गुरुग्राम मिलेनियम सिटी की नागरिक सुविधाओं में अब डिजिटल तकनीक का बड़ा दाखिला होने जा रहा है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के सफल इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से प्रेरित होकर नगर निगम गुरुग्राम भी अब अपना स्वतंत्र हाईटेक निगरानी केंद्र खड़ा करने की तैयारी में जुट गया है। इस बड़े फैसले के बाद शहर में कचरा और मलबा फेंकने वालों की दिनचारी पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
24 घंटे चलेगी स्मार्ट डिजिटल निगरानी
नगर निगम की योजना के अनुसार, इस नए केंद्र के जरिए शहर में खुले में कूड़ा और निर्माण मलबा डंप करने वाले लोगों पर दिन-रात डिजिटल कैमरों और अत्याधुनिक सेंसरों की निगरानी रखी जाएगी। इतना ही नहीं, बारिश के मौसम में जलभराव की शिकायत करने वाले संवेदनशील इलाकों की भी रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। यानी अब सफाई व्यवस्था से लेकर जल निकासी तक, हर समस्या पर त्वरित कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
सेक्टर-34 में शुरू होगा अस्थायी सेंटर, सेक्टर-14 में बनेगा स्थायी हब
निगम प्रशासन ने परियोजना के पहले चरण के तहत सेक्टर-34 स्थित इन्फो सिटी-1 कार्यालय परिसर में अस्थायी आधार पर इस सेंटर को स्थापित करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। यहां आवश्यक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर सिस्टम, विशाल वीडियो वॉल और डाटा एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
इसके बाद जैसे ही सेक्टर-14 में निर्माणाधीन नगर निगम का नया भव्य मुख्यालय भवन तैयार होगा, इस पूरे सेटअप को वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा। नए मुख्यालय में इसे कहीं बड़े और अधिक सुविधासंपन्न स्वरूप में विकसित किया जाएगा, जहां यह स्थायी रूप से काम करेगा।
मलबा डंपिंग की समस्या से मिलेगी निजात
लंबे समय से नगर निगम के लिए सिरदर्द बनी इस समस्या का हल अब तकनीक से निकलने की उम्मीद है। शहर की सड़कों किनारे, खाली पड़े प्लॉटों और ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में रात के अंधेरे का फायदा उठाकर लोग बेधड़क निर्माण मलबा डालते हैं। निगम की टीमें बार-बार कार्रवाई करती हैं, लेकिन डंपर्स को पकड़ना मुश्किल होता रहा है।
नए कमांड सेंटर के चालू होने के बाद शहर के प्रमुख चौराहों, चिन्हित डंपिंग प्वाइंट्स और संवेदनशील हॉटस्पॉट्स पर लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फुटेज सीधे इस केंद्र की स्क्रीन पर दिखेगी। जैसे ही कोई वाहन खुले में कचरा या मलबा फेंकता कैद होगा, निगरानी करने वाली टीम तुरंत प्रवर्तन विंग को अलर्ट भेज देगी। मौके पर पहुंचते ही एंफोर्समेंट टीम दोषी वाहन चालक का चालान कर सकेगी।
गार्बेज वैन की जीपीएस ट्रैकिंग से बढ़ेगी जवाबदेही
इस प्रणाली की एक और खास बात है – डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों में लगी जीपीएस डिवाइस को भी सीधे कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा। इससे निगम अधिकारियों को पल-पल पता चलेगा कि किस वार्ड, किस गली में कूड़ा उठाने वाली गाड़ी पहुंची और किस इलाके में वह नहीं पहुंची। इससे न सिर्फ कर्मचारियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि नागरिकों की शिकायतों का निपटारा भी तेजी से होगा।
निजी एजेंसी संभालेगा तकनीकी संचालन
परियोजना के क्रियान्वयन और रोजमर्रा के तकनीकी संचालन के लिए निगम एक विशेषज्ञ निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने जा रहा है। यह एजेंसी सर्वर मेंटेनेंस, कैमरा फीड मॉनिटरिंग और डाटा विश्लेषण का काम देखेगी। वहीं नीतिगत निर्णय, चालान काटने और कानूनी कार्रवाई जैसे मामलों में निगम के अधिकारी ही अंतिम फैसला लेंगे। इस तरह सरकारी नियंत्रण और निजी तकनीकी दक्षता का संयुक्त मॉडल काम करेगा।
जीएमडीए मॉडल की देगी राह
गौरतलब है कि जीएमडीए ने पहले ही अपना आईसीसीसी संचालित कर शहर की ट्रैफिक, वाहन चोरी और सार्वजनिक सुरक्षा में तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल का उदाहरण पेश किया है। उसी सफलता को देखते हुए निगम भी अब नागरिक सेवाओं में इसी तरह का डिजिटल सुधार चाहता है। दोनों संस्थाओं के सेंटर्स के बीच तालमेल बनने पर गुरुग्राम वास्तव में ‘स्मार्ट सिटी’ की ओर बढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है।


























