यूपी के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अब्दुल्लाह हॉल में 14 सितंबर को मेस और सफाई व्यवस्था को लेकर छात्राओं के बीच भारी तनाव और हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। छात्राओं ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई और विरोध जताते हुए नारेबाजी की।
इस दौरान उनके साथ प्रॉक्टर टीम के सदस्यों की धक्का-मुक्की की भी घटनाएं हुईं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यह घटना विश्वविद्यालय के मेस की गुणवत्ता, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं से संबंधित शिकायतों के कारण हुई है।
शिकायतों का आधार और छात्राओं का आरोप
छात्राओं ने मेस में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और व्यवस्था में लगातार आ रही खामियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और उल्टा उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है।
विरोध के दौरान छात्राओं ने जमकर नारेबाजी की और अपनी बात रखने का प्रयास किया। आरोप है कि जब वे प्रॉक्टर टीम के सदस्यों से बातचीत कर रही थीं, तो स्थिति बिगड़ गई और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। छात्राओं ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पिछले दिनों हुई बैठकें और व्यवस्थाओं पर स्थिति
जानकारी के अनुसार, पिछले 10 दिनों में छात्राओं के साथ भोजन और साफ-सफाई को लेकर तीन से चार बैठकें हो चुकी हैं। एएमयू के प्रॉक्टर प्रोफेसर नावेद खान ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें लगभग साढ़े सात बजे पता चला कि छात्राओं को भोजन से संबंधित कुछ मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि खाने की गुणवत्ता में सुधार के लिए विश्वविद्यालय प्रयासरत है।
वार्डन या प्रोवोस्ट ने भी बताया कि इन समस्याओं को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं और छात्रों की शिकायतों पर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय द्वारा 1400 रुपये में छात्राओं को भोजन उपलब्ध कराया जाता है, और इसमें अधिक गुणवत्ता की अपेक्षा करना उचित नहीं है, क्योंकि इस कीमत पर भी यदि कोई घाटा होता है, तो अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता।
मामले का संदर्भ और महंगाई का प्रभाव
प्रोफेसर खान ने कहा कि आज के महंगाई के दौर में 1400 रुपये में उच्च गुणवत्ता का भोजन देना कठिन है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पूरी कोशिश कर रहा है कि छात्रों को बेहतर सुविधा प्रदान की जाए, लेकिन सीमित बजट और फंड की कमी के कारण कुछ सीमाएं भी हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि यह पैसा छात्राओं का ही योगदान है और यह किसी भी तरह का फंड नहीं है। यदि छात्राओं को कोई समस्या है, तो उसे समाधान किया जाना चाहिए।
हाइजीन और आवारा जानवरों की समस्या
छात्राओं ने हाइजीन संबंधी भी गंभीर शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि हॉल में कई जगह से आए कुत्ते और बिल्लियां वहां की साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। इस मुद्दे को लेकर विश्वविद्यालय ने जिला प्रशासन से संपर्क किया है। जिला प्रशासन की टीम समय-समय पर कुत्तों को पकड़ने के अभियान चला रही है, लेकिन आवारा जानवरों की समस्या अभी भी बनी हुई है।
विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ सीनियर वुमन ऑफिसर्स (DSW) के अधिकारी और संबंधित प्रबंधन टीम छात्रों से सीधे संवाद कर रहा है। प्रॉक्टर का कहना है कि उनकी टीम हर संभव प्रयास कर रही है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाए और उन्हें बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जाए।


























