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सुरों की मल्लिका का अंतिम सफर, तिरंगे में लिपटी आशा भोसले को मिली राजकीय विदाई

सुबह मुंबई स्थित उनके निवास ‘कासा ग्रैंड’ में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इस दौरान जगह-जगह से आए हजारों श्रद्धालुओं ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। इससे पहले उन्हें तिरंगे में लपेटकर पूरे राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई।

चेहरे पर सुकून और गले में माला... आशा भोसले बिल्कुल वैसे ही सो गईं, जैसे जीवनभर जीती थीं

HIGHLIGHTS

  • फिरोजी साड़ी और माथे पर बिंदी...
  • आशा भोसले के अंतिम दर्शन की तस्वीरें हर किसी को रुलाएंगी
  • 'पिया तू अब तो आजा' की आवाज़ हुई बंद
  • शिवाजी पार्क पहुंचा आशा भोसले का पार्थिव शरीर
  • आशा ताई को देख बॉलीवुड और खेल जगत की आंखों से छलके आंसू

Asha Bhosle’s Latest: सुरों की मल्लिका और भारतीय संगीत जगत का वह चमकता सितारा, जिसने करोड़ों दिलों पर दशकों तक राज किया, हमेशा के लिए अंधेरे में समा गया है। पद्म विभूषण से सम्मानित मशहूर गायिका आशा भोसले का पार्थिव शरीर राजकीय सम्मान के साथ मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट ले जाया जा रहा है, जहां उनके अंतिम संस्कार सम्पन्न होंगे।

पसंदीदा फिरोजी साड़ी में सजी ‘आशा ताई’

आशा भोसले को साड़ियां पहनना और खूब सजने-संवरने का बहुत शौक था। अपने अंतिम सफर के लिए भी उन्हें उसी सादगी और गरिमा के साथ तैयार किया गया, जिसके लिए वह पूरी जिंदगी जानी जाती थीं। उन्हें उनके पसंदीदा फिरोजी रंग की साड़ी पहनाई गई। गले में मोतियों की माला के साथ ताजा फूलों की माला डाली गई और माथे पर सुकून भरी बिंदी सजाई गई। उनका यह अंदाज उसी खूबसूरत शख्सियत की याद दिला रहा था, जिसे दुनिया ने हमेशा प्यार से देखा। उनके चेहरे पर वही सुकून था, जो उनके गाए भजनों और गजलों में सुनाई देता था; मानो वो बस गहरी नींद में सो रही हों।

सचिन तेंदुलकर और आशा पारेख भावुक

अंतिम दर्शन के दौरान मनोरंजन और खेल जगत की कई दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं। सबसे भावुक करने वाला नजारा तब देखने को मिला, जब क्रिकेट के ‘भगवान’ सचिन तेंदुलकर अपनी आंखों में आंसू लिए वहां पहुंचे। आशा ताई सचिन के लिए अपनी मां के समान ही थीं। पार्थिव शरीर के पास खड़े होकर सचिन काफी देर तक भावुक नजर आए।

वहीं, उनकी पुरानी सहेली और दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख भी खुद को संभाल नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। बॉलीवुड के वे सितारे, जो कभी आशा जी के गानों पर थिरकते थे, आज सिर झुकाए खामोश खड़े थे। हर किसी के चेहरे पर एक ही उदासी थी कि अब ‘दम मारो दम’ और ‘पिया तू अब तो आजा’ जैसी जान फूंकने वाली आवाज फिर कभी लाइव नहीं सुनी जाएगी।

82 साल के करियर में बिखेरी जादू की छिटें

1933 में जन्मीं आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र से संगीत की दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने अपने 82 वर्षों के लंबे संगीत करियर में हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती और अंग्रेजी सहित 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए। उन्हें 9 फिल्मफेयर अवॉर्ड समेत 100 से अधिक पुरस्कार और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा गया।

उनके जाने से न केवल मंगेशकर परिवार, बल्कि पूरे भारतीय संगीत जगत को एक ऐसा शून्य मिला है, जिसे कोई दूसरा भर पाने में सक्षम नहीं है। एक महान संगीत युग का यहां समापन हो गया है, लेकिन उनकी आवाज हमेशा सुरों में बसकर रहेगी।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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