जाने राष्ट्रपति होते हुए भी ट्रंप अपनी मर्जी का पैसा क्यों नहीं खर्च कर सकते?

ट्रंप अकेले पैसा क्यों नहीं खर्च सकते?

US President Spending Power: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी पेंटागन ने कांग्रेस से लगभग 200 बिलियन डॉलर (लगभग 200 अरब डॉलर) के फंड की मांग की है। इस मांग ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: जब अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं, तो डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता अपनी मर्जी से सीधे पैसा खर्च क्यों नहीं कर सकते? आखिर उन्हें कांग्रेस के सामने हाथ क्यों फैलाने पड़ रहे हैं? इस सवाल का जवाब अमेरिकी संविधान की उस व्यवस्था में छिपा है, जो राष्ट्रपति को ‘खजाने की चाबी’ नहीं सौंपती। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और कानून:

किसके पास है ‘पर्स पावर’ (Purse Power) की ताकत?

अमेरिकी व्यवस्था में सरकारी पैसा खर्च करने की असली ताकत राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि कांग्रेस के पास होती है। संविधान के अनुच्छेद I के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय खजाने से तब तक कोई पैसा नहीं निकाला जा सकता, जब तक कि उसे कानून के तहत मंजूरी न मिल जाए। आसान शब्दों में, ‘पावर ऑफ द पर्स’ (Purse of the Purse) के सिद्धांत के मुताबिक, कांग्रेस की इजाजत के बिना राष्ट्रपति $1 भी खर्च नहीं कर सकता।

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‘चेक्स एंड बैलेंसेस’ का खेल

यह पूरी व्यवस्था ‘चेक्स एंड बैलेंसेस’ (Checks and Balances) के सिद्धांत पर काम करती है। अमेरिकी संविधान जानबूझकर ऐसा बनाया गया था ताकि सरकार की कोई भी एक शाखा बहुत ज्यादा शक्तिशाली न बन जाए। अगर खर्च करने का पूरा अधिकार राष्ट्रपति के पास होता, तो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग होने की आशंका बनी रहती। कांग्रेस को वित्तीय अधिकार देकर यह सुनिश्चित किया गया है कि हर बड़ा फैसला लोकतांत्रिक तरीके से लिया जाए।

राष्ट्रपति सिर्फ प्रस्ताव रख सकते हैं

व्यवहार में, राष्ट्रपति सरकार का मुखिया होने के नाते हर साल एक बजट प्रस्ताव (Budget Proposal) पेश करते हैं, जिसमें बताया जाता है कि पैसा कहां खर्च होना चाहिए। लेकिन, यह सिर्फ एक ‘इच्छा सूची’ (Wishlist) होती है। कांग्रेस के पास इस प्रस्ताव को मंजूर करने, उसमें बदलाव करने, रकम घटाने या फिर उसे पूरी तरह खारिज करने का अधिकार होता है।

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अगर कांग्रेस मना कर दे तो?

अगर कांग्रेस ट्रंप सरकार की ओर से मांगे गए इस 200 अरब डॉलर के पैकेज को ठुकरा देती है, तो राष्ट्रपति के पास उस खर्च को आगे बढ़ाने का कोई रास्ता नहीं होता। ऐसे में जरूरी सैन्य प्रोजेक्ट रुक सकते हैं या उनमें देरी हो सकती है।

1974 का ऐतिहासिक कानून

साल 1974 में लाए गए ‘इम्पाउंडमेंट कंट्रोल एक्ट’ (Impoundment Control Act) ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर और भी सख्त लगाम लगा दी। यह कानून तब बनाया गया था जब एक पूर्व राष्ट्रपति ने कांग्रेस द्वारा मंजूर किए गए फंड को खर्च करने से इनकार कर दिया था। इस कानून ने यह साफ कर दिया कि राष्ट्रपति कांग्रेस द्वारा मंजूर किए गए पैसे को रोक नहीं सकता और न ही उसे मंजूर उद्देश्य के अलावा किसी और काम के लिए इस्तेमाल कर सकता है।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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