इस जाति में सबसे ज्यादा हो रही हैं इंटर-कास्ट मैरिज, जानें क्या है पूरा सच

Inter Caste Marriage: सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, आयंगर/अय्यर समुदाय ने जाति की सीमाओं को सबसे ज्यादा पार किया है। इस समुदाय में लगभग 12% परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपनी जाति से बाहर शादी की है। यह आंकड़ा राज्य में सबसे ज्यादा है।

तेलंगाना सर्वेक्षण ने उजागर किया समाज का दोहरा चेहरा

HIGHLIGHTS

  • होश उड़ा देंगे तेलंगाना के आंकड़े
  • इस जाति में सबसे ज्यादा हो रही हैं इंटर-कास्ट मैरिज!
  • तेलंगाना में 12% ब्राह्मण परिवारों ने की अंतर्जातीय शादी
  • तेलंगाना में इंटर-कास्ट मैरिज का बढ़ता चलन, ये जातियां हैं आगे
  • शहरों में 'लव', गांवों में 'रिवाज'

Inter Caste Marriage:तेलंगाना में हाल ही में किए गए एक जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण ने राज्य की सामाजिक बनावट की एक ऐसी तस्वीर पेश की है जिसे देखकर आपके होश उड़ सकते हैं। बी सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा किए गए इस विश्लेषण से साफ है कि शहरीकरण और शिक्षा ने जातिवाद की पुरानी दीवारों को काफी हद तक तोड़ दिया है। सर्वेक्षण के निष्कर्षों से अंतर-जातीय विवाह (Inter-caste Marriage) को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आइए जानते हैं कैसे तेलंगाना के समाज में धीरे-धीरे बदलाव की हवा बह रही है:

अय्यर समुदाय ने मारी बाजी, 12% परिवारों ने की इंटर-कास्ट शादी

सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, आयंगर/अय्यर समुदाय ने जाति की सीमाओं को सबसे ज्यादा पार किया है। इस समुदाय में लगभग 12% परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपनी जाति से बाहर शादी की है। यह आंकड़ा राज्य में सबसे ज्यादा है।

दलित ईसाई और राजू समुदाय भी पीछे नहीं

अगर लिस्ट में आगे बढ़ें तो दूसरे नंबर पर दलित ईसाई समुदाय आता है। इस समुदाय में लगभग 9.9% लोगों ने अंतर्जातीय विवाह को अपनाया है। इसके बाद तीसरे नंबर पर राजू बिरादरी है, जहां इंटर-कास्ट मैरिज का आंकड़ा 8.7% दर्ज किया गया है।

आखिर ये बदलाव क्यों आया? (पीछे की असली वजहें)

1. शहरीकरण सबसे बड़ा कारण:

आंकड़े बताते हैं कि जिन समुदायों की आबादी शहरों में ज्यादा बसी हुई है, उनमें इंटर-कास्ट मैरिज को स्वीकार करने की प्रवृत्ति काफी ज्यादा है। तेलंगाना में ब्राह्मण (अय्यर) आबादी का एक बड़ा हिस्सा शहरी क्षेत्रों में रहता है। शहरी माहौल में सामाजिक रुकावटें कम होती हैं और लोगों को अलग-अलग समूहों और जातियों के लोगों के साथ मिलने-जुलने के ज्यादा अवसर मिलते हैं, जिससे रिश्ते आगे बढ़ते हैं।

2. शिक्षा और पेशेवर माहौल:

उच्च शिक्षा का स्तर इस बदलाव की रीढ़ की हड्डी साबित हुआ है। आयंगर/अय्यर जैसे समुदाय पारंपरिक रूप से शिक्षा पर बहुत जोर देते हैं। कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज और कॉर्पोरेट ऑफिसेस में लोगों का एक दूसरे के साथ आना-जाना बढ़ता है, जिससे जाति से परे लोग अपना जीवनसाथी चुनते हैं।

कहां हैं परंपरा के पक्षधर? (इन जातियों में नहीं हो रही बदलाव की बौछार)

वहीं, अगर हम राज्य के ग्रामीण और कृषि आधारित समुदायों की बात करें, तो वहां की तस्वीर उलट है।

  • रेड्डी और वेलामा समुदाय: ये पारंपरिक रूप से कृषि से जुड़े समुदाय हैं। इनमें अंतर-जातीय विवाहों की दर राज्य के औसत से भी कम है। गांवों में मजबूत सामाजिक बंधन और ‘पारंपरिक प्रतिष्ठा’ को बनाए रखने की चिंता इसका मुख्य कारण है।
  • आदिवासी और पिछड़े वर्ग: कोलम (एसटी), गोंड (एसटी) और माली (बीसी) जैसे समुदायों में इंटर-कास्ट मैरिज की दर बेहद कम है। इन समुदायों का शहरी माहौल से कम जुड़ाव और अपनी पुश्तैनी रीति-रिवाजों व सामाजिक नियमों का कड़ाई से पालन इसकी बड़ी वजह है।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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