सहारनपुर मस्जिद गिराए जाने पर मौलाना मदनी का बड़ा बयान

मौलाना मदनी ने यह भी आरोप लगाया कि इस मस्जिद का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण मौजूद है, जिसका नंबर 451 है। उन्होंने कहा कि इस स्थल की जमीन का स्वामित्व और उसके साथ जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज भी मौजूद हैं, जिनकी उचित कानूनी जांच आवश्यक थी।

मस्जिद गिराए जाने पर मौलाना अरशद मदनी का बड़ा बयान

HIGHLIGHTS

  • कानून सबके लिए है, फिर क्यों भेदभाव हो रहा है?
  • मस्जिद की विधिक मान्यता पर मौलाना मदनी का खुलासा
  • धार्मिक स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल, मस्जिद गिराने का मामला
  • सरकार से अपील, सभी धार्मिक स्थलों का समान सम्मान चाहिए

सहारनपुर के कलेक्ट्रेट क्षेत्र में बनी एक मस्जिद को बुलडोजर की कार्रवाई के बाद से राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में खासतौर पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और प्रसिद्ध दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल मौलाना अरशद मदनी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर गहरे आक्रोश और चिंता व्यक्त की है। मौलाना मदनी ने कहा कि यह घटना केवल एक धार्मिक स्थल को गिराने का मामला नहीं है, बल्कि यह संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और कानून के शासन से जुड़े गंभीर सवालों को भी जन्म देती है।

मस्जिद गिराए जाने का मामला और मौलाना अरशद मदनी की प्रतिक्रिया

दरअसल, सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में बनी इस मस्जिद को प्रशासन ने सुबह करीब पांच बजे बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद से ही राजनीतिक और धार्मिक समुदायों के बीच असंतोष फैल गया है। मौलाना अरशद मदनी ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि कानून को सबके लिए समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संविधान सभी नागरिकों और सभी धर्मों को समान अधिकार प्रदान करता है, तो फिर कानून लागू करने में भेदभाव क्यों किया जा रहा है।

मौलाना मदनी ने यह भी आरोप लगाया कि इस मस्जिद का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण मौजूद है, जिसका नंबर 451 है। उन्होंने कहा कि इस स्थल की जमीन का स्वामित्व और उसके साथ जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज भी मौजूद हैं, जिनकी उचित कानूनी जांच आवश्यक थी। उन्होंने यह भी कहा कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का पालन करना जरूरी है, और किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद में उसके ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के पालन पर सवाल

मौलाना मदनी का मानना है कि यदि प्रशासन का रवैया और कार्रवाई केवल अवैध कब्जा तोड़ने के लिए है, तो यह नियम सभी धर्मों और समुदायों के धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में सरकारी या सार्वजनिक जमीन पर वर्षों से धार्मिक निर्माण मौजूद हैं। यदि एक समुदाय के धार्मिक स्थल को विशेष सख्ती से ध्वस्त किया जाता है, तो इससे निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि मस्जिद की कमेटी ने अदालत में अपने पुराने दस्तावेज, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और जमीन के स्वामित्व का प्रमाण भी पेश किया था। इन सबके समर्थन में नगरपालिका और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड भी मौजूद हैं, जिन्हें अदालत में प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद, कार्रवाई के दौरान इन तथ्यों का ध्यान नहीं रखा गया।

कानूनी पहलुओं की समीक्षा जरूरी

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यदि किसी स्थल पर वर्षों से लगातार नमाज अदा की जा रही हो और पीढ़ी दर पीढ़ी लोग उसे धार्मिक स्थल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हों, तो उसकी पूरी कानूनी और ऐतिहासिक जांच करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा साझा देश है जहां सभी धर्मों के लोग रहते हैं। संविधान किसी नागरिक को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह सभी नागरिकों और धार्मिक स्थलों के साथ समानता का व्यवहार सुनिश्चित करे। सरकार और प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून का उपयोग किसी समुदाय के प्रति भेदभाव या पक्षपात के रूप में न हो। कानून की ताकत तभी साबित होगी जब उसका पालन सभी के लिए समान रूप से किया जाए।

मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि देश में धर्म के आधार पर भेदभाव अस्वीकार्य है। वह चाहते हैं कि सरकार और प्रशासन अपने कार्यों में निष्पक्षता और संवेदनशीलता का परिचय दें। यदि कानून का सही ढंग से पालन किया जाएगा, तो ही देश में धार्मिक सद्भाव और सामाजिक न्याय स्थापित हो सकेगा।

मौलाना अरशद मदनी ने इस पूरे मामले को लेकर कहा कि संविधान और कानून सभी के लिए हैं, और इन्हें लागू करने में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। धार्मिक स्थलों के विवाद में भी कानून के नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि सभी समुदायों को अपने धार्मिक अधिकारों का संरक्षण मिलना चाहिए, और सरकार को चाहिए कि वह इन अधिकारों का सम्मान करते हुए निष्पक्ष कदम उठाए।

Sandhya Samay News

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