टेंट, बैंक्वेट हॉल, फार्म हाउस, कैटरिंग और वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों ने आगामी महाधिवेशन से पहले शुक्रवार को नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में अपनी मुख्य मांगे केंद्र और प्रदेश सरकार के समक्ष रखीं।
इस प्रेस वार्ता का उद्देश्य उद्योग को उद्योग का दर्जा दिलवाना, GST में राहत, रियायती भूखंड एवं व्यवसायिक सुविधाओं का विस्तार करना था। इन मांगों का उद्देश्य इस क्षेत्र को व्यावसायिक तौर पर सशक्त बनाना और उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करना है।
टेंट-बैंक्वेट उद्योग का महत्त्व और भूमिका
टेंट, बैंक्वेट हॉल, फार्म हाउस, कैटरिंग और वेडिंग इंडस्ट्री देशभर में लाखों लोगों के रोजगार का स्रोत हैं। यह उद्योग सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों का अभिन्न हिस्सा है।
वर्तमान में, यह क्षेत्र लाखों परिवारों के जीवन यापन का प्रमुख माध्यम है, बावजूद इसके इसे अभी तक औद्योगिक दर्जा नहीं मिला है। उद्योग के प्रतिनिधि बताते हैं कि यदि इस क्षेत्र को औद्योगिक दर्जा प्राप्त हो जाए, तो इससे न सिर्फ उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि रोजगार सृजन में भी वृद्धि होगी।
मुख्य मांगें एवं प्रस्ताव
1. उद्योग का दर्जा और औद्योगिक मान्यता: टेंट-बैंक्वेट कारोबारियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार से इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की मांग की है, ताकि व्यवसायिक संचालन में आसानी हो सके। इससे संबंधित नियमों में छूट और कर नियामक ढांचे में सुधार संभव हो सकेगा।
2. GST में राहत और कर संरचना: मांग की गई है कि सेवा प्रदाताओं के लिए GST पंजीकरण की सीमा सामान्य राज्यों में 20 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये और विशेष राज्यों में 10 लाख से 25 लाख रुपये की जाए। इसके अलावा, कंपोजिशन स्कीम की सीमा 50 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की जानी चाहिए।
कर दर को वर्तमान 6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी शामिल है। वेडिंग सेवाओं पर वर्तमान 18 प्रतिशत GST को तर्कसंगत बनाने के लिए 5 प्रतिशत बिना ITC या 18 प्रतिशत ITC सहित विकल्प प्रस्तुत करने का सुझाव दिया गया है।
3. वाहनों और व्यवसायिक क्षेत्र की सुविधाएं: टेंट का सामान ले जाने वाले वाहनों को नो-एंट्री से मुक्त करने, साथ ही बैंक्वेट हॉल और फार्म हाउस को सराय एक्ट के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई है। यह इसलिए ताकि व्यवसायिक गतिविधियों में बाधा न आए और संचालन आसान हो सके।
4. भूखंड और व्यवसायिक सुविधाएं: अधिकारियों ने नए विकसित क्षेत्रों में रियायती दरों पर भूखंड उपलब्ध कराने और यूपीएसआईडीसी के प्लॉटों को फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही, ‘टेंट नगर’ का विकास कर व्यवसायियों को विशेष क्षेत्र में सुविधाजनक स्थान प्रदान करने का सुझाव दिया गया है।
5. ई-वे बिल और परिवहन व्यवस्था: उद्योग प्रतिनिधियों ने ई-वे बिल की व्यवस्था में व्यावहारिक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका तर्क है कि टेंट का सामान अक्सर बिक्री के लिए नहीं, बल्कि कार्यक्रमों में इस्तेमाल के लिए स्थानांतरण किया जाता है, इसलिए वर्तमान ई-वे बिल व्यवस्था में कठिनाइयां आती हैं।
6. विधिक एवं नियामक सुधार: सरकारी विभागों से भुगतान प्राप्त होने के बाद GST जमा करने की व्यवस्था, दूसरे राज्यों में काम करने पर ITC की समस्या का समाधान और वेडिंग इंडस्ट्री को विधिवत उद्योग का दर्जा दिलाने का आग्रह किया गया है।
प्रतिनिधियों की भागीदारी और संगठन
प्रेस वार्ता में संगठन के अध्यक्ष अशोक चावला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण शर्मा, महामंत्री अभिलेश वर्मा, कोषाध्यक्ष महेश गुप्ता, संयुक्त महामंत्री मुकेश त्यागी, उपाध्यक्ष मुकेश सिंगल, युवा कोषाध्यक्ष पश्चिम क्षेत्र विनोद पाल, नोएडा अध्यक्ष जगदीश नागर, नोएडा महामंत्री विनोद शर्मा और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। इन नेताओं ने उद्योग की समस्याओं को उजागर करते हुए सरकार से तत्काल समाधान की अपील की है।
महाधिवेशन का उद्देश्य और अपेक्षाएं
19-20 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में होने वाले इस महाधिवेशन का मुख्य उद्देश्य उद्योग की समस्याओं का समाधान खोजना और सरकार से उद्योग का दर्जा दिलाने के साथ-साथ GST, भूमि, परिवहन एवं नियामक नियमों में सुधार लाना है।
इस आयोजन के माध्यम से उद्योग को स्थिरता, प्रोत्साहन और संरचनात्मक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाने की उम्मीद है।
























