Bihar New : बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्यसभा सदस्य बन चुके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दोपहर में अपना इस्तीफा देंगे, जिसके बाद स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार भाजपा का कोई नेता बिहार का मुख्यमंत्री बनेगा। आज 14 अप्रैल का यह दिन बिहार की सियासत में ‘सियासी संक्रांति’ के रूप में दर्ज होगा।
नीतीश कुमार के आखिरी दिन का पूरा शेड्यूल:
- सुबह 11 बजे: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक करेंगे।
- दोपहर बाद: कैबिनेट बैठक के बाद वे राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
- दोपहर 3 बजे: भाजपा विधायक दल (MLA) की बैठक बीजेपी कार्यालय में होगी। इस बैठक की अध्यक्षता पर्यवेक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।
- शाम 4 बजे: बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में NDA विधायक दल की बैठक होगी। इसी बैठक में नए मुख्यमंत्री (NDA विधायक दल का नेता) का ऐलान किया जाएगा।
- 15 अप्रैल: नए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह होगा।
202 विधायकों को पटना में ही रहने का निर्देश
किसी भी तरह की अनहोनी और बगावत को रोकने के लिए एनडीए ने अपने सभी 202 विधायकों को 14 और 15 अप्रैल को पटना में ही रहने का सख्त निर्देश दिया है। इस दौरान किसी भी विधायक को पटना छोड़कर बाहर जाने की इजाजत नहीं है। दूर-दराज के ज्यादातर विधायक पहले ही राजधानी पहुंच चुके हैं।
प्रशासन में जोर-शोर से तैयारियां
15 अप्रैल के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पटना प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी डॉ. थियागराजन की अगुवाई में सुरक्षा, वीवीआईपी आवाजाही, ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। देश भर से आने वाले बड़े नेताओं और गणमान्य अतिथियों के मद्देनजर फायर ब्रिगेड, आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात कर दिया गया है, जबकि मेडिकल टीमें और एम्बुलेंस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं।
नेताओं ने क्या कहा?
इस बीच, बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि हम कैबिनेट की बैठक में शामिल होंगे और मुख्यमंत्री जो भी फैसला लेंगे, उसका पालन करेंगे। वहीं, जदयू के वरिष्ठ नेता संजय कुमार झा ने विश्वास जताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और मुख्यमंत्री स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री आवास पर भी मंत्रियों के नामों, मेहमानों की सूची और कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर लगातार बैठकें चल रही हैं। कुल मिलाकर, बिहार की सियासत का यह सबसे बड़ा बदलाव अब औपचारिक रूप लेने के लिए बस कुछ ही घंटे दूर है।



















