Petrol History:मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर आज पूरी दुनिया की ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत में पेट्रोल के इतिहास को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ना स्वाभाविक है। आखिर देश में पेट्रोल पहली बार कब आया और इसे किन देशों से आयात किया जाता था? आइए इस दिलचस्प इतिहास को विस्तार से समझते हैं।
भारत में तेल की पहली खोज
भारत में पेट्रोलियम का इतिहास 19वीं सदी से जुड़ा हुआ है। साल 1889 में असम के डिगबोई में देश का पहला व्यावसायिक रूप से सफल तेल कुआं खोजा गया था। हालांकि, इसके संकेत इससे भी पहले 1866 में मिल चुके थे, लेकिन उस समय तकनीकी सीमाओं के कारण तेल का व्यावसायिक उत्पादन संभव नहीं हो पाया।
डिगबोई नाम के पीछे भी एक रोचक कहानी है। कहा जाता है कि ब्रिटिश इंजीनियरों ने रेलवे निर्माण के दौरान वहां तेल के संकेत देखे और मजदूरों से कहा—“डिग, बॉय, डिग” यानी “खोदते रहो।” इसी से इस स्थान का नाम डिगबोई पड़ गया।
एशिया की पहली रिफाइनरी
तेल की खोज के बाद भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। साल 1901 में असम ऑयल कंपनी ने डिगबोई में देश की पहली रिफाइनरी स्थापित की। यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया की पहली तेल रिफाइनरी थी। इसे भारत के हाइड्रोकार्बन उद्योग की शुरुआत माना जाता है।
पेट्रोल का आगमन और पहला पेट्रोल पंप
20वीं सदी की शुरुआत में जब डिगबोई में तेल को रिफाइन किया जाने लगा, तब भारत में पेट्रोल की उपलब्धता धीरे-धीरे बढ़ी। लेकिन आम जनता के लिए पेट्रोल की पहुंच 1928 में आसान हुई, जब मुंबई की लैमिंगटन रोड पर देश का पहला पेट्रोल पंप स्थापित किया गया। इसने भारत में ऑटोमोबाइल संस्कृति की नींव रखी।
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किन देशों से होता था पेट्रोल का आयात?
हालांकि भारत में तेल के भंडार मौजूद थे, फिर भी शुरुआती दौर में रिफाइनिंग क्षमता सीमित होने के कारण देश को पेट्रोल आयात करना पड़ता था। ब्रिटिश शासन के दौरान बर्मा ऑयल कंपनी और एशियाटिक पेट्रोलियम जैसी कंपनियां आयात और वितरण का काम संभालती थीं।
उस समय भारत मुख्य रूप से इराक, ईरान, सऊदी अरब और म्यांमार (तब बर्मा) से पेट्रोल आयात करता था। ये देश तेल के बड़े उत्पादक थे और भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।




















