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जाने, गर्मी में बिना चाकू लगाए ‘मीठा और लाल’ तरबूज पहचानने का आसान तरीका

काटे सही तरबूज (फाइल फोटो)

How To Choose Sweet Watermelon: भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से राहत दिलाने वाला ‘तरबूज’ इन दिनों बाजारों में छाया हुआ है। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए इस 92% पानी से भरे फल का कोई मुकाबला नहीं। लेकिन, अक्सर ऐसा होता है कि बाजार से महंगे में खरीदा गया और बाहर से हरा-भरा दिखने वाला तरबूज, घर जाकर काटने पर अंदर से सफेद या फीका निकलता है। इससे न केवल पैसे बर्बाद होते हैं, बल्कि मन भी निराश हो जाता है।

अगर आप भी बिना काटे सही तरबूज चुनने में माहिर नहीं हैं, तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे आसान ट्रिक्स जिन्हें अक्सर दुकानदार ग्राहकों से छुपाते हैं। इन्हें अपनाकर आप हर बार ‘बेस्ट’ तरबूज अपने घर ला सकते हैं।

1. ‘फील्ड स्पॉट’ का राज (पीला धब्बा)

तरबूज खरीदते समय सबसे पहले उसके नीचे की तरफ देखें। वहां एक धब्बा होता है जिसे ‘फील्ड स्पॉट’ कहते हैं।
गहरा पीला या नारंगी: अगर यह धब्बा क्रीमी पीला या नारंगी है, तो समझ लीजिए कि तरबूज बेल पर पूरी तरह पक चुका है और जरूर मीठा होगा।
सफेद या हल्का हरा: अगर धब्बा सफेद या हल्का हरा है, तो इसका मतलब तरबूज को समय से पहले तोड़ दिया गया था और वह कच्चा होगा।

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2. आवाज सुनकर लगाएं अंदाजा

दुकानदार अक्सर तरबूज को थपथपाते नजर आते हैं, लेकिन आप भी यह ट्रिक अपनाएं। तरबूज को हाथ से हल्का ठोकें।
खोखली और गूंजती आवाज: अगर आवाज भारी और गूंजती हुई आती है, तो फल पका हुआ और रसीला है।
दबी या ठोस आवाज: अगर आवाज दबी या बंद सी लगती है, तो समझ लें कि तरबूज अभी भी कच्चा है।

3. वजन है अहम निर्णायक

एक ही साइज के दो तरबूज उठाकर देखें। जो तरबूज देखने में छोटा लेकिन उठाने में भारी लगे, उसे ही चुनें। भारी तरबूज का मतलब है कि उसमें पानी और रस की मात्रा ज्यादा है, जो उसकी पूर्ण पके होने की निशानी है।

4. रंग और बनावट पर दें नजर

मैट फिनिश: हमेशा गहरे हरे रंग का और जिसकी सतह चमकदार न हो (मैट फिनिश), ऐसा तरबूज चुनें। ज्यादा चमकने वाले तरबूज अक्सर कच्चे होते हैं।
भूरी जाली (वेबिंग): तरबूज की सतह पर भूरी जाली दिखाई देती है? यह मधुमक्खियों द्वारा परागण का संकेत है। इसका मतलब फल बहुत अधिक मीठा होगा।

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5. डंठल का रंग बताता है सच

तरबूज का डंठल (Stem) उसकी ताजगी का पता देता है।
सूखा और भूरा: अगर डंठल सूखा और भूरा है, तो तरबूज पूरी तरह पककर तोड़ा गया है।
हरा डंठल: अगर डंठल अभी भी हरा है, तो तरबूज को कच्चा तोड़ा गया है जो खाने में अच्छा नहीं लगेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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