Vitamin D : धूप से भरपूर देश होने के बावजूद, भारत में विटामिन डी की कमी एक चुपके से फैल रही ‘महामारी’ बन चुकी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, एसी ऑफिस की चारदीवारी और घर के अंदर रहने की आदत ने इस समस्या को बेहद आम कर दिया है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अब सिर्फ सुबह की धूप लेना इस कमी को पूरा करने में काफी नहीं है। कुछ खास श्रेणी के लोगों के लिए तो विटामिन डी के सप्लीमेंट लेना बेहद जरूरी हो गया है।
आइए जानते हैं कि आप भी उनमें से एक हैं या नहीं और इस कमी से शरीर को कैसे बचाना चाहिए।
किन लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत है विटामिन डी सप्लीमेंट्स की?
- इंडोर लाइफस्टाइल वाले: जो लोग अपना ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर बिताते हैं और धूप के संपर्क में नहीं आते।
- गहरी या सांवली त्वचा वाले: त्वचा में मौजूद ‘मेलेनिन’ धूप से विटामिन डी बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
- 50 की उम्र पार कर चुके बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की क्षमता कम हो जाती है, जिससे धूप से विटामिन डी सिंथेसिस ठीक से नहीं हो पाता।
- मोटापे के शिकार: विटामिन डी वसा (फैट) में घुलनशील होता है। शरीर में ज्यादा फैट होने पर यह विटामिन उसमें अवशोषित होकर ब्लडस्ट्रीम तक नहीं पहुंच पाता।
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं:इस दौरान मां और बच्चे दोनों की जरूरतें बढ़ जाती हैं, जिसे केवल खानपान से पूरा करना मुश्किल होता है।
- शाकाहारी (वीगन) और किडनी/लिवर के मरीज: प्राकृतिक रूप से विटामिन डी मछली और अंडे में मिलता है। वहीं, किडनी या पेट की बीमारियां (जैसे सीलिएक) इसके अवशोषण में बाधा डालती हैं।
क्या आप भी हैं इसके शिकार? पहचानें लक्षण
अक्सर लोग इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं:
- लगातार थकान महसूस होना और एनर्जी की कमी
- हड्डियों और जोड़ों (खासकर कमर और घुटनों) में सुबह उठते ही दर्द
- मांसपेशियों में कमजोरी और बालों का झड़ना
- बार-बार सर्दी-जुकाम या इन्फेक्शन होना (इम्युनिटी कमजोर होना)
- अचानक मूड स्विंग होना और डिप्रेशन का शिकार होना
कमी दूर करने के बेहतरीन तरीके
सप्लीमेंट से पहले आप इन प्राकृतिक तरीकों को अपना सकते हैं:
- सही समय की धूप: सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच शरीर का कम से कम 70% हिस्सा (बिना क्रीम के) 15-30 मिनट तक धूप में रखें।
- डाइट में शामिल करें: धूप में रखे गए मशरूम, अंडे की जर्दी, कॉड लिवर ऑयल, और फोर्टिफाइड सोया या बादाम दूध का सेवन करें।
डॉक्टरों की चेतावनी: सप्लीमेंट लेने से पहले ये गलती न करें!
विटामिन डी की कमी देखकर लोग अक्सर मेडिकल स्टोर से जाकर बिना डॉक्टर की सलाह के 60,000 IU की गोलियां खा लेते हैं, जो कि खतरनाक हो सकता है।
- ब्लड टेस्ट जरूरी: सप्लीमेंट लेने से पहले ’25-OH विटामिन डी’ टेस्ट जरूर कराएं।
- किडनी का खतरा: शरीर में विटामिन डी का लेवल जरूरत से ज्यादा होने पर (Hypervitaminosis D) ब्लड में कैल्शियम बढ़ जाता है, जो किडनी स्टोन और किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।
- सही तरीका: हमेशा डॉक्टर की सलाह पर विटामिन D3 (Cholecalciferol) ही खरीदें। चूंकि यह फैट में घुलता है, इसलिए इसे खाली पेट नहीं, बल्कि थोड़े फैट वाले भोजन (जैसे दूध या नाश्ते) के साथ लेना चाहिए ताकि शरीर में इसका अवशोषण अच्छी तरह हो सके।



















