Devastating Earthquake: रूस के कमचटका प्रायद्वीप में 29 जुलाई 2025 की शाम के लिए किसी कयामत से कम नहीं थी। जब समुद्र की गहराई में दशकों से बन रहा टेक्टोनिक दबाव अचानक रिलीज हुआ और 8.8 तीव्रता का भयंकर भूकंप आया। इस भूकंप ने सिर्फ जमीन नहीं हिलाई, बल्कि पूरे प्रशांत महासागर के पानी को ऊपर की तरफ धकेल दिया। नतीजा था 55 फीट (17 मीटर) ऊंची सुनामी की लहरें, जो हवाई जहाज की रफ्तार से समुद्र में दौड़ने लगीं।
लेकिन इस तबाही के बीच विज्ञान के लिए एक ऐसी खोद हुई है, जो भविष्य में लाखों जानें बचाने का काम करेगी। नासा और फ्रांस की स्पेस एजेंसी की ‘सरफेस वॉटर एंड ओशन टोपोग्राफी’ (SWOT) सैटेलाइट ने सुनामी की ‘पैदाइश’ को लाइव कैप्चर कर ऐसा ‘जादुई डेटा’ इकट्ठा किया है, जिसके बाद सुनामी की पूर्व चेतावनी देना पहले से कहीं ज्यादा सटीक हो जाएगा।
सैटेलाइट ने कैसे किया सुनामी का ‘एक्स-रे’?
सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर इग्नासियो सेपुलवेडा और उनकी टीम की इस अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। भूकंप आने के ठीक 70 मिनट बाद SWOT सैटेलाइट भूकंप के केंद्र से करीब 600 किलोमीटर ऊपर से गुजरा। इस दौरान इसने सुनामी की शुरुआती लहरों और उनके पीछे चलने वाली छोटी लहरों की हाई-डेफिनिशन (High-definition) तस्वीरें लीं।
जब वैज्ञानिकों ने इन तस्वीरों का मिलान पुराने सुनामी मॉडल से किया, तो बड़ा खुलासा हुआ। पुराने मॉडल उन छोटी लहरों को दिखा ही नहीं पा रहे थे, जिन्हें सैटेलाइट ने कैप्चर किया। साइंस की भाषा में इन्हें ‘डिस्पर्सिव वेव्स’ (Dispersive Waves) कहा जाता है।
डार्ट बुआए से बेहतर कैसे है SWOT?
आमतौर पर सुनामी की निगरानी के लिए समुद्र में लगे ‘डार्ट (DART) बुआए’ पर निर्भर रहना पड़ता है। इनकी सबसे बड़ी कमी यह है कि ये सिर्फ एक पॉइंट (बिंदु) की जानकारी देते हैं, जिससे सुनामी के पूरे स्ट्रक्चर को समझना नामुमकिन होता है। खासकर गहरे समुद्री ट्रेंच (खाइयों) के पास सेंसर्स की कमी होती है।
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पुराने मॉडल हुए बेकार, नई तकनीक ने बदले नियम
कमचटका की घटना ने वैज्ञानिकों को पुराने ‘लॉन्ग वेव मॉडल’ को त्यागने पर मजबूर कर दिया है। अब ‘बूसिनेस्क टाइप मॉडल’ (Boussinesq-type model) का इस्तेमाल किया जाएगा। रिसर्च से साबित हुआ है कि ये छोटी ‘डिस्पर्सिव लहरें’ भूकंप के केंद्र और उसकी गहराई की सटीक जानकारी देती हैं। अब वैज्ञानिकों को यह जानने में आसानी होगा कि समुद्र के नीचे प्लेट्स में कितनी हलचल हुई और तट पर इसका असर कितना भयानक होगा।
भविष्य में कैसे बचेंगी लाखों जानें?
इस नई रिसर्च का सबसे बड़ा फायदा सुनामी की भविष्यवाणी करने वाले सिस्टम्स को मिलेगा। 2D डेटा और नए मॉडल की मदद से अब वैज्ञानिक लहरों की ऊंचाई और उनके तट पर पहुंचने के सटीक समय का अंदाजा लगा सकेंगे। इससे तटीय इलाकों को खाली कराने के लिए मिलने वाला समय काफी बढ़ जाएगा।
रिसर्चर इग्नासियो सेपुलवेडा के शब्दों में, “सैटेलाइट टेक्नोलॉजी ने हमें एक नया चश्मा दे दिया है। अब हम समुद्र के उन कोनों में भी झांक सकते हैं जहां पहले कभी कोई नहीं पहुंच पाया था।” यही यह ‘जादुई डेटा’ आने वाले समय में समुद्र से उठने वाली मौत की तबाही को रोकने की पहली कड़ी साबित होगा।



















