गणेश चतुर्थी की धूम से पूरा महाराष्ट्र इन दिनों गूंज रहा है। बप्पा के आगमन की खुशी में कहीं ढोल-ताशे बाज रहे हैं, तो कहीं भव्य पंडाल सज रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र के नासिक शहर से आई एक खबर ने इस बार त्योहार की चर्चा को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
यहां की एक प्रतिष्ठित मिठाई की दुकान ने गणपति बप्पा के भोग के लिए एक ऐसा मोदक पेश किया है, जिसकी कीमत जानकर आम आदमी के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रति किलो पूरे 27 हजार रुपये वाले मोदक की। आइए जानते हैं इस अनोखे ‘स्वर्ण मोदक’ की पूरी कहानी।
24 कैरेट सोने से सजा है यह खास प्रसाद
नासिक स्थित सागर स्वीट्स नाम की मिठाई की दुकान ने इस गणेशोत्सव पर ‘स्वर्ण भस्म मोदक’ नाम से एक प्रीमियम मोदक लॉन्च किया है। इसकी सबसे बड़ी खूबी है इस पर चढ़ाई गई 24 कैरेट खाने योग्य सोने की परत। यह गोल्ड लीफ इस मोदक को न केवल शानदार और शाही रूप देती है, बल्कि इसे खाने में भी पूरी तरह सुरक्षित बनाती है। दुकान पर रोजाना सैकड़ों लोग केवल इसे देखने तक पहुंच रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें-वीडियो जमकर वायरल हो रही हैं।
महंगा क्यों है यह मोदक? जानें असली वजह
आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर इस मोदक में ऐसा क्या है जो इसकी कीमत को इतना ऊंचा बना देता है? आइए समझते हैं इसके पीछे छिपे कारण:
- प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल: आम मोदकों में जहां खोया या मावा होता है, वहीं इस विशेष मोदक को बनाने में सिर्फ बेहतरीन क्वालिटी के मेवे इस्तेमाल किए गए हैं। इसके अंदर महकते हुए पिस्ता, क्रीमी काजू, बादाम और अखरोट की समृद्ध फिलिंग भरी जाती है।
- असली कश्मीरी केसर की महक: मिठास के साथ-साथ इसमें शुद्ध कश्मीरी केसर और उच्च गुणवत्ता वाली इलायची का प्रयोग हुआ है। दुकानदार के अनुसार इसमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम रंग या हानिकारक कैमिकल नहीं मिलाया गया है।
- खाने योग्य शुद्ध सोना: 24 कैरेट गोल्ड लीफ सबसे महंगा हिस्सा है। यह सोना खाने के लिए सुरक्षित माना जाता है और प्राचीन भारतीय शाही दावतों की याद ताजा करता है।
एक-एक पीस की कीमत जानकर चौंक जाएंगे आप
दुकान के संचालक ने बताया कि एक मोदक का वजन करीब 30 से 40 ग्राम के बीच होता है। यानी अगर आप बप्पा के लिए सिर्फ एक या दो मोदक का डिब्बा लेना चाहें, तो आपकी जेब से करीब 800 से 1200 रुपये खर्च होंगे। हालांकि कीमत इतनी ज्यादा होने के बावजूद लोगों का उत्साह नहीं ठंडा पड़ा है। शहर के कई धनी परिवार और गणपति मंडल इस मोदक की 100 ग्राम या 250 ग्राम की बुकिंग करवा रहे हैं। डिमांड ज्यादा होने के चलते ग्राहकों को एडवांस ऑर्डर देना पड़ रहा है।
पारंपरिक मोदक से कितना अलग है यह ‘गोल्डन मोदक’?
आमतौर पर मोदक चावल के आटे, ताजे नारियल और गुड़ से तैयार किए जाते हैं, जिन्हें उकडीचे मोदक कहा जाता है। दूसरी ओर खोया मोदक दूध के मावे से बनते हैं। लेकिन यह स्वर्ण मोदक अपने स्वाद में किसी रिच ड्राई फ्रूट कैटरी से मिलता-जुलता है। मुंह में रखते ही यह आसानी से घुल जाता है और ऊपर से चमकते सोने के कारण यह देखने में किसी आभूषण जैसा लगता है।
भक्ति या दिखावा? लोगों में बंटा है मत
इस गोल्डन मोदक पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि भगवान गणेश की भक्ति का कोई दाम नहीं होता और श्रद्धा से चढ़ाया गया हर प्रसाद बराबर होता है। वहीं कुछ लोग इसे बर्बादी और दिखावे की पराकाष्ठा भी कहते हैं। वैसे भी कोई सादा दुर्वा और गुड़ का मोदक चढ़ाकर भी बप्पा को प्रसन्न किया जा सकता है। लेकिन जो लोग इसे खरीद रहे हैं, उनके लिए यह अपनी आस्था और समृद्धि को एक साथ व्यक्त करने का माध्यम है।

























