चीन के इनर मंगोलिया से पुरातत्व जगत के लिए एक बेहद अहम खोज सामने आई है। यहां के ऑर्डोस शहर के झाइजिटा इलाके में खुदाई कर रहे आर्कियोलॉजिस्ट्स को लगभग 4300 साल पुराने एक मकबरे से मिट्टी से बनी ड्रैगन और फीनिक्स की मूर्तियां हाथ लगी हैं।
दोनों मूर्तियों को किसी कंकाल के दोनों ओर विशेष तरीके से रखा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तरी चीन में ड्रैगन और फीनिक्स का एक साथ मिलना अब तक का सबसे प्राचीन प्रमाण है। इस खोज ने चीनी सभ्यता, वहां के प्राचीन रीति-रिवाजों और आध्यात्मिक सोच को लेकर अब तक की मान्यताओं को ही बदल कर रख दिया है।
रेडियोकार्बन डेटिंग से खुली उम्र का राज
वैज्ञानिकों ने रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक से इस मकबरे की आयु का हिसाब लगाया, जिसके बाद साफ हुआ कि यह दफन स्थल लगभग 2300 ईसा पूर्व की लोंगशान संस्कृति के दौर का है। यानी आज से चार हजार से भी ज्यादा साल पहले इस क्षेत्र में इतनी विकसित सोच और संस्कार प्रणाली मौजूद थी।
मकबरे का ढांचा और दफनाने का तरीका
आयताकार (रेक्टेंगुलर) आकार के इस मकबरे में दफनाए गए व्यक्ति को पीठ के बल लिटाया गया था। उसके हाथ-पैर फैले हुए थे और सिर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखा गया था। यह दफन शैली बताती है कि उस दौर में मृत्यु के बाद की विदाई को लेकर कुछ खास नियम और मान्यताएं थीं, जिन्हें पूरी सख्ती से निभाया जाता था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कंकाल के दाईं ओर, सिर की सीध में मिट्टी का बना ड्रैगन रखा गया था, जबकि बाईं ओर फीनिक्स की मूर्ति ऊपर उड़ने की मुद्रा में दर्ज है। दोनों प्रतीकों का इस तरह संतुलित रूप से सजाया जाना दर्शाता है कि यह कोई साधारण दफन नहीं था, बल्कि गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक विश्वासों से जुड़ा अनुष्ठान था।
गर्दन के पास मिला फिरोजा जड़ा कीमती जेड डिस्क
इस खोज को और भी खास बनाने वाली चीज है कंकाल के साथ मिला एक जेड पत्थर का डिस्क। इस अनमोल डिस्क में फिरोजा रत्न जड़ा गया था और इसे मृतक की गर्दन के दाहिनी तरफ शरीर पर रखा गया था। चीनी संस्कृति में जेड पत्थर को सदियों से पवित्रता, शक्ति और कुलीनता का प्रतीक माना जाता रहा है। ऐसे कीमती वस्तु का मकबरे में मिलना साफ संकेत देता है कि दफनाया गया व्यक्ति कोई आम इंसान नहीं था।
दांतों की जांच से खुली मृतक की असलियत
सवाल उठा कि आखिर यह शख्स था कौन? इसका जवाब ढूंढने के लिए वैज्ञानिकों ने कंकाल के दांतों की आइसोटोप एनालिसिस की। इस जांच से पता चला कि यह व्यक्ति मुख्य रूप से बाजरे की खेती आधारित भोजन पर निर्भर था, जो उस दौर का आम भोजन था। लेकिन एक बड़ा अंतर सामने आया, उसके भोजन में जानवरों के मांस और खास तरह के प्रोटीन की मात्रा आम लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा पाई गई।
मकबरे में मिली अनमोल चीजों और इस भोजन विश्लेषण को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह शख्स अपने समाज में कोई बेहद शक्तिशाली और ऊंचे दर्जे का व्यक्ति रहा होगा। शायद यह कोई नेता, धर्मगुरु या कुलीन वर्ग का इंसान था, जिसे मौत के बाद पूरी भव्यता और विशेष अनुष्ठानों के साथ विदा किया गया।
लोंगशान सभ्यता के बारे में क्या है खास
पीली नदी के किनारे फैली लोंगशान सभ्यता प्राचीन चीन की सबसे महत्वपूर्ण सभ्यताओं में से एक मानी जाती है। अब तक की खोजों से पता चला था कि यह सभ्यता पत्थर से बने बड़े शहरों और मजबूत किलेबंदी के लिए जानी जाती थी। लेकिन यह नई खोज साबित करती है कि इस सभ्यता के लोग सिर्फ शहरी निर्माण में ही माहिर नहीं थे, बल्कि उनके यहां आत्मा, मृत्यु के बाद के जीवन और अंतिम संस्कार से जुड़ी अत्यंत विकसित आध्यात्मिक मान्यताएं भी विद्यमान थीं।
ड्रैगन-फीनिक्स का देश की संस्कृति में खास महत्व
चीनी संस्कृति में ड्रैगन को शक्ति, सम्मान और सम्राट का प्रतीक माना जाता है, वहीं फीनिक्स को सौभाग्य, सुंदरता और संतुलन का प्रतीक माना गया है। दोनों का साथ आना सद्भाव और समृद्धि का संकेत माना जाता है। इस मकबरे से 4300 साल पुराने दौर में इन दोनों प्रतीकों का एक साथ इस्तेमाल होना बताता है कि यह मान्यता अब तक सोचे गए समय से भी कहीं पुरानी है।


























