नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ अब तक की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा साबित हो रही है। बुधवार को सुरक्षाबलों ने आठ जिलों से और शव निकाले हैं, जिसके बाद इस हादसे में जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़कर 1127 तक पहुंच गया है। राहत और बचाव कार्य में लगे अधिकारियों को रुक-रुककर हो रही बारिश तथा कई इलाकों में नदियों के उफान पर आने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
चार हजार लोग लापता
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के आंकड़ों के मुताबिक, अब भी करीब 4,000 लोगों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। इन लापताओं में 583 विदेशी नागरिक और 83 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। दूसरी ओर, बचाव टीमों ने अब तक लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला है। बताया जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक बर्फ और चट्टानों के खिसकने से जो ग्लेशियर झील फटी, उससे भोटेकोशी नदी में भयानक बाढ़ आई, जिसने रास्ते में पड़ने वाले घर, पुल, वाहन, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाओं को बुरी तरह तबाह कर दिया।
इन जिलों में मिले सबसे ज्यादा शव
एनडीआरआरएमए के अनुसार, चितवन जिले से सबसे अधिक 321 शव बरामद हुए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 216, नवलपरासी वेस्ट से 170, नुवाकोट से 142, गोरखा से 65, धाडिंग से 57, रसुवा से 41 और तनहुन से 38 शव मिले हैं। इस आपदा का असर सीमा पार भी देखने को मिला है। चीनी मीडिया के मुताबिक, तिब्बत में 16 लोगों की मौत हो चुकी है और वहां करीब 550 लोग अब भी लापता हैं।
शवों की पहचान बनी सबसे बड़ी चुनौती
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों के बाहर लोगों की भीड़ लगातार बनी हुई है। लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर पहुंचे लोग दीवारों पर चिपकाए गए शवों के फोटो घंटों देखते रहे। अधिकारियों ने बताया कि देशभर के 21 अस्पतालों में अज्ञात शव रखे गए हैं। बहाव से बहकर आए कई शव इतने बुरी हालत में हैं कि पहचान करना बेहद मुश्किल हो रहा है। आंकड़ों के हिसाब से अब तक केवल 60 शवों की पहचान होकर परिजनों को सौंपे जा सके हैं, वहीं लगभग 700 शवों का दस्तावेजीकरण कर डीएनए टेस्ट के लिए नमूने सुरक्षित रखते हुए अंतिम संस्कार किया गया है।
सुरंगों में फंसे 683 कर्मचारियों की तलाश
बचाव दलों की सबसे बड़ी चिंता अलग-अलग पनबिजली परियोजनाओं पर मौजूद 683 कर्मचारियों और मजदूरों को लेकर है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इनमें से कई लोग बाढ़ के समय सुरंगों के अंदर काम कर रहे थे और वहीं फंस गए। इस खोजबीन में भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें नेपाली बचावकर्मियों के साथ में काम कर रही हैं। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम चिलिमे में एक सुरंग के भीतर अपनी स्थिति बना चुकी है, जबकि लांगटांग में वह 185 मीटर तक की जांच कर रही है।
कई जिलों के लिए फिर जारी हुआ फ्लड अलर्ट
मंगलवार को प्राधिकारियों ने देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के लिए बाढ़ का नया अलर्ट जारी किया है। नुवाकोट और रसुवा जिलों में अचानक बाढ़ आने का खतरा सबसे अधिक बताया गया है। ताप्लेजुंग, संखुवासभा, सोलुखुम्बु, खोटांग, ओखलढुंगा, रामेछाप, दोलखा, सिंधुपालचोक, काभ्रेपलांचोक, ललितपुर, भक्तपुर, काठमांडू और धादिंग में नदियों के उफान पर आने का मध्यम स्तर का जोखिम है। पश्चिमी नेपाल में गोरखा, लमजुंग, डोल्पा, रुकुम पूर्व और पश्चिम, जाजरकोट, दार्चुला, बैतड़ी, डडेलधुरा, डोटी, कैलाली तथा कंचनपुर जिलों के लिए भी चेतावनी जारी की गई है। कोशी, नारायणी, बागमती, कर्णाली, महाकाली समेत कंकाई, कमला, बबई, पूर्वी राप्ती और पश्चिमी राप्ती नदियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
21 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात
बचाव एवं राहत अभियान में 21,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की लगातार उड़ानें जारी हैं। विनाश का आलम यह है कि बाढ़ में 19 पुल बह चुके हैं, जो वाहनों के आवागमन के योग्य थे। नेपाल का चीन के साथ मुख्य जमीनी व्यापार मार्ग और रसुवागढ़ी सीमा पार मार्ग भी प्रभावित हुआ है।
यातायात हेतु एकतरफा संचालन लागू
धादिंग जिले के कृष्णभीर में राजमार्ग के हिस्से बहने के बाद यातायात अव्यवस्था बढ़ गई है। इसे देखते हुए काठमांडू को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले पृथ्वी और त्रिभुवन राजमार्गों पर एकतरफा यातायात नियम लागू कर दिया गया है। काठमांडू से हेटौडा जाने वाले 14 सीटर तक के वाहनों को फारपिंग-फाखेल-कुलेखानी-भीमफेदी मार्ग का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है, जबकि उलटी दिशा के वाहनों को भीमफेदी-कुलेखानी-सिस्नेरी-दक्षिणकाली रूट अपनाना होगा। 10 पहियों तक के बड़े ट्रक और यात्री वाहनों के लिए त्रिभुवन राजमार्ग तथा लौटते समय कांती राजमार्ग का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है।

























