राजस्थान के कोटा शहर में बीसी के नाम पर करोड़ों की रकम जुटाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरकेपुरम थाना क्षेत्र में यह धोखाधड़ी का मामला जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है। शिकायतकर्ता जितेंद्र पालीवाल की रिपोर्ट पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह मामला अब पूरे कोटा जिले में चर्चा का केंद्र बन चुका है और लोगों के मन में इस धोखाधड़ी की सच्चाई जानने की जिज्ञासा जागरूक हो गई है।
कोटा में बीसी के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला
कोटा के आरकेपुरम क्षेत्र में बीसी के नाम पर लोगों से भारी रकम जमा करवाने का मामला प्रकाश में आया है। शिकायत के मुताबिक, अलग-अलग बीसी संचालकों के माध्यम से करीब 500 से 1000 लोगों से 8 से 10 करोड़ रुपये तक की रकम जमा कराई गई हो सकती है। हालांकि, यह आंकड़ा फिलहाल शिकायत में दर्ज आरोपों पर आधारित है। पुलिस की शुरुआती जांच अभी इस बात का पता लगाने में लगी है कि कितने लोगों ने अपना पैसा इस धोखाधड़ी में लगाया है और कुल कितनी रकम एकत्र हुई है।
शिकायत में आरोप
शिकायत के मुताबिक, आरकेपुरम के केशवपुरा निवासी जितेंद्र पालीवाल ने बताया कि कृष्ण मुरारी माहेश्वरी नामक व्यक्ति अलग-अलग बीसी संचालित करते थे। इन बीसी में शामिल लोगों से उनकी आर्थिक क्षमता के अनुसार हर माह दो हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की रकम जमा करवाई जाती थी। जमा की गई इस रकम का इस्तेमाल निवेश और अन्य वित्तीय कार्यों के नाम पर किया जाता था। लोगों को बीसी की अवधि पूरी होने पर अपनी जमा रकम वापस मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह उम्मीद अधूरी साबित हुई।
बीसी की अवधि पूरी होने के बाद नहीं मिली रकम
शिकायत में कहा गया है कि बीसी की अवधि समाप्त होने के बाद भी कई लोगों को उनकी जमा रकम वापस नहीं मिली। जब संबंधित लोग इस रकम की वापसी के लिए संपर्क करने लगे तो उन्हें लगातार टालमटोल किया गया। शुरुआत में आश्वासन दिए गए कि पैसा जल्द ही वापस कर दिया जाएगा, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ भुगतान न होने पर संबंधित लोग निराश हो गए। इसके बाद जब उन्होंने बार-बार फोन कॉल किए और संपर्क किया, तो फोन उठाना भी बंद कर दिया गया। इस पूरे मामले में अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शनों की होगी जाँच
मामले की जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वास्तव में कितने लोगों ने बीसी में पैसा लगाया है और कुल कितनी रकम जमा हुई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से बैंक खातों के लेन-देन, बीसी की रसीदें, डायरी, हिसाब-किताब और अन्य दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है। इन दस्तावेजों और बैंकिंग ट्रांजेक्शनों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी रकम जमा हुई, किस खातें में गई और आगे क्या लेन-देन हुआ।
करोड़ों की रकम का पर्दाफाश
अगर पुलिस की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला बहुत बड़ा हो सकता है। इसमें प्रभावित लोगों की संख्या और जमा रकम का आंकड़ा काफी अधिक हो सकता है। यह धोखाधड़ी का मामला न केवल कोटा बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक चेतावनी है कि कैसे कुछ लोग जनता के विश्वास का फायदा उठाकर भारी रकम की ठगी कर सकते हैं। दस्तावेजों और बैंकिंग ट्रांजेक्शनों की जांच के बाद ही इस बात का खुलासा हो पाएगा कि कितनी रकम किसके खातें में गई और इसका इस्तेमाल कैसे हुआ।
पुलिस की भूमिका और आगे की कार्रवाई
एफआईआर के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। पुलिस बीसी से जुड़े लोगों के बयान लेने के साथ-साथ बैंकिंग रिकॉर्ड, रसीदें और अन्य दस्तावेजों का भी विश्लेषण कर रही है। इस जांच के परिणामस्वरूप ही यह पता चल सकेगा कि कितने लोगों का पैसा इस धोखाधड़ी में लगा है और कुल कितनी रकम का घोटाला हुआ है। अभी यह मुद्दा जांच के अधीन है और पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले का सही सच सामने आएगा।
यह मामला अब पूरे कोटा जिले में चर्चा का विषय बन गया है। प्रभावित लोगों की संख्या और रकम का सही आंकड़ा पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएगा। इस मामले में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बड़ा घोटाला साबित हो सकता है। जनता में इस तरह की धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूकता फैलाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों से बचा जा सके।


























