ष के भीतर ही इसमें अचानक उछाल दर्ज किया गया है। पिछले साल यानी 2025 से पहले वाले सर्वेक्षण में यह दर 79 प्रतिशत थी और 2024 में 73 प्रतिशत। गैलप के रिकॉर्ड के अनुसार 2010 से लेकर अब तक के दौरान यह आंकड़ा आमतौर पर 72 से 79 प्रतिशत के दायरे में ही सिमटा रहा। ऐसे में अचानक 89 प्रतिशत का स्तर छूना विश्लेषकों के लिए भी कम चौंकाने वाली बात नहीं है।

डेमोक्रेट मतदाताओं में सबसे तेज बढ़ा असंतोष

सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस वृद्धि का जोर सबसे अधिक डेमोक्रेट समर्थकों और निर्दलीय वोटरों में देखा गया। डेमोक्रेट मतदाता 2024 में 57 प्रतिशत लोग ही सरकार में व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर सहमत थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 91 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यानी महज एक वर्ष में 34 अंकों की प्रचंड छलांग। निर्दलीय मतदाता इस वर्ग में भी रुख बदला है। पहले 78 प्रतिशत थे, जो अब 90 प्रतिशत हो गए हैं।रिपब्लिकन मतदाता अपेक्षाकृत स्थिर रहे और इस बार लगभग 83 प्रतिशत का आंकड़ा दर्ज हुआ।

जिस प्रश्नावली में यह बात पूछी गई, उसमें राष्ट्रपति ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया था। फिर भी गैलप का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का नजरिया बदलने का समय ट्रंप की सत्ता वापसी के बाद की अवधि से मेल खाता है।

कॉर्पोरेट जगत पर भी बरसे सवाल

यह निराशा केवल सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं है। सर्वे में 71 प्रतिशत अमेरिकियों ने स्वीकार किया कि देश के कारोबारी माहौल में भी घपलेबाजी बड़े पैमाने पर मौजूद है। 2024 में यह भरोसा 59 प्रतिशत था, यानी एक वर्ष में 12 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। सरकार और कॉर्पोरेट दोनों क्षेत्रों में एक साथ बढ़ रही यह अविश्वास की राह इस बात का संकेत है कि नागरिकों का सिस्टम से मोहभंग गहराता जा रहा है।

भरोसे के स्तर में अमेरिका अब कहां खड़ा है?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 89 प्रतिशत का यह आंकड़ा अमेरिका को उन चुनिंदा देशों की सूची में धकेल देता है, जहां आम नागरिक अपनी सरकार में इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की धारणा रखते हैं। गैलप की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 के बाद अब तक केवल लेबनान, घाना, नाइजीरिया और पेरू में ही इतने उंचे स्तर पर यह धारणा दर्ज हुई है। विकसित देशों की सूची में गिना जाने वाला अमेरिका जब इस तरह के आंकड़ों से भरे समूह में शामिल होता है, तो यह उसकी लोकतांत्रिक छवि के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

क्या है ट्रंप से जुड़ा विवाद?

यह सर्वे ऐसे समय पर सामने आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप द्वितीय कार्यकाल में हितों के टकराव और अपने पद के दुरुपयोग के आरोपों से घिरे हुए हैं। सबसे बड़ा विवाद कतर के शाही परिवार से मिले एक आलीशान बोइंग 747 विमान को लेकर छिड़ा है, जिसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए भेंट के रूप में दिया गया था।

ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए निःशुल्क उपहार की संज्ञा दी थी, लेकिन अमेरिकी वायु सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों का तर्क है कि इस विमान को एयर फोर्स वन के रूप में तब्दील करने से पहले उसमें सुरक्षा और तकनीकी उन्नयन के लिए करदाताओं के खजाने से करोड़ों डॉलर खर्च हो सकते हैं। इस मुद्दे पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट — दोनों ही खेमों से आलोचना हुई, जिससे राष्ट्रपति पद, ट्रंप के निजी कारोबारी हितों और धनिक विदेशी दानदाताओं के बीच संबंधों को लेकर सवालों का सिलसिला तेज हो गया।

Sandhya Samay News

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