अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे किसानों ने अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य द्वार पर मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे किसानों के साथ महिलाओं ने भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। इससे पहले प्रशासन ने किसानों के प्राधिकरण पहुंचने से रोकने के लिए जेसीबी, डंपरों और नाकेबंदी के जरिए कड़े बैरियर लगा दिए थे।
लेकिन किसानों ने इन सबको लांघते हुए प्राधिकरण पहुंचकर मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरने को असली ताकत तब मिली, जब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत मौके पर पहुंचे और किसानों के हौसले को बुलंद किया।
बैरियर्स और नाकेबंदी को लांघकर पहुंचे किसान
प्रशासन पहले से ही तैयार था। किसानों के प्राधिकरण क्षेत्र में प्रवेश को रोकने के लिए सड़कों पर भारी मशीनरी, जेसीबी, डंपर और बैरिकेडिंग की गई थी। हालांकि, यह अंदाजा प्रशासन को नहीं था कि किसान कितनी बड़ी संख्या में एक साथ उमड़ेंगे। महिला और पुरुष किसानों की भीड़ देखते ही देखते बैरियर्स को पार कर गई और सीधे प्राधिकरण के मुख्य द्वार पर पहुंच गई। वहां किसानों ने नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन आरंभ कर दिया।
टिकैत का आह्वान- संघर्ष ही किसान का एकमात्र रास्ता
धरने स्थल पर पहुंचे राकेश टिकैत ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक प्राधिकरण और शासन किसानों की मांगों पर गंभीरता से बात नहीं करेगा, तब तक किसान के पास संघर्ष से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह हक की लड़ाई है और इसे आखिरी दम तक लड़ा जाएगा। अपना हक छीनकर रहेंगे- यही किसानों का संकल्प अब और पक्का हो गया है।
टिकैत ने कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी न तो किसानों से मुलाकात के लिए तैयार होते हैं और न ही धरना देने देते हैं। ऐसी उदासीनता के आगे झुकना किसान की जरूरत नहीं, कमजोरी होगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, धरना जारी रखें और एकजुटता बनाए रखें।
64% भूमि और प्लॉट को लेकर गहरी नाराजगी
किसान नेता ने प्राधिकरण पर आरोप लगाया कि उसने किसानों को 64 प्रतिशत विकसित अबादी भूमि देने की बात कही थी, लेकिन जमीन पर इसे लागू नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, प्लॉट आवंटित करने का वादा भी अधर में लटका हुआ है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट, सेक्टर और औद्योगिक इकाइयां खड़ी हो गईं, लेकिन जिन किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन दी, उन्हें आज तक उचित हिस्सा नहीं मिला।
किसानों की प्रमुख मांगें
- प्राधिकरण द्वारा घोषित 64% विकसित अबादी भूमि किसानों को तत्काल दी जाए
- जिन किसानों को प्रॉमिस किए गए प्लॉट नहीं मिले, उन्हें शीघ्र आवंटित किए जाएं
- भू-अर्जन से प्रभावित किसानों और उनके परिवार को दी जाने वाली सुविधाओं की पूरी की जाए
- प्राधिकरण के अधिकारी किसान प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करें
- धरना प्रदर्शन पर कोई रोक न लगाई जाए और प्रशासनिक दमन बंद किया जाए
धरना तब तक जारी, जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं
राकेश टिकैत ने चेतावनी दी है कि यह आंदोलन किसी एक दिन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण या सरकार के सामने अब किसान झुकने वाले नहीं हैं। शासन-प्रशासन को किसानों की मांगें माननी ही होंगी। यदि बातचीत का रास्ता खोला गया तो समाधान संभव है, लेकिन अनदेखी की गई तो आंदोलन और बड़ा होगा।
धरने स्थल पर मौजूद किसानों का कहना है कि उन्होंने पीढ़ियों तक जोती-बोती जमीन दी है, इसलिए उनका यह हक बनता है कि विकास के फल में उनका भी उचित हिस्सा हो। महिला किसानों ने भी संकल्प लिया कि वे मर्दाना ढंग से इस लड़ाई में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेंगी।
प्रशासन पर अब दबाव, अगली रणनीति का इंतजार
किसानों की इस बड़ी हुंकार के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। धरने के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया, हालांकि किसी भी तनावपूर्ण स्थिति से बचा गया। किसान यूनियन के अनुसार, आने वाले दिनों में रणनीति पर बैठक होगी और यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
अब सवाल यह है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण किसानों की मांगों पर कब तक सकारात्मक पहल करता है। राकेश टिकैत के नेतृत्व में खड़े किसानों का संकल्प साफ है- बातचीत से समाधान हो या संघर्ष, हक की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।


























