ऋषी तिवारी
बिहार में त्योहारों का मौसम हो और सियासी गर्माहट न देखी जाए, यह असंभव है। इन दिनों बिहार की राजनीति में सबसे चर्चित मुद्दा सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें हैं। हालांकि, इस बीच जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
निशांत नहीं, नीतीश क्यों नहीं जाएंगे राज्यसभा?
जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने ऑफ द रिकॉर्ड बयान देते हुए चौंकाने वाला सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर राज्यसभा जाना ही है तो नीतीश कुमार क्यों नहीं जा सकते? नेता का सवाल था कि अगर निशांत की एंट्री हो ही रही है, तो क्या उन्हें ज़रूर राज्यसभा जाना होगा?
‘निशांत को बिहार की राजनीति करनी है, दिल्ली की नहीं’
सीनियर नेता का स्पष्ट मानना है कि अगर निशांत कुमार को राजनीति में लाया जा रहा है, तो उन्हें बिहार की राजनीति में ही सक्रिय होना चाहिए। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में एनडीए और खास तौर पर जेडीयू के लिए जो विरासत बनाई है, उसे आगे निशांत को बढ़ाना होगा। ऐसे में वे दिल्ली (राज्यसभा) क्यों जाएंगे?” जेडीयू नेता ने इशारों-इशारों में यह संकेत दिया है कि नीतीश कुमार के एमएलसी कोटे की सीट पर निशांत को बिहार की राजनीति में सक्रिय किया जा सकता है, जबकि राज्यसभा की सीट के लिए मुख्यमंत्री खुद ही बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
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अगर नीतीश गए राज्यसभा, तो सीएम कौन?
यह बयान बिहार के सत्ता समीकरणों को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दे सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा चले जाते हैं, तो बिहार में बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री तय मानी जा रही है। अगर नीतीश कुमार दिल्ली का रुख करते हैं, तो निशांत बिहार में डिप्टी सीएम की भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, अगर सीएम पद के लिए नीतीश कुमार की जगह किसी और को लाया जाए तो उसका फैसला भाजपा (BJP) पर होगा।
भाजपा का फैसला होगा निर्णायक
सूत्रों का कहना है, “भाजपा कब क्या फैसला ले, कोई नहीं जानता। अगर ऐसे सियासी समीकरण बनते हैं, तो निश्चित तौर पर भाजपा बिहार में चौंकाने वाला फैसला ले सकती है।” अभी यह भी साफ नहीं है कि आखिरकार JDU अपने कोटे की दो राज्यसभा सीटों के लिए किन नामों को अंतिम रूप देती है, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता का यह बयान बिहार की सत्ता के भविष्य को लेकर एक बड़ा संकेत ज़रूर है।

























