समंदर में सीमा, कानून और संघर्ष: पूरी कहानी एक नजर में

पानी पर सरहदें: कैसे तय होती हैं देशों की समुद्री सीमाएं?
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The ‘Boss’ of Maritime Borders: दुनिया का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका है, लेकिन इस विशाल समंदर पर ‘किसका राज’ होगा, यह तय करना हमेशा से वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा सवाल रहा है। हाल ही में ईरान द्वारा समुद्री रास्तों (विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य) पर गुजरने वाले जहाजों से ‘टैक्स’ वसूलने की चर्चाओं ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।

जिस तरह जमीन पर सरहदें होती हैं, वैसे ही पानी पर भी देशों के अधिकार क्षेत्र बंटे हुए हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये समुद्री सीमाएं तय कौन करता है? क्या कोई देश समुद्र के बीचों-बीच टैक्स लगा सकता है? इसे समझने के लिए समुद्री कानूनों और ‘नॉटिकल मील’ के उस गणित को समझना होगा, जो किसी देश की समुद्री ताकत और उसकी सीमा तय करता है।

समुद्र का ‘संविधान’ है UNCLOS

दुनिया भर में समुद्र के उपयोग और सीमाओं को लेकर जो नियम चलते हैं, उन्हें यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) कहा जाता है। साल 1982 में बने इस समझौते को समुद्र का ‘अंतरराष्ट्रीय संविधान’ माना जाता है। इसी के तहत तय होता है कि कौन सा देश कितनी दूरी तक मछली पकड़ सकता है, तेल निकाल सकता है या जहाजों से टैक्स वसूल सकता है।

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हालांकि, ईरान जैसे कुछ देशों ने इस पर हस्ताक्षर तो किए, लेकिन संसदीय मंजूरी (रैटिफिकेशन) नहीं दी, जिस कारण वे अक्सर इन नियमों की अपने हिसाब से व्याख्या करते हैं।

समुद्री सीमा कैसे बंटी है? (जानें नॉटिकल मील का गणित)

किसी भी देश की समुद्री सीमा का निर्धारण उसकी तटरेखा (Coastline) से शुरू होता है। यहां ‘नॉटिकल मील’ (Nautical Mile) का इस्तेमाल किया जाता है, जो सामान्य किलोमीटर से अलग होता है (1 नॉटिकल मील = 1.852 किलोमीटर):

1. प्रादेशिक जल (Territorial Sea) – 12 नॉटिकल मील (लगभग 22.22 किमी)

यह सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस 12 मील के दायरे में देश की पूरी ‘संप्रभुता’ (Sovereignty) होती है। यहां देश के कानून बिल्कुल वैसे ही लागू होते हैं, जैसे जमीन पर। रक्षा, सुरक्षा और पुलिसिंग का पूरा अधिकार उस देश को होता है।

ईरान विवाद का असल मुद्दा (इनोसेंट पैसेज): समुद्री कानून में ‘इनोसेंट पैसेज’ (Innocent Passage) का नियम है। इसके तहत किसी भी देश के 12 मील के प्रादेशिक जल से विदेशी जहाज बिना रुके और शांतिपूर्ण तरीके से गुजर सकते हैं, बशर्ते वे देश की सुरक्षा को नुकसान न पहुंचाएं। ईरान का विवाद इसीलिए बढ़ता है क्योंकि वह इस ‘इनोसेंट पैसेज’ को रोककर कमर्शियल जहाजों पर शुल्क लगाने की कोशिश करता है, जो UNCLOS के खिलाफ है।

2. संलग्न क्षेत्र (Contiguous Zone) – 24 नॉटिकल मील (लगभग 44.44 किमी)

12 मील के बाद अगला पड़ाव 24 मील तक का होता है। इस क्षेत्र में देश की संप्रभुता नहीं होती, लेकिन उसे सीमा शुल्क (Customs), तस्करी रोकने, आप्रवासन (Immigration) और प्रदूषण नियंत्रण जैसे कानूनों को लागू करने का अधिकार मिलता है। अगर कोई जहाज 12 मील में अपराध करके भागे, तो देश की नौसेना इस 24 मील के दायरे तक उसे पकड़ सकती है।

3. विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) – 200 नॉटिकल मील (लगभग 370 किमी)

समुद्र में सबसे बड़ा आर्थिक अधिकार क्षेत्र ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन’ (EEZ) होता है। यह तट से 200 नॉटिकल मील तक फैला होता है। इस विशाल क्षेत्र में केवल उस देश को ही समुद्र से बिजली बनाने, प्राकृतिक गैस, खनिज निकालने और मछली पकड़ने का एकमात्र अधिकार होता है। दूसरे देशों के जहाज यहां से गुजर सकते हैं, लेकिन यहां के संसाधनों का जरा भी दोहन नहीं कर सकते।
*भारत के संदर्भ में:* भारत की 7,516.6 किलोमीटर लंबी तटरेखा है, जिसकी वजह से भारत का EEZ क्षेत्र सामरिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम है।

4. अंतर्राष्ट्रीय जल (High Seas) – 200 मील के बाद

200 नॉटिकल मील (EEZ) खत्म होने के बाद जो अनंत समुद्र शुरू होता है, उसे ‘हाई सी’ कहते हैं। यह पूरी दुनिया का है। यहां किसी एक देश का मालिकाना हक नहीं होता। सभी देशों को यहां नौवहन, विमान उड़ाने, शोध करने और केबल बिछाने की पूरी आजादी है।

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फिर होर्मुज जैसे जलडमरूमध्य में विवाद क्यों?

जहां तक सैद्धांतिक बात है, हाई सी में कोई टैक्स नहीं लग सकता। लेकिन जब बात होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संकरे रास्तों की आती है, तो चुनौती बढ़ जाती है। यहां ईरान और ओमान जैसे देशों की 12-12 मील की सीमाएं इतनी करीब आ जाती हैं कि बीच में ‘इनोसेंट पैसेज’ के लिए बेहद नक्काशीदार रास्ता बचता है। ऐसे चोक पॉइंट्स (Choke Points) पर सैन्य और भू-राजनीतिक तनाव के चलते कई बार अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ने लगती हैं और वैश्विक व्यापार दांव पर लग जाता है।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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