उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए एक बड़ा अभियान अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार चल रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने नोएडा में स्कूल ऑडिट की शुरुआत की है, जिसके तहत यहां के स्कूलों की हालत और बच्चों को दी जा रही शिक्षा की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जाएगा।
पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास खुद नोएडा पहुंचे और उन्होंने बताया कि अभियान के तहत जिले के चुनिंदा स्कूलों का दौरा किया जाएगा। इन दौरों के दौरान स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, कक्षाओं का माहौल और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी व्यवस्थाओं का गहराई से अवलोकन किया जाएगा।
बेहतर जिलों में शुमार है नोएडा, उम्मीदें बड़ी
सौरभ दास ने अपने संबोधन में कहा कि नोएडा उत्तर प्रदेश के उन चुनिंदा जिलों में गिना जाता है जो विकास के मामले में सबसे आगे माने जाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर यही उम्मीद बनती है कि यहां के स्कूलों की हालत भी अच्छी होगी। उन्होंने कहा कि ऑडिट का मकसद किसी को बदनाम करना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना है।
उनके मुताबिक, ऑडिट के दौरान यह देखा जाएगा कि बच्चे आखिर किस तरह के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूलों में कक्षाएं कैसी हैं, शौचालयों की स्थिति क्या है, खेल के मैदान मौजूद हैं या नहीं, शिक्षकों की उपस्थिति कैसी रहती है—इन सब मसलों को ऑडिट रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा। सौरभ दास ने साफ शब्दों में कहा कि हालात जैसे भी निकलें, अभियान के जरिए उनकी असलियत लोगों के सामने रखी जाएगी, चाहे वह तस्वीर अच्छी हो या फिर चौंकाने वाली।
युवाओं से की यह अपील—बनें स्कूल ऑडिटर
सौरभ दास ने सिर्फ अपनी पार्टी तक सीमित न रहकर पूरे उत्तर प्रदेश के युवाओं से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवा अपने आसपास मौजूद स्कूलों का स्वयं ऑडिट करें और उसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाएं। उनके अनुसार, युवाओं की इस भागीदारी से स्कूलों की जमीनी स्थिति बेहतर तरीके से सामने आएगी, क्योंकि स्थानीय लोग ही अपने इलाके के स्कूलों की सबसे सही तस्वीर पेश कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब आम नागरिक और खासतौर पर युवा वर्ग शिक्षा जैसे मुद्दे पर आवाज उठाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जवाबदेही का दबाव बनता है। इससे न सिर्फ समस्याओं की पहचान होती है, बल्कि सुधार की राह भी आसान होती है।
15 अगस्त से चल रहा है अभियान
बता दें कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस से की गई थी। इसके बाद से अभियान के तहत अलग-अलग इलाकों में स्कूलों की स्थिति का सर्वे किया जाता रहा है। आजादी के पर्व से अभियान की शुरुआत को संगठन खास तौर पर मायने रखता है, क्योंकि उनका मानना है कि देश तभी सच में आजाद कहलाएगा जब हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।
सौरभ दास ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का दायरा सिर्फ नोएडा या फिर उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। यह एक बड़े सपने का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य पूरे देश को कवर करना है।
देशभर में फैलाने की तैयारी
कॉकरोच जनता पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक, संगठन चाहता है कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले ले। इसके लिए देशभर के युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूलों का ऑडिट करें और शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर लोगों के सामने रखें।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर युवा सक्रिय होकर बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। जब हर मोहल्ले, हर गांव और हर शहर में युवा स्कूलों की निगरानी करेंगे, तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार पर ही नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि समाज खुद भी इसमें हिस्सेदार बनेगा।
सवाल शिक्षा का, जवाबदेही की मांग
यह अभियान एक बड़े सवाल को जन्म देता है—क्या हमारे स्कूल वाकई उस स्तर के हैं जो रिपोर्टों और आंकड़ों में दिखाया जाता है? सरकारी दस्तावेजों में सुविधाओं के आंकड़े चाहे कुछ भी कहें, लेकिन कक्षा के अंदर की सच्चाई सिर्फ जमीन पर उतरकर ही पता चल सकती है। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान इसी सच्चाई को सामने लाने की कोशिश है।
आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि नोएडा स्कूल ऑडिट के नतीजे क्या सामने आते हैं और क्या यह अभियान वाकई पूरे देश में युवाओं को जोड़ने में कामयाब होता है। लेकिन एक बात तय है—शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाने और जवाबदेही तय करने की यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है।


























