तिब्बत-नेपाल सीमा के दुर्गम पहाड़ी इलाकों से अचानक उतरी फ्लैश फ्लड ने नेपाल को बुरी तरह तोड़ दिया है। आपदा के जख्म धीरे-धीरे और गहरे होते जा रहे हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक अब तक 734 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2500 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनमें 700 से अधिक विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। दर्जनभर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में सैकड़ों मजदूर अब भी फंसे हुए हैं। बचाव अभियान में नेपाली सेना के साथ भारत, चीन समेत कई देशों की टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं।
मौत का आंकड़ा 734 के करीब
नेपाल सरकार ने रविवार को आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई, बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 तक पहुंच गई है। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन मलबे के नीचे दबे कई लोगों की तलाश अभी भी जारी है। विशेषज्ञों को आशंका है कि जैसे-जैसे हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों को निकाला जाएगा और मलबा हटेगा, यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता उन मजदूरों को लेकर है, जो त्रिशूली नदी बेसिन में बने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में बाढ़ के समय काम कर रहे थे। आंकड़ों के हिसाब से 11 प्रोजेक्ट्स में कुल 573 लोग फंसे हैं, जिनमें नेपाल, भारत, चीन और साउथ कोरिया के नागरिक शामिल हैं। ज्यादातर लोग चार बड़े प्रोजेक्ट्स में फंसे हुए हैं:
- त्रिशुली-1 प्रोजेक्ट: करीब 322 लोग लापता
- ऊपरी त्रिशुली 3बी: 122 लोग फंसे
- ऊपरी त्रिशुली 3ए: 43 लोग लापता
- रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: 44 लोग फंसे
भारत और चीन के इंजीनियर्स नेपाली टीमों के साथ मिलकर इन सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन मलबा और बहता पानी रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
भारत ने भेजा चौथा राहत विमान
आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद भी तेजी से आनी शुरू हो गई है। देर रात भारत ने अपना चौथा राहत विमान नेपाल रवाना किया। वहीं अमेरिका ने घोषणा की है कि वह नेपाल की जनता को 3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देगा। नेपाल स्थित अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया पर बताया कि इस मदद में 10,000 प्रभावित परिवारों के लिए तीन महीने की आपातकालीन खाद्य सहायता शामिल होगी।
तिब्बत के ग्यिरोंग में 261 विदेशी नागरिक लापता
चीनी मीडिया के मुताबिक तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी से 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर है। इनमें 49 भारतीय और 104 नेपाली नागरिक शामिल हैं। बताया जा रहा है कि बाढ़ आने के वक्त कुछ भारतीय तीर्थयात्री सीमा पर बने आव्रजन भवन में मौजूद थे। सैलाब की चपेट में पूरा इमिग्रेशन सेंटर आ गया था, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
ओडिशा के चार लोग लापता
ओडिशा सरकार ने बताया कि नेपाल बाढ़ में राज्य के चार लोग अब भी लापता हैं, जबकि दो लोग सुरक्षित भारत आ चुके हैं। लापता लोगों में खुर्दा जिले के संदीप महापात्रा, उनकी पत्नी सिद्धार्थि कुमारी साहू और बरगढ़ जिले की गुन्नम साई बिंदु कुमारी उनकी बेटी गुन्नम हरेस्खा शामिल हैं। बिंदु कुमारी के पति गुन्नम जय कृष्णा सुरक्षित हैं और पिछले छह साल से नेपाल के अपर त्रिशूली में एंडट्रिज हाइड्रोपावर कंपनी से जुड़े हुए हैं। उनसे संपर्क के लिए उनकी लोकेशन विदेश मंत्रालय के साथ साझा कर दी गई है।
काठमांडू में फंसे 102 तीर्थयात्री सुरक्षित नागपुर पहुंचे
इस बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। नागपुर से गए 102 तीर्थयात्री, जो बाढ़ के बाद काठमांडू में फंसे थे, रविवार तड़के करीब 4:30 बजे ट्रेन से सुरक्षित नागपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गए। ये यात्री 19 अगस्त को पशुपतिनाथ समेत अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए नेपाल गए थे और 27 अगस्त तक काठमांडू में ही रुके। विदर्भ क्षेत्र के चार अन्य यात्री शनिवार को विमान से लौट चुके हैं।
भोटेकोशी पर बनी नई झील
नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक दिन पहले फटी झील का पानी अब नियंत्रित रूप से निकल रहा है और उसमें कोई तेजी नहीं दर्ज की गई है, जिससे बड़ा खतरा टल गया है। लेकिन राहत की सांस अभी पूरी नहीं है। भोटेकोशी नदी पर भारी मलबा जमा होने से एक नई झील बन गई है। चीनी अधिकारियों ने इसकी लगातार निगरानी की बात कही है और इसके फटने की स्थिति में दोबारा बाढ़ आने की आशंका जताई है।
नेपाल के लिए यह दशकों में सबसे भीषण आपदा मानी जा रही है। बचाव और राहत कार्य जारी है, लेकिन पुनर्वास की चुनौती आने वाले समय में देश के सामने खड़ी रहेगी।

























