दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव 2026 के दौरान विवाद और हिंसा की खबरें लगातार सुर्खियों में हैं। हंसराज कॉलेज के बाहर ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच हुई भिड़ंत ने राजनीतिक संगठनों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
वहीं, इवनिंग शिफ्ट के मतदान केंद्र LC-1 में फर्जी ID से वोटिंग का प्रयास भी सामने आया है, जिसने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस लेख में हम इन घटनाओं का विस्तृत विश्लेषण, जांच की स्थिति, और आगामी कदमों पर चर्चा करेंगे।
हंसराज कॉलेज में ABVP और NSUI के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प
डूसू 2026 के चुनाव के दौरान हंसराज कॉलेज के बाहर दोनों प्रमुख छात्रसंघ संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी और हिंसक झड़प देखने को मिली। यह घटना चुनावी रैलियों और प्रदर्शन के दौरान हुई, जहाँ दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन और नारेबाजी कर रहे थे। अचानक ही दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पुलिस को तत्काल मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को अलग करना पड़ा, ताकि हिंसा फैलने से रोका जा सके। इस घटना से कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल बना रहा और सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है।
ABVP ने NSUI पर लगाए गंभीर आरोप
इस भिड़ंत के बाद ABVP ने NSUI पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि NSUI निजी गुंडों और असामाजिक तत्वों को दिल्ली यूनिवर्सिटी में लाकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहा है। ABVP के मुताबिक, ये तत्व छात्रों के बीच हिंसा और गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि NSUI इन असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल चुनावी माहौल को बिगड़ने के लिए कर रहा है।
इसके अलावा, ABVP ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और मतदान के दौरान धांधली की भी आशंका जताई है। दोनों संगठनों के बीच पहले भी ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनमें एक-दूसरे पर गड़बड़ी और हिंसा के आरोप लगे हैं। इस विवाद को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और मामला जांच के दायरे में है।
LC-1 में फर्जी ID से वोटिंग का प्रयास
इसी बीच, दिल्ली यूनिवर्सिटी के LC-1 (लॉ सेंटर-1) में मतदान के दौरान एक छात्रा को फर्जी ID कार्ड के साथ वोट डालने का प्रयास करते हुए पकड़ा गया। यह घटना मतदान के दौरान हुई, जब सुरक्षा कर्मचारियों को सूचना मिली कि एक छात्रा फर्जी पहचानपत्र का उपयोग कर वोटिंग कर रही है। छात्रा को हिरासत में लेकर उसकी जांच की गई, जिसमें उसने स्वीकार किया कि वह NSUI से संबंधित है और उसने 100 से अधिक फर्जी ID कार्ड बनाए हैं।
यह खुलासा चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फर्जी ID कार्ड का इस्तेमाल कर वोटिंग का प्रयास चुनावी धोखाधड़ी का बड़ा मामला बन सकता है, जो मतदान प्रक्रिया की स्वतंत्रता और सत्यता को प्रभावित कर सकता है।
फर्जी ID कार्ड का खुलासा और इसकी गंभीरता
छात्रा से पूछताछ में पता चला है कि उसने अपने साथी छात्रों के साथ मिलकर 100 से ज्यादा फर्जी ID कार्ड बनाए हैं। यह संख्या चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और प्रामाणिकता के लिए खतरा है। सुरक्षा अधिकारियों ने यह भी पाया कि कुछ छात्राएं फर्जी ID के साथ मतदान केंद्र पर पहुंची थीं, जिनमें से एक छात्रा को हिरासत में लिया गया है, जबकि दो भाग निकलने में सफल रहीं।
इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया में धांधली और धोखाधड़ी का संदेह पैदा कर दिया है। यह मामला अब जांच एजेंसियों के ध्यान में है, जो फर्जी ID कार्ड बनाने वालों और उन्हें मतदान में इस्तेमाल करने वालों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। यदि ये मामले साबित हो जाते हैं, तो चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा संकट आ सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था और कार्रवाई
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। चुनाव के दौरान, कॉलेजों और मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा इन फर्जी ID के जरिए मतदान को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं।
इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया है। गिरफ्तार छात्राओं और संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही, मतदान प्रक्रिया को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है।


























