Water Wastage: धरती पर लगभग 71 फीसदी हिस्सा पानी से घिरा होने के बावजूद, इंसानी जरूरतों के लिए उपलब्ध मीठे पानी की मात्रा मात्र 3 फीसदी है। बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग और उसके अंधाधुंध दोहन ने भविष्य में एक गंभीर जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दुनिया के उन देशों का खुलासा किया गया है, जो पानी खर्च करने के मामले में सबसे आगे हैं।
भारत नंबर-1 पर, लेकिन क्यों?
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कुल पानी की सालाना निकासी के मामले में भारत शीर्ष पर है। भारत हर साल लगभग 761 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी खर्च करता है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, जिसका सबसे बड़ा कारण देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि होना है। यहां सिंचाई के लिए पानी का सबसे बड़ा हिस्सा इस्तेमाल होता है। पुराने तरीके की खेती और विशाल आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन भारत को इस लिस्ट में सबसे ऊपर रखता है।
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चीन और अमेरिका की स्थिति
बता दें कि इस सूची में चीन दूसरे स्थान पर है, जहां विशाल आबादी और औद्योगिक विकास के लिए सालाना करीब 581 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होती है। वहीं, अमेरिका तीसरे नंबर पर है, जो सालाना 444 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी खर्च करता है। हालांकि, कुल खपत में अमेरिका भारत और चीन से पीछे है, लेकिन ‘प्रति व्यक्ति खर्च’ के मामले में वह दुनिया में सबसे आगे है। अमेरिका में एक व्यक्ति सालभर में औसतन 1,301 क्यूबिक मीटर पानी इस्तेमाल करता है, जो एक चिंताजनक आंकड़ा है।
अन्य देशों की स्थिति
- इंडोनेशिया: चारों तरफ समुद्र से घिरा होने के बावजूद यह देश मीठे पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां सालभर में करीब 223 बिलियन क्यूबिक मीटर ताजे पानी की खपत होती है।
- पाकिस्तान: यह देश इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर है। यहां हर साल लगभग 183.4 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी का इस्तेमाल होता है और प्रति व्यक्ति सालाना औसत खर्च 753 क्यूबिक मीटर है।
- ईरान: ईरान की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक मानी गई है। युद्ध और सूखे से जूझ रहे ईरान में प्रति व्यक्ति सालाना पानी का खर्च 1,042 क्यूबिक मीटर है। यहां भूजल स्तर गिरने के कारण जमीन धंसने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
- मेक्सिको: सूची में सातवें नंबर पर मेक्सिको है, जो हर साल करीब*89.8 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी का उपयोग करता है।
विष्य की चुनौती
बता दें कि ये आंकड़े न केवल दुनिया भर में पानी के बढ़ते दबाव को दर्शाते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाले जल संकट की ओर भी इशारा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल प्रबंधन को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहराएगा।




















