बिहार में लगातार हो रही भारी बाढ़ ने राज्य की जीवन व्यवस्था को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल लाखों लोगों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है बल्कि सरकार की राहत व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस संदर्भ में बिहार के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार और बिहार से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सरकार की निष्क्रियता और राहत प्रयासों की लापरवाही को लेकर कड़ी निंदा की है।
बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति
बिहार में बाढ़ का कहर पिछले कुछ दिनों से जारी है, जिसने राज्य के लगभग हर हिस्से को प्रभावित किया है। प्राकृतिक आपदा के कारण नदियों का जलस्तर अचानक से बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। बाढ़ के कारण घरों, खेतों और सड़कों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। राहत और बचाव कार्यों के बावजूद स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
राज्य में बाढ़ का प्रभाव इतना गहरा है कि करीब 45 लाख लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं और राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं। मृतकों की संख्या भी बढ़ती जा रही है, अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। इसके अलावा, हजारों करोड़ का आर्थिक नुकसान भी हुआ है, जिसमें फसलें, मकान और बुनियादी ढांचे का नुकसान शामिल है।
केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल
तेजस्वी यादव ने इस बाढ़ को लेकर केंद्र सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ की विकराल स्थिति के बावजूद केंद्र सरकार की तरफ से पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। उनके अनुसार, बिहार में कुल सात केंद्रीय मंत्री हैं, लेकिन इन सभी का रवैया निराशाजनक रहा है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर (अब एक्स) पर लिखा कि इन सात केंद्रीय मंत्रियों में से कोई भी बिहार की बाढ़ के लिए केंद्र सरकार से मदद कराने में सक्षम नहीं है। उन्होंने मंत्रालयों का हवाला देते हुए तंज कसा कि पहले बिहार के केंद्रीय मंत्रियों का रुतबा था, लेकिन अब वे सभी ‘फुस्स फुलझड़ी’ बनकर रह गए हैं। यह टिप्पणी बिहार के नेताओं की राजनीतिक भूमिका और केंद्र के साथ उनके संबंधों पर कटाक्ष है।
केंद्र में बिहार से 7 बेगैरत मंत्री है लेकिन एक की भी हैसियत नहीं कि बिहार की बाढ़ पर केंद्र सरकार से बिहार की कोई मदद करा सके। बिहार से केंद्र में एक भेड़-बकरी मंत्री है, एक कपड़ा मंत्री है, एक गेंहू-चावल मंत्री है, एक छोटा-मोटा कछु लघु मंत्री है, बाक़ी सब पिछलग्गू मंत्री है।… pic.twitter.com/Z2O6xwERMc
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) September 13, 2026
तेजस्वी यादव का दावा है कि बिहार के केंद्रीय मंत्रियों की निष्क्रियता से राज्य की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि इन मंत्रियों की निष्क्रियता के कारण बाढ़ पीड़ितों को जरूरी राहत और सहायता नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन दोनों नेताओं ने बाढ़ को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उनके अनुसार, बाढ़ की स्थिति को संभालने के लिए सरकार की तरफ से अभी तक कोई निर्णायक घोषणा नहीं की गई है और न ही पर्याप्त राहत पैकेज जारी किया गया है।
मांग और राहत प्रयास
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तेजस्वी यादव ने पहले भी केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिहार के बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल 5000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज मंजूर किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इस राशि से बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवश्यक राहत कार्य किए जा सकते हैं, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं और प्रभावित लोगों की मदद की जा सकती है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, जिससे पीड़ितों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राहत शिविरों में निरीक्षण और व्यवस्था की स्थिति
तेजस्वी यादव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत शिविरों का निरीक्षण भी किया है। उन्होंने इन शिविरों में रहने वाले लोगों की स्थिति का जायजा लिया और पाया कि वहां रह रहे लोग भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि राहत शिविरों में जरूरी सुविधाओं का अभाव है और प्रशासन की तरफ से कोई समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि बाढ़ पीड़ितों को राहत मिल सके और उनकी परेशानियों में कमी आए।
सरकार की जिम्मेदारी और जनता की अपेक्षा
बिहार में बाढ़ की आपदा के समय पर सरकार की भूमिका को लेकर व्यापक सवाल उठ रहे हैं। जनता की उम्मीदें हैं कि सरकार तत्काल प्रभाव से राहत कार्य शुरू करे, बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराए और प्रभावित लोगों को राहत का आश्वासन दे। तेजस्वी यादव का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर इस संकट का सामना करना चाहिए और बाढ़ पीड़ितों के हित में निर्णायक कदम उठाने चाहिए। उन्हें आशंका है कि यदि समय रहते प्रयास नहीं किए गए तो बाढ़ की विभीषिका और भी भयानक रूप ले सकती है।
बता दें कि यह कहा जा सकता है कि बिहार में बाढ़ का संकट एक बार फिर से सरकार की तत्परता और व्यवस्था की पोल खोल रहा है। तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का आलोचनात्मक दृष्टिकोण इस बात का संकेत है कि सरकार की प्राथमिकताएं और प्रयास इस वक्त जनता की उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं। जनता को उम्मीद है कि सरकार जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाएगी और इस प्राकृतिक आपदा से उबरने में मदद करेगी। बिहार की सरकार और केंद्र सरकार दोनों को मिलकर इस संकट का सामना करना चाहिए और प्रभावित लोगों की मदद करनी चाहिए, ताकि यह बाढ़ का संकट जल्द खत्म हो सके और लोग अपने जीवन में सुधार ला सकें।


























