Mumbai News: महाराष्ट्र में महायुति सरकार के अंदरूनी तकरार और खींचतान की खबरें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार यह विवाद उस कार्यक्रम को लेकर सामने आया है, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को न्योता नहीं दिया गया था। यह घटना नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर छत्रपति शिवाजी महाराज की 20 फीट ऊंची प्रतिमा के अनावरण के दौरान हुई, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। आइए, इस पूरे मामले का विस्तृत विश्लेषण करें और समझें कि आखिरकार ये खींचतान किस बात पर भड़की है और इसका क्या असर हो सकता है महाराष्ट्र की राजनीति पर।
महायुति सरकार में फिर क्यों आई खटास?
महाराष्ट्र में महायुति, जिसमें भाजपा और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) शामिल हैं, एक लंबे समय से मिलकर सरकार चला रहे हैं। हालांकि, सरकार के भीतर धीरे-धीरे टकराव और मतभेद की खबरें आने लगी हैं। हाल के घटनाक्रम में यह साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है। दोनों नेताओं के बीच संबंधों में खटास और असहमति की खबरें पहले भी आई थीं, लेकिन इस बार का विवाद खास तौर पर तब सामने आया जब शिंदे गुट को नवी मुंबई एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम में न्योता तक नहीं दिया गया।
नवी मुंबई एयरपोर्ट पर कार्यक्रम और विवाद
इस कार्यक्रम का आयोजन अडानी एयरपोर्ट अथॉरिटी और सिडको (CIDCO) ने मिलकर किया था। इसमें मुख्यमंत्री फडणवीस, अदिति तटकरे (शिवसेना की नेता) और वन मंत्री गणेश नाईक मौजूद रहे। इन सबके बीच, दोनों उपमुख्यमंत्री, यानी एकनाथ शिंदे और अजीत पवार, इस कार्यक्रम में नदारद रहे। खास बात यह थी कि शिंदे को इस कार्यक्रम का न्योता ही नहीं भेजा गया।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रोग्राम का आयोजन उस प्रोजेक्ट के तहत किया गया था, जिसका सीधे तौर पर सिडको (CIDCO) का नियंत्रण है। सिडको शहरी विकास मंत्रालय के अधीन आता है, जिसका मंत्री एकनाथ शिंदे ही हैं। यानी, अपने ही मंत्रालय के बड़े प्रोजेक्ट का अनावरण शिंदे को बिना न्योते के कर दिया गया। यह बात शिंदे गुट के नेताओं को रास नहीं आई।
शिंदे गुट के मंत्री संजय शिरसाट ने इस मुद्दे पर खुल कर कहा कि नौकरशाही राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और जानबूझकर शिंदे को इस कार्यक्रम का क्रेडिट लेने से रोका गया है। उन्होंने इस कथित निष्कासन को लेकर नाराजगी भी जाहिर की।
इसी बीच, इस विवाद को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने तुरंत ही कार्रवाई की। रिपोर्ट के मुताबिक, सिडको और अडानी एयरपोर्ट अथॉरिटी दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सरकारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने और उपमुख्यमंत्रियों को आमंत्रित न करने के मामले में जवाब मांगा गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस विवाद ने विपक्षी खेमे यानी महाविकास अघाड़ी (MVA) को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे ने इस घटना पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में होते हुए भी एकनाथ शिंदे की स्थिति गठबंधन में दयनीय हो गई है।
पिछले सप्ताह ही मीडिया में खबरें आई थीं कि शिंदे गुट भाजपा से असंतुष्ट होकर जल्द ही उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ जुड़ सकता है। इस विवाद ने इन अटकलों को और हवा दी है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने भी संकेत दिए हैं कि शिंदे गुट भाजपा से दूरी बना कर कहीं और जाने का मन बना रहा है।
क्या है इस विवाद का असली कारण?
मुख्य कारण इस विवाद का यह है कि शिंदे गुट को उसके अपने ही विभाग और प्रोजेक्ट से दूर रखा गया। शिंदे के शहरी विकास मंत्रालय का हिस्सा होने के बावजूद, उनके गुट को इस कार्यक्रम में न्योता न देना दिखाता है कि सरकार में अभी भी अंदरूनी खींचतान जारी है।
यह घटना न केवल शिंदे गुट के नेता के लिए अपमानजनक है, बल्कि यह गठबंधन की स्थिरता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो सरकार की एकता पर असर पड़ने का खतरा है।
महाराष्ट्र की महायुति सरकार के अंदरूनी खींचतान की यह घटना एक बड़े राजनीतिक संकट की ओर इशारा कर रही है। शिंदे गुट की नाराजगी और मुख्यमंत्री फडणवीस के बीच बढ़ती दूरी साफ दिख रही है। इस विवाद का समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यह और भी बड़ा रूप ले सकता है।
राजनीति के इस जटिल समीकरण में, अभी यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस खींचतान को कैसे संभालती है और क्या यह विवाद सरकार की स्थिरता को प्रभावित करेगा। फिलहाल, यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के लिए नई चुनौतियों का संकेत है और आने वाले समय में इसका असर सरकार के फैसलों और गठबंधन की स्थिरता पर पड़ेगा।
























