केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर दिए गए बयान ने बिहार की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा दी है। शाह ने साफ तौर पर कहा है कि 2029 तक देश के सभी 21 राज्यों में, जहां भाजपा या एनडीए की सरकार है, यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। इस ऐलान के बाद बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के अंदर ही मतभेद सामने आ गए हैं। वहीं महागठबंधन के दल बीजेपी को घेरने में लग गए हैं।
गृह मंत्री की घोषणा को लोजपा (आरवी) ने बताया स्वागत योग्य
भाजपा दशकों से यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत करती आ रही है, इसलिए अमित शाह के इस बयान को पार्टी के करीब माने जाने वाले दलों ने तुरंत समर्थन दे दिया। चिराग पासवान की लोजपा (आरवी) ने इस घोषणा का खुलकर स्वागत किया है। पार्टी प्रवक्ता विनीत सिंह का कहना है कि संविधान की भावना भी देशभर में एक समान कानून की ही बात कहती है, ऐसे में गृह मंत्री का यह कदम अत्यंत स्वागत योग्य है।
विनीत सिंह ने एक कदम आगे जाकर यह भी कहा कि इस कानून को केवल एनडीए शासित राज्यों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन राज्यों में भी लागू कराया जाए जहां विपक्ष की सरकारें हैं। उनके मुताबिक इससे देश में एकरूपता और समानता की भावना को बल मिलेगा।
बिहार में यूसीसी पर साफ इनकार
इसी बीच एनडीए के बड़े घटक जदयू ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी के दिग्गज नेता, विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने बिहार में यूसीसी लागू होने के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने याद दिलाया कि जब यह मुद्दा संसद में उठा था, तब जदयू ने समर्थन तो दिया था, लेकिन पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार ने उसी वक्त साफ कह दिया था कि बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा।
श्याम रजक ने आगे कहा कि आज भले ही बीजेपी के सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन यह सरकार एनडीए की ही है। उन्होंने बिना किसी संकोच के दोहराया कि बिहार में यूसीसी किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। गौरतलब है कि नीतीश कुमार इससे पहले भी कई मौकों पर यूसीसी के खिलाफ अपनी स्थिति रख चुके हैं।
राजद और कांग्रेस ने एनडीए पर साधा निशाना
महागठबंधन के घटक दल इस मौके पर बीजेपी और एनडीए को जमकर टारगेट कर रहे हैं। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बीजेपी के ऐलान का विरोध तो उनके अपने गठबंधन के साथी जदयू ने ही किया है, जो इस बयान की सच्चाई बयान कर देता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी बीजेपी के एजेंडे की राजनीति को आगे बढ़ाने का हथियार है। इससे सभी धर्मों के लोगों पर असर पड़ेगा और संविधान के साथ-साथ नागरिकों के संवैधानिक अधिकार कमजोर होंगे।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता असीतनाथ तिवारी ने अपनी बात कहने के लिए बिहार की मिट्टी से जुड़ा चटपटा उक्ति का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्य इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और वहां की जनता राहत और मदद के लिए तरस रही है।
ऐसे दौर में यूसीसी का राग अलापना “हसुआ के बियाह में खुरपी का गीत” गाने जैसा है। उन्होंने नेताओं से अपील की कि पहले जनता की सुख-सुविधा और मुसीबतों का ध्यान रखें, यूसीसी का ढोल पीटना बंद करें।
यूसीसी क्या है और क्यों रच रहा है सियासी तूफान?
यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों पर धर्म के आधार पर भेदभाव के बिना एक जैसा व्यक्तिगत कानून लागू हो। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सबके लिए एक समान नियम बनाए जाने की बात कही जाती है।
इसे संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के तहत जगह दी गई है। समर्थक इसे समानता की जीत मानते हैं, जबकि विरोधी इसे संविधानिक अधिकारों पर हमला बताते हैं। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने यूसीसी लागू किया है।


























