प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन हर साल 17 सितंबर को देशभर में मनाया जाता है। इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर से एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसने शहर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आमगोला स्थित कन्हाई मूर्ति भंडार में तैयार किया गया यह मिट्टी का गुल्लक प्रधानमंत्री की आकृति में बनाया गया है और यह इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पहली नजर में यह किसी छोटी प्रतिमा की तरह दिखता है, लेकिन इसके अंदर सिक्के और नोट जमा करने की जगह बनाई गई है। यानी यह सिर्फ एक सजावटी चीज नहीं, बल्कि बचत का भी एक अच्छा माध्यम है।
कारीगर की सोच में छिपी है बचत की प्रेरणा
इस अनोखे गुल्लक को तैयार करने वाले दुकानदार और कारीगर जयप्रकाश कुमार बताते हैं कि वह वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी के कामों को पसंद करते हैं। उनके मन में विचार आया कि क्यों न ऐसा उत्पाद बनाया जाए, जो देखने में खूबसूरत भी हो और काम का भी हो।
जयप्रकाश कहते हैं कि मेरा मकसद प्रधानमंत्री के प्रति श्रद्धा दिखाने के साथ-साथ लोगों को बचत के लिए प्रेरित करना भी है। अगर लोग रोजाना थोड़े-थोड़े पैसे इसमें डालें, तो कुछ समय बाद अच्छी खासी रकम तैयार हो जाएगी।
छह दिन की मेहनत से तैयार होता है एक गुल्लक
इस गुल्लक को बनाने में पूरी तरह आर्टिफिशियल सामग्री का इस्तेमाल नहीं हुआ है। यह शुद्ध मिट्टी से तैयार किया जाता है। कारीगर के मुताबिक एक गुल्लक को अंतिम रूप देने में करीब छह दिन लगते हैं। इस दौरान मिट्टी को आकार देना, चेहरे और शरीर की बारीकियों पर काम करना, उसे सुखाना और फिर अंतिम रूप देना शामिल है।
कारीगर का कहना है कि आज डिजिटल पेमेंट का दौर चल रहा है, लेकिन बच्चों में बचत की आदत डालने के लिए गुल्लक आज भी उतना ही अहम है, जितना पहले था।
कीमत और बचत क्षमता का पूरा हिसाब
यह गुल्लक दो आकारों में उपलब्ध है और दोनों की कीमत अलग-अलग है:
- ढाई फीट (बड़ा आकार): कीमत ₹1500, इसमें करीब 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं।
- डेढ़ फीट (छोटा आकार): कीमत ₹1200, इसमें लगभग 70 से 75 हजार रुपये की बचत हो सकती है।
हालांकि, असली बचत इस बात पर निर्भर करती है कि परिवार रोजाना कितनी रकम और कितने समय तक इसमें जमा करता है। लोग अपनी क्षमता के हिसाब से 10, 20, 50 या उससे ज्यादा रुपये रोज डाल सकते हैं।
जन्मदिन के आसपास बढ़ी खरीदारी
प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर इस गुल्लक की मांग में काफी इजाफा देखने को मिला है। खासतौर पर भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता और मोदी के समर्थक इसे खरीदने के लिए दुकान पर पहुंच रहे हैं। कई लोग इसे अपने घर के लिए तो कई अन्य इसे नेताओं और परिचितों को तोहफे के तौर पर देने के लिए ले जा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इसकी ख्याति सिर्फ मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं है। कारीगर का दावा है कि बनारस, कानपुर, खगड़िया और सीतामढ़ी जैसे शहरों से भी ग्राहक यहां तक आ चुके हैं। इससे न सिर्फ बिक्री बढ़ी है, बल्कि इस उत्पाद की चर्चा भी पूरे क्षेत्र में होने लगी है।
ग्राहकों को भी भा रहा है यह अनोखा गुल्लक
दुकान पर पहुंची ग्राहक सीता देवी कहती हैं, यह गुल्लक देखने में बहुत अच्छा लगता है। बच्चे भी इसकी तरफ आकर्षित होते हैं। आम गुल्लक से यह बिल्कुल अलग है, इसीलिए लोगों की दिलचस्पी ज्यादा है।
दुकान पर रोजाना देखने और खरीदने आने वालों की भीड़ यह साबित करती है कि यह प्रोडक्ट लोगों के जेहन में जगह बना चुका है।
पारंपरिक कला और आधुनिक जरूरत का बेहतरीन मेल
जयप्रकाश कुमार की यह पहल दिखाती है कि स्थानीय कारीगर किस तरह अपनी पारंपरिक कला के जरिए समाज को एक सकारात्मक संदेश दे सकते हैं। एक तरफ यह गुल्लक मिट्टी के काम को बढ़ावा देता है, दूसरी तरफ बचत की आदत को प्रोत्साहित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बना यह ‘मोदी गुल्लक’ अब सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर की कारीगरी का प्रतीक बन चुका है। आने वाले समय में इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है।

























